सतना में सिस्टम की पोल खोलती तस्वीर: सड़क के अभाव में चारपाई पर मरीज को ढोने को मजबूर ग्रामीण

मध्य प्रदेश के सतना जिले के रामपुरा गांव में पक्की सड़क न होने के कारण आज भी मरीजों को चारपाई पर लिटाकर मुख्य मार्ग तक लाया जाता है, जिससे विकास के बड़े-बड़े दावों की पोल खुल रही है।

आज के आधुनिक युग में जहां एक तरफ देश बुलेट ट्रेन और एक्सप्रेसवे के सपने देख रहा है, वहीं दूसरी तरफ मध्य प्रदेश के कुछ गांवों से ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं जो विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। सतना जिले से एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां सड़क न होने के कारण ग्रामीणों को आज भी आदिम युग की तरह जीवन जीने पर मजबूर होना पड़ रहा है। यहां एंबुलेंस न पहुंच पाने की वजह से एक बीमार बुजुर्ग महिला को चारपाई पर लिटाकर अस्पताल ले जाना पड़ा।

चारपाई बनी मजबूरी की एंबुलेंस

यह पूरा मामला सतना जिले की कोठी तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गौरैया के रामपुरा गांव का है। शनिवार को इस गांव में रहने वाली एक बुजुर्ग महिला प्रेमवती त्रिवेदी की तबीयत अचानक बहुत ज्यादा बिगड़ गई। वह पैरालिसिस की बीमारी से पीड़ित थीं। गांव तक पक्की सड़क न होने के कारण कोई भी वाहन या सरकारी एंबुलेंस वहां नहीं पहुंच सकी। ऐसे में उनके परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था।

बुजुर्ग महिला की जान बचाने के लिए ग्रामीणों ने तुरंत एक चारपाई का इंतजाम किया। उन्होंने बीमार महिला को उस चारपाई पर लेटाया और फिर अपने कंधों पर उठाकर मुख्य सड़क की तरफ चल दिए। ग्रामीणों को लगभग डेढ़ किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ा। यह पूरा रास्ता बेहद कच्चा और कीचड़ से भरा हुआ था। हर कदम पर फिसलने का डर था, लेकिन किसी तरह हिम्मत जुटाकर ग्रामीण महिला को मुख्य सड़क तक लेकर पहुंचे, जहां से उन्हें आगे अस्पताल भेजा गया। इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

राज्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र का मामला

सड़क की इस बदहाली ने स्थानीय प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह रामपुरा गांव मध्य प्रदेश की नगरीय विकास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। मंत्री के अपने ही क्षेत्र में विकास की ऐसी जर्जर स्थिति देखकर लोग हैरान हैं और सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होने के बाद सरकार की काफी किरकिरी हो रही है।

सौ घरों की आबादी, लेकिन बुनियादी सुविधाएं गायब

ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, रामपुरा गांव में लगभग 100 घर हैं और यहां की आबादी काफी समय से बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है। गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली लगभग डेढ़ किलोमीटर की सड़क पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। बारिश का मौसम आते ही इस रास्ते की हालत और भी बदतर हो जाती है। पूरे रास्ते में भारी कीचड़ और फिसलन हो जाती है, जिससे पैदल चलना भी दूभर हो जाता है। ऐसे में किसी भी वाहन, विशेष रूप से एंबुलेंस का गांव के अंदर आना पूरी तरह नामुमकिन हो जाता है। इस गंभीर समस्या के कारण बीमार लोगों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को समय पर इलाज मिलना एक बड़ी चुनौती बन गया है और ग्रामीणों को इसी तरह जान जोखिम में डालकर चारपाई या कंधों का सहारा लेना पड़ता है।

https://hindi.news18.com/news/madhya-pradesh/satna-people-forced-to-take-hospital-by-carry-patient-their-shoulders-local18-10650365.html