एक तालाब से दोहरी कमाई का बेहतरीन तरीका: मखाना और मछली पालन में इन 4 बातों का रखें खास ख्याल

किसान अब एक ही तालाब में मखाना और मछली पालन करके अपनी आय को दोगुना कर रहे हैं। मत्स्य विभाग के विशेषज्ञों ने इसे सफल बनाने के लिए चार महत्वपूर्ण सावधानियां बरतने की सलाह दी है।

खेती के साथ मछली पालन का नया मॉडल

आजकल के किसान खेती के साथ-साथ आय के अन्य स्रोत तलाशने में काफी रुचि ले रहे हैं। यही वजह है कि पारंपरिक खेती से हटकर अब किसान हाईटेक तरीके अपना रहे हैं। तालाब का निर्माण कर एक साथ कई तरह की उपज प्राप्त करना अब एक फायदे का सौदा बनता जा रहा है। विशेष रूप से मखाना की खेती अब मिथिलांचल जैसे क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं रह गई है, बल्कि पूरे देश के किसान इसे अपना रहे हैं। यदि सही योजना के साथ काम किया जाए, तो एक ही तालाब से मखाना और मछली, दोनों का उत्पादन करके किसान अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं।

मत्स्य पदाधिकारी ने बताई 4 जरूरी बातें

मत्स्य पदाधिकारी कृष्ण कन्हैया ने उन किसानों के लिए कुछ विशेष सुझाव दिए हैं जो एक ही तालाब में मखाना और मछली दोनों का पालन करना चाहते हैं। उनका कहना है कि अगर आप सावधानी बरतते हैं, तो यह प्रयोग बेहद सफल साबित हो सकता है।

  • मछली की सही प्रजाति का चयन: तालाब में मछली पालते समय यह ध्यान रखें कि आप केवल उन्हीं प्रजातियों का चुनाव करें जो पानी के बीच वाली सतह या फिर तालाब की सबसे निचली सतह पर पलती हैं। यह मखाना की खेती के साथ संतुलन बनाने में मदद करता है।
  • खाली जगह का प्रावधान: यदि आपके तालाब का क्षेत्रफल लगभग एक एकड़ का है, तो उसमें 20X20 फीट की एक खुली जगह जरूर छोड़नी चाहिए। इसके अलावा, आप 10X10 फीट की दो अलग-अलग जगहें भी खाली रख सकते हैं।
  • बांस से घेराबंदी: खाली छोड़ी गई इस जगह को बांस की मदद से चारों तरफ से घेर देना चाहिए ताकि वहां मखाना के पौधे न उग पाएं। यह खाली हिस्सा मछलियों के लिए जीवन रक्षक साबित होता है।
  • सांस लेने में सुविधा: ऊपर बताई गई खाली जगह के माध्यम से मछलियां पानी की ऊपरी सतह पर आसानी से आ सकेंगी और शुद्ध ऑक्सीजन ले सकेंगी। इससे मछलियों को किसी भी प्रकार की क्षति नहीं होगी और वे सुरक्षित रहेंगी।

कीटनाशकों का इस्तेमाल न करें

मखाना की फसल उगाने वाले किसानों को सबसे अहम सावधानी यह बरतनी चाहिए कि वे किसी भी स्थिति में कीटनाशक दवाओं का प्रयोग न करें। कीटनाशकों का इस्तेमाल करने से तालाब में पलने वाली मछलियों की जान जा सकती है, जिससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। इसका सबसे अच्छा समाधान यह है कि मखाने के पौधों पर लगने वाले कीटों को मछलियां खुद ही खाकर खत्म कर देती हैं, जिससे फसल भी सुरक्षित रहती है और मछलियों को प्राकृतिक आहार भी मिल जाता है।

लगातार बढ़ रहा है तालाबों का चलन

मौजूदा समय में तालाब खुदवाने और उसमें एकीकृत खेती करने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। किसान अब यह बखूबी समझ रहे हैं कि एक ही संसाधन का उपयोग करके वे अपनी कमाई को कैसे कई गुना बढ़ा सकते हैं। अगर सही तकनीक और वैज्ञानिक सलाह को अपनाया जाए, तो मखाना और मछली पालन का यह फॉर्मूला किसी भी किसान के लिए मुनाफे का सुपरहिट जरिया बन सकता है।

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