इस्तीफे के बाद नीरज भारती का सिलसिलेवार हमला: ‘5 में से 2 अटैची खुद, 3 दिल्ली’, सीएम सुक्खू पर उगाही का गंभीर आरोप

हिमाचल कांग्रेस के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद पूर्व विधायक नीरज भारती ने सोशल मीडिया पर 36 पोस्ट कर मुख्यमंत्री सुक्खू पर पैसों की उगाही, कार्यकर्ताओं की अनदेखी और निकाय चुनाव में हार के आरोप लगाए। उन्होंने अगले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ चार सीटें मिलने की भविष्यवाणी भी की।

हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्य संसदीय सचिव और पूर्व विधायक नीरज भारती ने प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया है। इस्तीफे के तुरंत बाद उन्होंने एक के बाद एक कई पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर सीधे और गंभीर आरोप जड़ दिए। उनका सबसे बड़ा आरोप यही रहा कि मुख्यमंत्री पैसों की उगाही कर रहे हैं।

अपनी पोस्ट में नीरज भारती ने पार्टी की कार्यशैली से लेकर सरकार के कामकाज तक पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बीते तीन साल में कार्यकर्ताओं के काम नहीं हो रहे और दावा किया कि अगले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को केवल चार सीटें ही मिलेंगी। सोशल मीडिया पर इतनी सारी पोस्ट डालने को लेकर भी उन्होंने अपनी सफाई दी।

किसे भेजा इस्तीफा

नीरज भारती ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार को अपना इस्तीफा भेजा। उन्होंने कहा कि यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन वह मौजूदा राज्य सरकार से निराश हैं और इसी वजह से उपाध्यक्ष पद छोड़ रहे हैं। उल्लेखनीय है कि नीरज भारती के पिता चंद्र कुमार सुक्खू मंत्रिमंडल में मंत्री हैं। नीरज भारती स्वयं 2012 से 2017 तक वीरभद्र सिंह सरकार में विधायक रहे थे। उनकी सिलसिलेवार पोस्ट से सोशल मीडिया पर हलचल मच गई।

‘कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं’

नीरज भारती ने लिखा कि सुक्खू से उनकी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है। उन्होंने कहा कि जब सुक्खू मुख्यमंत्री नहीं थे, तब भी वह उन्हें संघर्षशील और अपनी बात पर अड़े रहने वाला नेता मानते थे। उन्होंने तंज कसा कि कभी जो लोग राजा वीरभद्र सिंह के कान सुक्खू के खिलाफ भरते थे, आज वही उनके खास बन गए हैं।

उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात से कोई आपत्ति नहीं कि कौन खास है और कौन नहीं, यह राजनीति का हिस्सा है। उनकी असली शिकायत यह है कि बीते तीन सालों में कार्यकर्ताओं, आम लोगों और पार्टी नेताओं को काम के बजाय सिर्फ उम्मीदें और आश्वासन मिले, जबकि तवज्जो कुछ खास मित्रों और इधर-उधर रहने वालों को मिली।

राहुल गांधी की पदयात्रा का जिक्र

नीरज भारती ने याद दिलाया कि जब राहुल गांधी की पदयात्रा हिमाचल पहुंची थी और नई सरकार बनी ही थी, तब सुक्खू के कहने पर वह अपने ज्वाली विधानसभा क्षेत्र से 2000 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को लेकर सुबह करीब 3 बजे निकले थे और पंजाब-हिमाचल बॉर्डर मीरथल में सुबह लगभग 6 बजे राहुल गांधी का स्वागत किया था। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यकर्ता बेवकूफ नहीं होते जो हर परिस्थिति में पार्टी के साथ खड़े रहते हैं, लेकिन दुख तब होता है जब सरकार बनने के बाद वही लोग खुद को हाशिए पर महसूस करने लगें।

निकाय चुनाव और 2027 पर तंज

उन्होंने लिखा कि उन्होंने वक्त-वक्त पर सरकार और सुक्खू को चेताने की कोशिश की कि कार्यकर्ताओं और आम लोगों की बात सुनना जरूरी है, पर शायद इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। उनके मुताबिक अब पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों में इन कारगुजारियों की झलक दिखने लगी है, जबकि ऊपर से जबरन जीत का श्रेय लेने की कोशिश हो रही है। उन्होंने तंज में कहा कि राजनीति में हर चीज की एक किश्त होती है और अगली किश्त 2027 में भी मिल जाएगी।

नीरज ने कहा कि वह चाहते तो चुप रहकर सत्ता का आनंद ले सकते थे, सिस्टम का हिस्सा बनकर अपने काम निकाल सकते थे और पैसे भी कमा सकते थे, लेकिन आखिर में चेहरा उन्हीं कार्यकर्ताओं को दिखाना है जिनकी मेहनत और भरोसे से सत्ता तक पहुंचे हैं। उन्होंने लिखा कि पैसा कमाना बड़ी बात नहीं, जमीर का बचा रहना बड़ी बात है, क्योंकि कुर्सी और सत्ता हमेशा नहीं रहती।

भाजपा सरकार से तुलना

नीरज भारती ने 2017 से 2022 की जयराम ठाकुर सरकार से तुलना करते हुए कहा कि उस दौर में भाजपा विधायकों के पास आज की कांग्रेस सरकार के उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों से कहीं ज्यादा ताकत थी। उन्होंने दावा किया कि उस समय विधायक सुबह मुख्यमंत्री के पास जाते और शाम तक काम करवाकर लौट आते थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि आज मंत्री डीओ साइन कराकर ले जाते हैं या मुख्यमंत्री को भेजते हैं, मुख्यमंत्री सामने मंजूरी भी दे देते हैं, लेकिन बाद में अफसरों को कह दिया जाता है कि कुछ नहीं करना। उनके मुताबिक दफ्तर में एक स्पेशल ट्रंक रखा है, जिसमें फाइलें डाल दी जाती हैं और वहां से सिर्फ 2-3 खास मित्रों की फाइलें ही बाहर निकलती हैं, बाकी कहीं गुम हो जाती हैं।

‘बिकने वालों में नहीं’

कुछ लोगों के यह कहने पर कि नीरज भारती की भी कोई कीमत लगी होगी, उन्होंने तीखा जवाब दिया कि वह न कभी बिकने वालों में रहे हैं और न किसी की हैसियत है कि उन्हें खरीद सके। उन्होंने कहा कि अगर कभी उनकी कीमत लगी भी, तो वह चाटुकारी करने वालों से कहीं ज्यादा होगी, क्योंकि रीढ़ की हड्डी वाले लोग बिकते नहीं और अपने फैसले खुद लेते हैं।

कार्यकर्ताओं को रिपोर्ट कार्ड याद दिलाया

उन्होंने प्रदेश कांग्रेस कार्यकर्ताओं से कहा कि मोदी और भाजपा को बाद में कोसना, पहले 2022 में संघर्ष कर बनाई अपनी सरकार का रिपोर्ट कार्ड लो। उन्होंने कहा कि कभी अपने घर की ओर भी देखो कि जनता के बीच सरकार की क्या स्थिति है और कार्यकर्ताओं की कितनी सुनवाई हो रही है। उन्होंने कहा कि जिन कार्यकर्ताओं ने मुश्किल समय में पार्टी का झंडा उठाए रखा, अगर वही आज उपेक्षित और निराश महसूस करें तो यह चिंता की बात है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि सिर्फ बड़ी-बड़ी गारंटियां देकर सरकार बना लेना ही सब कुछ नहीं होता, असली काम उसके बाद शुरू होता है—जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने और कार्यकर्ताओं को सम्मान देने में। उन्होंने कहा कि जनता अब भाषणों से नहीं, जमीन पर काम और नतीजों से फैसला करती है।

मुख्यमंत्री की गाड़ियों पर निशाना

नीरज भारती ने कटाक्ष किया कि शायद वह प्रदेश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो साल के 364 दिन टोयोटा फॉरच्यूनर, फोर्ड एंडेवर, हुंडई की इलेक्ट्रिक कार, दूसरी लग्जरी गाड़ियों और हेलिकॉप्टर में घूमते हैं, लेकिन साल में एक दिन बजट पेश करने के लिए अपनी निजी मारुति आल्टो में आते हैं—वह भी आगे-पीछे पुलिस की लग्जरी गाड़ियों का काफिला लगाकर। उन्होंने कहा कि इतने दिखावे के बावजूद अगर जनता को नतीजे महसूस न हों तो रिजल्ट जीरो ही माना जाएगा।

‘न भाजपा में, न किसी और दल में’

नीरज भारती ने आरोप लगाया कि सरकार को भाजपा से लड़ने वाले नहीं, बल्कि चाटुकारी करने वाले लोग चाहिए। उन्होंने साफ किया कि वह न भाजपा में जाएंगे और न किसी और दल में, बल्कि अब इस ‘दलदल’ से आजादी पाएंगे। उन्होंने अनुशासन के नाम पर चुप रहने की बात को खारिज करते हुए कहा कि जहां समर्पित कार्यकर्ताओं की मेहनत और भावनाओं की कद्र न हो, वहां ऐसा अनुशासन किस काम का।

ठेकेदारों की पेमेंट पर उगाही का आरोप

उन्होंने सबसे गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ठेकेदारों की पेमेंट इस तरह हो रही है मानो किसी की 25 लाख की पेमेंट फंसी हो तो शिमला जाकर 2–3 लाख देने पड़ते हैं; तब थोड़ी देर के लिए ट्रेजरी खुलती है और घर पहुंचने तक पेमेंट रिलीज हो जाती है। उन्होंने दावा किया कि इस बंदरबांट में कौन-कौन शामिल है, यह सब उन्हें पता है और यह हवा-हवाई बात नहीं, बल्कि हमीरपुर के एक ठेकेदार ने खुद उन्हें यह बताया था।

प्रदेश अध्यक्ष को लेकर सुक्खू का बयान

नीरज भारती ने एक मुलाकात का जिक्र करते हुए लिखा कि उनकी और दो अन्य विधायकों की सुक्खू से मुलाकात हुई थी—कुल मिलाकर 2–3 बार ही उनकी सुक्खू से मुलाकात हुई होगी। उस दौरान प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चर्चा चली तो सुक्खू का जवाब था कि हाईकमान जिसे चाहे प्रदेश अध्यक्ष बना दे, वह मुख्यमंत्री से बड़ा थोड़े ही होगा। इस पर उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे को संबोधित करते हुए सवाल किया कि क्या दिल्ली में भी हाल ऐसा ही है। उन्होंने कहा कि पार्टी का पदाधिकारी मुकेश अग्निहोत्री और विनय कुमार की बात पर बना था, लेकिन बाद में पता चला कि सुक्खू के इशारों पर नाचना होगा।

थानों के नाम गिनाए

उन्होंने चुनौती भरे अंदाज में पूछा कि उनके खिलाफ किस थाने—ढली, छोटा शिमला, बड़ा शिमला, बालूगंज या सीआईडी लांगवुड—में केस करना है। उन्होंने गर्व जताया कि भले एक बार ही विधायक बनने का मौका मिला, पर उसी दौरान राजा वीरभद्र सिंह की सरकार में मुख्य संसदीय सचिव रहने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि राजा साहब जनहित के कामों को गंभीरता से लेते थे, जबकि आज हर मुद्दे पर बहाने और हर कमी पर सफाई दिखती है।

अफसरों को निर्देश का दावा

नीरज भारती ने आरोप लगाया कि अफसरों को कह दिया गया है कि जिनके काम हैं उनके सामने चाहे जितने फोन कर दिए जाएं या फाइलों पर साइन कर दिए जाएं, काम सिर्फ वही करना है जो मुख्यमंत्री निजी नंबर से व्हाट्सएप करें। उन्होंने कहा कि राजा साहब के समय जरूरत पड़ने पर हाथ पकड़कर भी काम करवा लिया जाता था, जबकि आज आम लोग, कार्यकर्ता और नेता चक्कर काटते-काटते परेशान हो रहे हैं।

पिता को मंत्री पद छोड़ने का प्रस्ताव

उन्होंने खुलासा किया कि कुछ समय पहले उनके पिता ने बताया था कि दिल्ली से पार्टी के लोग चाहते हैं कि वह और कर्नल धनीराम शांडिल मंत्री पद से हट जाएं तो दोनों के बेटों को सरकार में चेयरमैन बना दिया जाएगा। नीरज ने कहा कि उन्होंने उसी समय अपने पिता को साफ मना कर दिया था और कहा था कि अगर वह हटना चाहें तो उनकी मर्जी, लेकिन वह इस ‘निकम्मी’ सरकार का हिस्सा नहीं बनेंगे। उन्होंने कहा कि बंद कमरों में कोई नहीं सुनता, इसलिए सच्चाई लोगों तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया पर आना पड़ा।

‘4 और 64 का अंतर रहेगा’

नीरज भारती ने दावा किया कि जिन विधायकों और कुछ मंत्रियों ने सुक्खू को मुख्यमंत्री बनाने में समर्थन दिया था, वे आज एक-दो को छोड़कर बंद कमरों में सिसकियां लेते हैं पर खुलकर बोल नहीं पाते, क्योंकि उन्हें डर है कि बोलते ही कारण बताओ नोटिस आ जाएगा। उन्होंने लिखा कि ‘4 और 64 का अंतर रहेगा’ और जिसे शक है वह पोस्ट सेव कर ले—कुछ दिन पहले तक यह आंकड़ा 8 और 60 का था, लेकिन स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों के नतीजों के बाद यह अपडेट हुआ है।

उन्होंने कहा कि जिसने भाजपा सरकार के समय विपक्ष के तौर पर मोर्चा संभाला, विधानसभा के भीतर और बाहर कांग्रेस को मजबूती दी और लड़ाइयां लड़ीं, मुख्यमंत्री बनाने की बारी आई तो उसे ही नजरअंदाज कर दिया गया और ऐसे व्यक्ति को मुख्यमंत्री बना दिया गया जो कैंपेन कमेटी का चेयरमैन होने के बावजूद अपने विधानसभा क्षेत्र से बाहर ही नहीं निकला।

‘5 अटैची में 2 खुद, 3 दिल्ली’

नीरज भारती ने सबसे विस्फोटक दावा करते हुए लिखा कि हिमाचल के इतिहास में दर्ज होगा कि अगर किसी ने कांग्रेस का बेड़ागर्क किया तो वह ‘दो सुख’ ही थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर अटैची न भेजी जाती तो कब के घर बिठा दिए जाते—महीने में 5 अटैची इकट्ठा होते हैं, जिनमें से 2 खुद रख लिए जाते हैं और 3 दिल्ली भेजे जाते हैं।

उन्होंने कहा कि उन्हें प्रदेश कांग्रेस का उपाध्यक्ष बनाकर कोई एहसान नहीं किया गया था, उन्होंने भाजपा के खिलाफ लड़ाइयां लड़ी हैं और किसी की जूते चाटकर पद हासिल नहीं किया। उन्होंने बताया कि प्रदेशाध्यक्ष विनय कुमार और जिला अध्यक्ष अनुराग शर्मा को अपना इस्तीफा भेज दिया है।

तबादलों और डीओ पर सवाल

एक अन्य पोस्ट में नीरज भारती ने लिखा कि तबादले कब शुरू होते हैं और कब बंद हो जाते हैं, इसका पता ही नहीं चलता। ऊपर से भेजे गए डीओ का भी अता-पता नहीं रहता, पता नहीं किस बंद ट्रंक में पहुंच जाते हैं या रास्ते में ही गुम हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे हो गए हैं कि कई बार कार्यकर्ताओं और आम लोगों का फोन उठाने से भी डर लगता है, क्योंकि पता नहीं कौन सा काम बता देंगे और क्या जवाब देना पड़ेगा।

उन्होंने 2012 से 2017 के समय को याद करते हुए कहा कि तब किसी से एक बार ‘हो जाएगा’ कह देने पर उसी दिन या अगले दिन काम करवाकर खुद फोन कर बता दिया जाता था। उनके मुताबिक अब ऐसा ‘व्यवस्था परिवर्तन’ हुआ है कि लोगों को जवाब देने से पहले दस बार सोचना पड़ता है, क्योंकि भरोसा ही नहीं रहता कि आगे क्या होगा।

सोशल मीडिया का सहारा क्यों

नीरज भारती ने कहा कि कुछ लोग पूछ रहे हैं कि वह सोशल मीडिया पर क्यों लिख रहे हैं। उन्होंने जवाब दिया कि जब अंदर का सिस्टम ही सुनने को तैयार न हो और बार-बार बात रखने के बाद भी कोई असर न हो, तो अपनी बात कहां रखी जाए। उन्होंने कहा कि जब भीतर सुनवाई बंद हो जाए तो सोशल मीडिया ही आखिरी रास्ता बचता है।

डेढ़ साल बाद चुनाव, चरम पर गुटबाजी

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए करीब डेढ़ साल का समय बचा है। हाल के निकाय चुनाव ने कांग्रेस को भविष्य की तस्वीर का संकेत दे दिया है और सत्ता के इस सेमीफाइनल ने भाजपा के लिए जीत की राह आसान करने का काम किया है। ऐसे में पार्टी के भीतर गुटबाजी चरम पर है। नीरज भारती इससे पहले भी सरकार पर हमला बोल चुके हैं और यहां तक कह चुके थे कि उनके पिता कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा देने जा रहे हैं, जिससे उस समय भी खासी खलबली मची थी।

https://hindi.news18.com/news/himachal-pradesh/shimla-after-resignation-former-congress-mla-neeraj-bharti-social-media-post-extortion-allegations-against-cm-sukkhu-local18-ws-l-10541490.html