बर्बादी का रोना रोने लगा पाकिस्तान, चिनाब पर भारत की दो परियोजनाओं ने बढ़ाई बेचैनी

भारत ने चिनाब नदी प्रणाली से जुड़ी चिनाब-ब्यास लिंक परियोजना और सलाल बांध की नई सुरंग पर काम शुरू किया है, जिससे पाकिस्तान बौखला उठा है और इसे अपनी अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बता रहा है।

चिनाब नदी प्रणाली से जुड़ी दो बड़ी परियोजनाओं पर भारत द्वारा काम शुरू किए जाने की खबर ने पाकिस्तान की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इस्लामाबाद अब खुलकर यह कहने लगा है कि नई दिल्ली का यह कदम उसकी अर्थव्यवस्था के लिए घातक साबित हो सकता है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को भारत की चिनाब-ब्यास लिंक परियोजना और सलाल बांध से जुड़ी नई सुरंग परियोजना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और दावा किया कि इनसे उसके आर्थिक हितों को गंभीर चोट पहुंच सकती है।

दो परियोजनाएं, करीब 2,600 करोड़ की लागत

हाल में सामने आई जानकारी के अनुसार भारत ने चिनाब नदी प्रणाली से जुड़ी दो अहम परियोजनाओं पर काम शुरू किया है। इनमें पहली हिमाचल प्रदेश में प्रस्तावित चिनाब-ब्यास लिंक है, जबकि दूसरी जम्मू-कश्मीर स्थित सलाल जलविद्युत परियोजना में तलछट प्रबंधन के लिए बनने वाली नई सुरंग है। दोनों परियोजनाओं की कुल लागत करीब 2,600 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।

पाकिस्तान का आरोप — संधि का उल्लंघन

इन योजनाओं की जानकारी सामने आने के बाद जब पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से सवाल किया गया, तो उसने कहा कि उसने मीडिया रिपोर्ट और भारत सरकार के जारी किए सार्वजनिक टेंडर दस्तावेज देखे हैं। पाकिस्तान का दावा है कि इस लिंक परियोजना के जरिए चिनाब नदी से करीब 1.9 मिलियन एकड़ फीट पानी ब्यास नदी बेसिन की ओर मोड़ा जाएगा। उसने इसे सिंधु जल संधि का गंभीर उल्लंघन करार दिया है।

इस्लामाबाद का यह भी कहना है कि भारत ने इन परियोजनाओं को लेकर उसे कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी और न ही कोई नोटिस साझा किया। पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि भारत पानी को एक रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यहां तक कहा कि ये परियोजनाएं पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक हो सकती हैं।

संधि स्थगित होने के बाद का परिदृश्य

जल विवाद का यह नया अध्याय ऐसे समय आया है, जब भारत पहले ही सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला कर चुका है। बीते साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इस संधि को अबेयंस में रखने की घोषणा की थी। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कहा था कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते और भारत पश्चिमी नदियों पर अपने वैध हिस्से का पूरा उपयोग करेगा। इसी नीति के तहत चिनाब नदी से जुड़ी विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है और अतिरिक्त पानी के बेहतर इस्तेमाल वाली नई योजनाओं पर भी काम हो रहा है।

चिनाब-ब्यास लिंक: सबसे महत्वाकांक्षी कदम

चिनाब-ब्यास लिंक परियोजना को इस दिशा में सबसे महत्वाकांक्षी कदम माना जा रहा है। सरकारी योजना के मुताबिक इस पर 1 अगस्त से काम शुरू करने की तैयारी है और इसे 31 जुलाई 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। करीब 2,300 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना चिनाब नदी के अतिरिक्त जल को ब्यास नदी बेसिन तक पहुंचाने के लिए तैयार की जा रही है।

एनएचपीसी के दस्तावेजों के अनुसार यह परियोजना हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले की लाहौल घाटी में प्रस्तावित है। योजना के तहत चिनाब नदी पर 19 मीटर ऊंचा बैराज बनाया जाएगा और जल प्रवाह को दूसरी दिशा में मोड़ने के लिए करीब 8.7 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण होगा। परियोजना के दूसरे चरण में जलविद्युत उत्पादन की संभावनाओं को भी शामिल किया गया है।

सलाल परियोजना में बायपास टनल

इस बीच भारत ने चिनाब से जुड़ी दूसरी अहम परियोजना पर भी काम शुरू कर दिया है। जम्मू-कश्मीर स्थित सलाल जलविद्युत परियोजना में करीब 268 करोड़ रुपये की लागत से एक डायवर्जन-कम-सेडिमेंट बायपास टनल बनाई जा रही है। इस परियोजना का मकसद वर्षों पुरानी एक तकनीकी समस्या का समाधान करना है।

विशेषज्ञों के अनुसार चिनाब नदी हिमालयी क्षेत्र से बड़ी मात्रा में तलछट और गाद लेकर आती है, जिसके कारण सलाल जलाशय में लगातार सिल्ट जमा होती रही है। समय के साथ इस सिल्टेशन ने जलाशय की भंडारण क्षमता को प्रभावित किया है और टर्बाइनों की कार्यक्षमता तथा जल प्रबंधन पर भी असर डाला है। अत्यधिक गाद बाढ़ प्रबंधन को जटिल बना सकती है और जलविद्युत ढांचे की आयु भी घटा सकती है। नई सुरंग जरूरत पड़ने पर पानी को मोड़ने और जलाशय में जमा तलछट को बायपास तंत्र के जरिए बाहर निकालने में मदद करेगी।

तकनीकी ही नहीं, रणनीतिक अहमियत

भारत के लिए यह परियोजना केवल तकनीकी रूप से ही नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी अहम मानी जा रही है। पाकिस्तान की प्रतिक्रिया से साफ है कि भारत की जल परियोजनाओं को लेकर वहां गहरी चिंता पैदा हो चुकी है। खासतौर पर चिनाब नदी पर बढ़ती भारतीय गतिविधियां इस्लामाबाद को परेशान कर रही हैं, यही वजह है कि पाकिस्तान अब खुलकर इनका विरोध कर रहा है और इन्हें अपनी अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बता रहा है।

फिलहाल भारत अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने के स्पष्ट संकेत दे चुका है। ऐसे में आने वाले वर्षों में चिनाब नदी प्रणाली से जुड़ी ये परियोजनाएं भारत-पाकिस्तान संबंधों और जल कूटनीति के केंद्र में बनी रह सकती हैं।

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