यूनिवर्सिटी टाउनशिप के लिए भोपाल सबसे प्रबल दावेदार, 1000 एकड़ में आकार लेगी विश्वविद्यालय सिटी, मिलेगा करोड़ों का निवेश

भोपाल के भौंरी क्षेत्र में 700 से 1000 एकड़ में आधुनिक यूनिवर्सिटी सिटी विकसित करने की तैयारी चल रही है, जो नॉलेज एंड एआई सिटी का हिस्सा होगी। मंजूरी मिलने पर अगले पांच वर्षों में राज्य को करीब 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश मिल सकता है।

भोपाल देश की सबसे महत्वाकांक्षी शिक्षा परियोजनाओं में से एक की मेजबानी की ओर बढ़ रहा है। केंद्र सरकार की यूनिवर्सिटी टाउनशिप योजना के तहत राजधानी के भौंरी क्षेत्र में 700 से 1000 एकड़ भूमि पर एक आधुनिक यूनिवर्सिटी सिटी बसाने की कवायद शुरू हो चुकी है। इस परियोजना का मसौदा तैयार करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार और मैनिट (Maulana Azad National Institute of Technology) मिलकर केंद्र के समक्ष विस्तृत प्रस्ताव रखेंगे।

इस सिलसिले में पहली उच्चस्तरीय बैठक 3 जून को मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में हुई। प्रस्तावित यूनिवर्सिटी सिटी, राजा भोज एयरपोर्ट के समीप विकसित की जा रही 3700 एकड़ की नॉलेज एंड एआई सिटी का हिस्सा बनेगी। इस एकीकृत परिसर में विश्वविद्यालय, रिसर्च सेंटर, स्टार्टअप हब, स्किल डेवलपमेंट संस्थान और उद्योग एक ही जगह विकसित किए जाएंगे।

देशभर में बनेंगी पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप

केंद्र सरकार ने बजट 2026 में देशभर में पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप बनाने की घोषणा की है। इस योजना का प्रारंभिक मसौदा तैयार करने का दायित्व नौ एनआईटी को सौंपा गया है, जिनमें भोपाल का मैनिट भी शामिल है। इन टाउनशिप का मकसद उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप शोध, नवाचार और कुशल मानव संसाधन तैयार करना है।

भोपाल की दावेदारी क्यों मजबूत

भोपाल का पलड़ा इसलिए भारी माना जा रहा है, क्योंकि यहां पहले से एयरपोर्ट, आईटी पार्क और कई औद्योगिक परियोजनाएं मौजूद हैं। शुरुआती चरण में सरकार लगभग 700 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने की तैयारी में है। आवश्यकता पड़ने पर लैंड पूलिंग के माध्यम से अतिरिक्त जमीन भी जुटाई जा सकती है।

10 हजार करोड़ रुपये का संभावित निवेश

परियोजना को हरी झंडी मिलने पर अगले पांच सालों में मध्य प्रदेश को करीब 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश मिल सकता है। इससे उच्च शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को नई गति मिलेगी, साथ ही हजारों युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के नए रास्ते खुलेंगे।

इस मॉडल में विद्यार्थियों को वर्ल्ड क्लास शिक्षा और शोध सुविधाएं एक ही परिसर में मिलेंगी, जबकि उद्योगों को प्रशिक्षित और योग्य मानव संसाधन सहजता से उपलब्ध हो सकेगा। जानकारों के अनुसार यह परियोजना भोपाल को शिक्षा, तकनीक और नवाचार के एक बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।

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