NEET पेपर लीक से टूटी छात्रा ने उठाया दर्दनाक कदम, राहुल गांधी ने परिवार को फोन कर दिया न्याय का भरोसा

नीट पेपर लीक से व्यथित होकर मध्य प्रदेश की छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी ने आत्महत्या कर ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पीड़ित परिवार से फोन पर बात कर संवेदना जताई और न्याय की लड़ाई में साथ देने का आश्वासन दिया।

मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की रहने वाली छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी ने नीट पेपर लीक से आहत होकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। आत्महत्या से पहले लिखे सुसाइड नोट में उसने दोबारा परीक्षा देने में खुद को असमर्थ बताया और इस कदम के लिए अपने माता-पिता से माफी मांगी। छात्रा की मौत के बाद यह मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।

राहुल गांधी ने परिजनों से की बात

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मृतका के परिजनों से फोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और हर संभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि न्याय की इस लड़ाई में वे परिवार के साथ खड़े हैं।

एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष मंजुल त्रिपाठी आकांक्षा चतुर्वेदी के गांव पहुंचे और परिजनों की राहुल गांधी से फोन पर बात कराई। कांग्रेस नेता पीड़ित परिवार को तीन लाख रुपये की आर्थिक सहायता पहले ही दे चुके हैं।

नागपुर में कर रही थी नीट की तैयारी

मऊगंज जिले के हनुमना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मगनिया गांव की रहने वाली आकांक्षा चतुर्वेदी डॉक्टर बनकर अपने परिवार का नाम रोशन करना चाहती थी। वह महाराष्ट्र के नागपुर में रहकर नीट परीक्षा की तैयारी कर रही थी। बेटी के डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने के लिए परिवार ने अपनी आर्थिक स्थिति की परवाह नहीं की। किसान पिता ने किसान क्रेडिट कार्ड से लोन लेकर पूरा पैसा बेटी की पढ़ाई और कोचिंग पर खर्च कर दिया।

परिजनों के मुताबिक आकांक्षा लंबे समय से परीक्षा को लेकर दबाव में थी और नीट पेपर लीक जैसे हालिया घटनाक्रमों ने उसकी परेशानी को और बढ़ा दिया था।

कमरे में लगाई फांसी

20 मई 2026 को आकांक्षा ने नागपुर स्थित अपने कमरे में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। आत्महत्या से पहले छोड़े गए सुसाइड नोट में उसने माता-पिता से माफी मांगते हुए लिखा कि उसमें दोबारा नीट का पेपर देने की हिम्मत नहीं बची है। इस नोट ने परिवार की पीड़ा को और गहरा कर दिया। परिजन बेटी की मौत के लिए नीट परीक्षा व्यवस्था से जुड़े तनाव और अनिश्चितता को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

पढ़ाई में होनहार थी आकांक्षा

गांव में आकांक्षा की पहचान एक होनहार और मेहनती छात्रा के रूप में थी। पढ़ाई के प्रति उसकी लगन को देखते हुए पूरे परिवार और गांव को उससे बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन उसकी असमय मौत ने सारी उम्मीदों को बिखेर दिया। परिजनों का कहना है कि उन्होंने अपनी सामर्थ्य से बढ़कर आकांक्षा की पढ़ाई में सहयोग किया, मगर अब उनके पास सिर्फ यादें और दर्द ही शेष रह गया है।

बेटी को पढ़ाने के लिए गरीब किसान परिवार ने किसान क्रेडिट कार्ड से तीन लाख रुपये का लोन लिया था। इसके अलावा परिवार ने रिश्तेदारों से भी पैसे उधार लिए थे।

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