शक्ति उपासना और साधना का महापर्व आषाढ़ गुप्त नवरात्रि इस वर्ष 15 जुलाई से प्रारंभ होने जा रहा है। इस बार का यह त्योहार बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि पूरे 12 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिषविदों के अनुसार, इस विशेष काल में मां दुर्गा की आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी और साधना का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होगा।
12 वर्षों बाद बन रहा है दुर्लभ गजकेसरी योग
धार्मिक नगरी उज्जैन के विख्यात ज्योतिषाचार्य अमर डब्बावाला ने इस विशेष काल के महत्व पर प्रकाश डाला है। उनके अनुसार, इस वर्ष की गुप्त नवरात्रि कई ऐसी शुभ खगोलीय स्थितियों के साथ आ रही है, जो साधना और पूजा-अनुष्ठानों के फल को कई गुना बढ़ा देंगी। वैदिक पंचांग की गणनाओं के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी 15 जुलाई से इस पर्व का आरंभ होगा, जो पूरे 9 दिनों तक चलेगा।
इस बार नवरात्रि की शुरुआत के पहले ही दिन 12 वर्षों के बाद गजकेसरी योग और बुध पुष्य योग का एक अत्यंत दुर्लभ संयोग बन रहा है। आगामी 15 जुलाई को बुधवार का दिन है, जिसमें पुष्य नक्षत्र की उपस्थिति रहेगी। इस दिन चंद्रमा कर्क राशि में गोचर करेंगे, जहां पहले से ही विराजमान देवगुरु बृहस्पति के साथ उनकी युति बनेगी। ज्योतिष शास्त्र में गुरु और चंद्र की इस युति को गजकेसरी योग कहा जाता है। चूंकि गुरु ग्रह को एक राशि का चक्र पूरा करने में लगभग 12 वर्ष का समय लगता है, इसलिए यह अद्भुत संयोग 12 साल बाद दोबारा घटित हो रहा है, जो इसे और भी विशेष बनाता है।
साधना, सिद्धि और शुभ कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ समय
इस पूरे नौ दिवसीय पर्व के दौरान अन्य महत्वपूर्ण खगोलीय योग भी बन रहे हैं। ज्योतिषविदों के अनुसार, इस काल में निम्नलिखित शुभ योगों का निर्माण हो रहा है:
- इस पावन अवधि में 2 सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है।
- इसके साथ ही भक्तों को 3 रवि योग का विशेष संयोग भी प्राप्त होगा।
इन शुभ योगों के प्रभाव से यह समय नए कार्यों की शुरुआत के लिए सर्वोत्तम रहेगा। यदि आप कोई नया व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, बैंकिंग से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य करना चाहते हैं, तकनीक के क्षेत्र में कोई कदम बढ़ाना चाहते हैं, या फिर कार्यालय का स्थान बदलना चाहते हैं, तो यह अवधि बेहद फलदायी सिद्ध होगी।
साल की चार नवरात्रियां: प्रकट और गुप्त का भेद
श्रीमद्देवीभागवत महापुराण के प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, पूरे वर्ष में कुल चार नवरात्रि मनाने का विधान है। इनमें से दो नवरात्रि को प्रकट रूप से मनाया जाता है और दो को गुप्त रूप से रखने की परंपरा है:
- प्रकट नवरात्रि: इसमें चैत्र मास की नवरात्रि (वासंतिक नवरात्रि) और आश्विन मास की नवरात्रि (शारदीय नवरात्रि) शामिल हैं, जिनकी पूजा सार्वजनिक और प्रकट रूप से की जाती है।
- गुप्त नवरात्रि: इसमें आषाढ़ मास और माघ मास की नवरात्रि आती हैं। इन्हें गुप्त रूप से साधना और तंत्र-मंत्र की सिद्धि के लिए आरक्षित माना गया है।
गुप्त नवरात्रि का मुख्य उद्देश्य कठिन साधना, गुप्त विद्याओं की प्राप्ति और मन को नियंत्रित कर दैवीय शक्तियों से जुड़ना है। आम गृहस्थों के साथ-साथ यह समय साधकों और तांत्रिकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है।
10 महाविद्याओं की गुप्त साधना और धार्मिक महत्व
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के साथ-साथ विशेष रूप से 10 महाविद्याओं की आराधना की जाती है। इस पूजा को पूरी तरह से गोपनीय या गुप्त रखा जाता है। साधक और तांत्रिक इस दौरान तंत्र साधना, मंत्र सिद्धि और यंत्रों को जाग्रत करने के लिए विशेष अनुष्ठान करते हैं।
इस काल में की जाने वाली साधना के प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
- दस महाविद्याओं की विधि-विधान से पूजा करने पर घर-परिवार में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है।
- साधक के मन की हर अधूरी इच्छा और मुराद शीघ्र ही पूरी हो जाती है।
- विशेष रूप से तांत्रिक और अघोरी इस दौरान अपनी सिद्धियों को जाग्रत करते हैं और यंत्र, मंत्र व तंत्र की ऊर्जा को बढ़ाते हैं।
इस प्रकार, इस वर्ष की आषाढ़ गुप्त नवरात्रि न केवल आध्यात्मिक उन्नति के दृष्टिकोण से, बल्कि सांसारिक प्रगति के लिए भी अत्यंत फलदायी और कल्याणकारी सिद्ध होने वाली है। श्रद्धापूर्वक मां भगवती की आराधना करने से भक्तों के कष्टों का निवारण निश्चित है।
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