एक छोटी शुरुआत और संघर्ष की कहानी
छत्तीसगढ़ के बालोद शहर में स्थित देवांगन चाट कॉर्नर आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। गांधी भवन के निकट बुधवारी बाजार में स्थित यह दुकान बीते करीब 25 वर्षों से लोगों के स्वाद का केंद्र बनी हुई है। हालांकि, आज जो दुकान अपनी लोकप्रियता के शिखर पर है, उसकी नींव बहुत ही विनम्र तरीके से रखी गई थी। दुकान के संचालक ने साझा किया कि आज से ढाई दशक पहले उनके पास सीमित संसाधन थे और आर्थिक तंगी के कारण परिवार का गुजारा करना चुनौतीपूर्ण हो गया था। उन्होंने अपने भाइयों से भी मदद की गुहार लगाई, लेकिन किन्हीं कारणों से उन्हें सहयोग नहीं मिल पाया।
साइकिल से शुरू हुआ कारोबार
ऐसी कठिन परिस्थितियों में हार मानने के बजाय, उन्होंने अपनी बचत के केवल 45 रुपये से गुपचुप यानी पानीपूरी का व्यवसाय शुरू करने का साहस दिखाया। शुरुआती दौर बेहद संघर्षपूर्ण था, जहां वे खुद साइकिल लेकर लगभग 30 किलोमीटर के दायरे में स्थित अलग-अलग गांवों में जाकर पानीपूरी बेचा करते थे। उन्होंने कड़ा परिश्रम किया और अपने ग्राहकों का भरोसा अर्जित किया। इस मेहनत का परिणाम यह निकला कि वे जल्द ही 800 रुपये में अपना एक ठेला खरीदने में कामयाब रहे। धीरे-धीरे समय बीतता गया और यह छोटा सा काम एक सफल व्यवसाय में तब्दील हो गया।
स्वाद का जादू और किफायती दाम
देवांगन चाट कॉर्नर की सबसे बड़ी खूबी उसका लाजवाब स्वाद और जेब पर भारी न पड़ने वाली कीमतें हैं। संचालक ने याद करते हुए बताया कि एक समय था जब नाश्ता महज ढाई रुपये में मिल जाया करता था और एक रुपये में चार पानीपूरी दी जाती थी। महंगाई के दौर में भी आज यह दुकान काफी किफायती है। वर्तमान में यहाँ 10 रुपये में चार पानीपूरी मिलती हैं, जबकि चाट की एक प्लेट की कीमत मात्र 20 रुपये है। यही कारण है कि यहाँ समाज के हर वर्ग के लोग अपनी पसंद का नाश्ता करने आते हैं।
मेनू में क्या-क्या है खास?
यहाँ मिलने वाले व्यंजनों की सूची काफी लंबी है। इस दुकान पर तीन तरह की चाट, गरमागरम समोसे, दही कचौड़ी, खस्ता और पानीपूरी समेत कई स्वादिष्ट पकवान मिलते हैं। इनमें से पूरे बालोद शहर में समोसा चाट को सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। खास तौर पर बारिश के मौसम में इन व्यंजनों की मांग इतनी बढ़ जाती है कि ग्राहकों की लंबी कतारें लग जाती हैं। यहाँ का जायका लोगों को दूर-दूर से खींच लाता है।
दैनिक बिक्री और ग्राहकों की भारी भीड़
दुकान के संचालक के पुत्र लक्की देवांगन ने जानकारी दी कि यहाँ का कारोबार पूरे साल चलता है। एक सामान्य दिन में यहाँ लगभग 200 प्लेट समोसा, 150 प्लेट दही कचौड़ी और करीब 150 प्लेट चाट की बिक्री हो जाती है। बारिश के दिनों में यह आंकड़ा और भी अधिक हो जाता है। दुकान के समय की बात करें तो यह सुबह 11:30 बजे से लेकर रात 10 बजे तक खुली रहती है, और सप्ताह के सातों दिन ग्राहकों की चहल-पहल बनी रहती है।
सफलता की एक प्रेरणादायक मिसाल
आज देवांगन चाट कॉर्नर केवल खाने-पीने की एक जगह नहीं रह गई है, बल्कि यह संघर्ष और सफलता का एक प्रतीक बन गई है। यह दुकान इस बात का जीवित उदाहरण है कि यदि व्यक्ति के पास धैर्य, ईमानदारी और कड़ी मेहनत करने का संकल्प हो, तो बहुत मामूली निवेश से भी एक बड़ा और स्थायी मुकाम हासिल किया जा सकता है। करीब 25 साल का लंबा सफर इस बात की गवाही देता है कि ग्राहकों का भरोसा ही किसी भी व्यापार की असली पूंजी होती है।
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