बालाघाट में पिता की क्रूरता: दूसरी शादी की खातिर 12 साल की बेटी और बेटे को घर से निकाला

मध्य प्रदेश के बालाघाट में एक पिता ने दूसरी शादी रचाने की जिद में अपने ही नाबालिग बच्चों को बेघर कर दिया है। बच्चे अब न्याय के लिए जनसुनवाई का दरवाजा खटखटा रहे हैं।

जनसुनवाई में पहुंची भाई-बहन की व्यथा

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से एक अत्यंत दुखद और चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। यहाँ दो नाबालिग भाई-बहन अपने ही पिता संतोष बघेल की प्रताड़ना से तंग आकर जनसुनवाई में मदद की गुहार लगाने पहुंचे। बच्चों का आरोप है कि उनके पिता दूसरी शादी करना चाहते हैं और इसी मंशा के चलते उन्होंने अपने ही बच्चों को घर से बाहर निकाल दिया है। यही नहीं, बच्चों ने बताया कि उनके पिता एक गैराज चलाते हैं, लेकिन अब वे उन्हें उस गैराज से भी बेदखल करने पर उतारू हैं। इस पूरे मामले में पिता को उनकी 5 बुआ और सभी फूफा का भी साथ मिल रहा है, जो बच्चों को लगातार परेशान कर रहे हैं।

पुलिस से नहीं मिली मदद तो पहुंचे जनसुनवाई

पीड़ित भाई-बहन ने बताया कि उनके साथ हो रहे इस अत्याचार को लेकर उन्होंने पहले स्थानीय पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, पुलिस ने उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे उनका साहस टूटने लगा था। अंततः हार मानकर वे जनसुनवाई के मंच पर पहुंचे ताकि प्रशासन से उन्हें न्याय मिल सके और वे अपने पिता के चंगुल से सुरक्षित रह सकें।

मां की मौत के बाद से शुरू हुआ प्रताड़ना का दौर

अपनी 12 साल की छोटी बहन के साथ शिकायत लेकर पहुंचे साकेत बघेल ने अपने पिता के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। साकेत के अनुसार, उनकी मां प्रेमलता बघेल के जीवित रहते ही उनके पिता दूसरी शादी की बातें किया करते थे। मार्च 2021 में एक भयानक घटनाक्रम में पिता, बुआ और फूफा ने मिलकर उनकी मां के साथ मारपीट की और उन्हें एक कुएं में फेंक दिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। साकेत का दावा है कि उन्हें इस हत्याकांड के बारे में किसी को कुछ न बताने के लिए धमकाया गया था। उन्होंने बताया कि उनकी छोटी बहन की गर्दन पर हंसिया रखकर जान से मारने की धमकी दी गई थी, जिसके कारण वे डर के मारे लंबे समय तक चुप रहे।

जान का खतरा और गैराज से बेदखली

वर्तमान में साकेत और उनकी बहन परसवाड़ा में शरण लिए हुए हैं। उन्होंने बताया कि वहां भी उनके पिता और फूफा पहुंच जाते हैं और उन्हें धमकाते हैं। उन्हें अपने गैराज को तोड़ने की धमकियां दी जा रही हैं। पिता का कहना है कि वे उनकी संतान नहीं हैं, जिसके कारण बच्चे अब अपनी जान को लेकर डरे हुए हैं और उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है।

पुलिस की बेरुखी पर उठा सवाल

साकेत ने खुलासा किया कि बीते मार्च में उन्हें फिर से घर से निकाल दिया गया, जिसके बाद वे अपने गांव भिमोड़ी छोड़कर परसवाड़ा आ गए थे। यहां वे गैराज चलाकर अपना पेट पाल रहे थे, लेकिन अब पिता वहां भी उन्हें चैन से नहीं रहने दे रहे हैं। परसवाड़ा थाने में मां की मौत और प्रताड़ना की शिकायत करने के बावजूद पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और इसे नजरअंदाज कर दिया। वहीं, 12 वर्षीय नाबालिग बहन ने भी अपने पिता पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। उसने बताया कि पिता उसे लगातार प्रताड़ित करते हैं और अक्सर जहर देने की धमकी देते हैं, जिसकी वजह से वह अब उनके साथ नहीं रहना चाहती है।

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