ऊना के अस्पताल में बड़ा हादसा टला: खराब लिफ्ट में 5 घंटे तक फंसे रहे 11 लोग, मची अफरा-तफरी

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में स्थित एक निजी अस्पताल में लिफ्ट अचानक खराब हो गई, जिससे उसमें सवार 11 लोग पांच घंटे तक अंदर ही बंद रहे। राहत और बचाव दल की कड़ी मशक्कत के बाद सभी को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

अस्पताल में मरीजों और परिजनों की जान पर बनी

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले से एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जलग्रां स्थित एल्विस अस्पताल में सुरक्षा मानकों में भारी लापरवाही देखने को मिली है, जहां मंगलवार को एक लिफ्ट अचानक तकनीकी खराबी के चलते बीच रास्ते में ही ठप हो गई। इस लिफ्ट में कुल 11 लोग सवार थे, जो करीब 5 घंटे तक अंदर ही कैद रहे। लिफ्ट के अचानक बंद होने से अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया और परिजनों के बीच अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। बंद जगह में लंबे समय तक रहने के कारण अंदर फंसे लोगों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी, जिससे उनकी जान को खतरा पैदा हो गया था।

लिफ्ट में फँसे थे बुजुर्ग और महिलाएं

जिस वक्त यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी, लिफ्ट में महिला, युवा और बुजुर्ग समेत कुल 11 लोग सवार थे। इनमें से एक बुजुर्ग व्यक्ति की आयु तो 80 वर्ष से भी अधिक बताई गई है। लिफ्ट के अचानक रुक जाने के बाद अंदर मौजूद लोग बुरी तरह घबरा गए और मदद के लिए चिल्लाने लगे। ऑक्सीजन और घुटन की चिंता के बीच उनके परिजन बाहर खड़े होकर भगवान से प्रार्थना कर रहे थे और अस्पताल प्रशासन से लगातार जवाब मांग रहे थे। अस्पताल की ओर से समय पर तकनीकी सहायता न मिलने के कारण स्थिति और भी गंभीर होती चली गई।

चार घंटे चला रेस्क्यू अभियान

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग और आपदा प्रबंधन की टीम मौके पर पहुंची। राहत एवं बचाव दल ने तत्परता दिखाते हुए कड़ी मशक्कत के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। यह बचाव अभियान लगभग चार घंटे तक लगातार चलता रहा। टीम ने लिफ्ट के ऊपरी दरवाजे को सावधानीपूर्वक खोलने का प्रयास किया। दोपहर करीब साढ़े 12 बजे से फँसे इन लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का काम शाम साढ़े 5 बजे जाकर पूरा हो पाया। गनीमत यह रही कि इस पांच घंटे के कठिन समय में कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ और सभी को सकुशल बाहर निकाल लिया गया।

प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन की सफाई

इस घटना के बाद अब अस्पताल के रखरखाव और सुरक्षा इंतजामों पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ऊना के तहसीलदार विपिन ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि सूचना मिलने के तुरंत बाद पुलिस और फायर विभाग की टीम को घटनास्थल पर भेज दिया गया था। उन्होंने बताया कि पहले चरण में लिफ्ट से आठ लोगों को निकाल लिया गया था, लेकिन बाकी बचे तीन लोगों को बाहर निकालने में शाम तक का समय लग गया। वहीं, एल्विस अस्पताल ऊना के एमडी विवेक शर्मा का इस पर कहना है कि तकनीकी खराबी के चलते यह समस्या पैदा हुई थी, जिसके बाद बचाव कार्य शुरू करके सभी फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

सुरक्षा पर सवाल

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, लिफ्ट में फँसे लोगों की तबीयत अंदर बैठे-बैठे बिगड़ने लगी थी। एक सीमित और बंद जगह में घंटों तक फँसे रहने के कारण वहां मौजूद कई लोग सदमे और घबराहट का शिकार हो गए थे। यह घटना न केवल अस्पताल के दावों की पोल खोलती है, बल्कि स्वास्थ्य संस्थानों में लिफ्ट और अन्य उपकरणों के नियमित मेंटेनेंस की अनिवार्यता को भी रेखांकित करती है। फिलहाल, सभी सुरक्षित हैं लेकिन इस लापरवाही ने जिला स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

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