वार्ता की राह में धमकियों का रोड़ा
ईरान के विदेश मंत्री ने अमेरिका को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि धमकियों का सिलसिला इसी प्रकार जारी रहा, तो किसी भी अंतिम समझौते को लेकर बातचीत शुरू करना असंभव होगा। यह बयान उस समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की चेतावनी को फिर से दोहराया है। अपनी हालिया टिप्पणियों में ट्रंप ने ईरान को लेकर अपनी आक्रामक नीति को सार्वजनिक रूप से साझा किया है। ट्रंप ने कहा कि उन्हें ईरान से कुछ रियायतें प्राप्त हुई हैं और अब उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि वे इन रियायतों का पालन करें। उन्होंने परमाणु हथियारों के प्रसार पर रोक लगाने की बात करते हुए कहा कि वे ईरान के एनरिच्ड मटीरियल को 'न्यूक्लियर डस्ट' की संज्ञा देते हैं और उन्हें यह सामग्री मिल रही है।
ट्रंप की दलीलें और ईरान को लेकर रणनीति
ईरान के संबंध में डोनाल्ड ट्रंप ने कई अहम बातें कही हैं, जिन्हें उनकी विदेश नीति के रूप में देखा जा रहा है:
- ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने बहुत मजबूती के साथ यह रुख अपनाया है कि ईरान किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता।
- अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह स्पष्ट किया कि वे शासन बदलने यानी रीजीम चेंज की सक्रिय कोशिश नहीं कर रहे हैं, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि यह प्रक्रिया अपने आप में बदलाव लाती है। ट्रंप के अनुसार, पहले और दूसरे शासन के बाद अब जो वर्तमान शासन है, वह अधिक समझदारी दिखा रहा है।
- ट्रंप ने अपनी नौसेना के प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि पिछले दो महीनों में सबसे बड़ी नाकेबंदी के कारण एक भी जहाज ईरान से बाहर नहीं निकल पाया था। हालांकि, समझौते की उम्मीद में उन्होंने नाकेबंदी को फिलहाल हटा लिया है।
- अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वे किसी भी स्थिति में जीत सुनिश्चित करेंगे, या तो समझौते के जरिए या फिर काम को पूरा करके। उन्होंने जोर देकर कहा कि काम पूरा करना उनके लिए कोई कठिन कार्य नहीं है।
- वे संघर्ष के बजाय समझौता करना अधिक पसंद करेंगे क्योंकि वे ईरान के 9.1 करोड़ लोगों पर विपरीत प्रभाव नहीं डालना चाहते।
- ट्रंप ने सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए कहा कि वे महज एक घंटे के भीतर ईरान के सभी प्रमुख पुलों और ऊर्जा आपूर्ति संयंत्रों को पूरी तरह ध्वस्त करने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास कोई धन नहीं बचा है और वे बिजली संयंत्रों को भी दोपहर के थोड़े से समय में नष्ट कर सकते हैं।
NATO को लेकर निराशा
तुर्की में आयोजित NATO समिट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गठबंधन के सहयोगियों के प्रति अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के साथ मुलाकात के दौरान ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि ईरान के मुद्दे पर यूरोपीय देशों के रुख से वे बेहद निराश हैं। उन्होंने कहा कि वे एक तरह से सहयोगियों की परीक्षा ले रहे थे कि क्या वे जरूरत के समय अमेरिका के साथ खड़े होंगे, लेकिन उन्हें NATO की कार्यप्रणाली पर संदेह है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज पर हमला
क्षेत्र में तनाव के बीच ब्रिटिश सेना ने एक गंभीर घटना की जानकारी दी है। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स एजेंसी यानी UKMTO ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते समय एक टैंकर को अज्ञात वस्तु ने निशाना बनाया है। इस हमले के परिणामस्वरूप टैंकर के ढांचे को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस घटना में कोई भी व्यक्ति हताहत नहीं हुआ है और न ही किसी प्रकार के पर्यावरणीय नुकसान की सूचना मिली है।
कतर ने की हमले की निंदा
इस बीच कतर के विदेश मंत्रालय ने 'अल रेकयात' टैंकर पर हुए हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल-अंसारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए इसे अंतर्राष्ट्रीय नौवहन की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बताया। उन्होंने कहा कि यह हमला वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा के खिलाफ आक्रामकता है और यह अंतर्राष्ट्रीय कानून तथा समुद्री नौवहन की आजादी के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
https://www.indiatv.in/world/around-the-world/if-threats-are-made-there-will-be-no-talks-warned-iran-trump-respond-iran-us-war-2026-07-07-1229788