पश्चिम बर्धमान के स्कूल में छुट्टी के बाद भीतर ही कैद हो गईं महिला शिक्षिका, गेट पर ताला लगा देख मची खलबली, अभिभावकों ने किया हंगामा

पश्चिम बर्धमान जिले के एक हिंदी हाई स्कूल में छुट्टी के बाद एक शिक्षिका करीब एक घंटे तक भीतर ही बंद रहीं, जिसके बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने स्कूल पहुंचकर हंगामा किया।

पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां के कांकसा क्षेत्र में स्थित पानागढ़ बाजार हिंदी हाई स्कूल में छुट्टी होने के बाद एक महिला शिक्षिका करीब एक घंटे तक स्कूल परिसर के भीतर ही कैद रहीं। जब शिक्षिका को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला, तो उन्होंने घबराकर स्थानीय लोगों और छात्रों के अभिभावकों को फोन कर पूरी बात बताई। इसके बाद मौके पर पहुंचे लोगों ने काफी मशक्कत के बाद ताला खुलवाया और शिक्षिका को सुरक्षित बाहर निकाला। इस घटना से आक्रोशित अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और विरोध प्रदर्शन किया।

ताले में बंद शिक्षिका ने ऐसे मांगी मदद

मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित शिक्षिका का नाम कृष्णा वर्मन है, जो इस विद्यालय में मॉर्निंग शिफ्ट यानी सुबह के सत्र में पढ़ाती हैं। उनका कहना है कि रोजाना की तरह जब सुबह की पाली समाप्त हुई और वह अपने घर जाने के लिए बाहर निकलने लगीं, तो उन्होंने देखा कि स्कूल के मुख्य अंदरूनी गेट पर बड़ा सा ताला लटका हुआ है। उन्होंने पहले तो स्कूल के अन्य कर्मचारियों और वहां मौजूद लोगों को जोर-जोर से आवाजें दीं ताकि कोई आकर गेट खोल सके। जब काफी देर तक अंदर से किसी की आवाज नहीं आई और कोई मदद के लिए आगे नहीं आया, तो उन्होंने अपने फोन से कुछ अभिभावकों और पास-पड़ोस के लोगों से संपर्क साधा। सूचना मिलते ही भारी संख्या में अभिभावक स्कूल गेट पर जमा हो गए और वहां भारी हंगामा शुरू हो गया, जिसके बाद आखिरकार गेट का ताला खोला गया।

प्रधानाध्यापक की कार्यशैली पर खड़े किए सवाल

शिक्षिका कृष्णा वर्मन ने स्कूल के प्रधान शिक्षक जयंत कुमार पांडा की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिक्षिका का कहना है कि प्रधान शिक्षक अचानक से समय को लेकर बेहद कड़े और अजीबोगरीब नियम लागू कर रहे हैं। उनके इस रवैए के कारण जैसे ही निर्धारित समय पूरा होता है, वैसे ही गेट पर ताला जड़ दिया जाता है। इस तानाशाही नीति के कारण केवल छात्र ही नहीं, बल्कि कई बार स्कूल के शिक्षकों को भी भारी दिक्कतों और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

राजनीतिक रंग पकड़ने पर पुलिस ने संभाला मोर्चा

जैसे ही इस घटना की खबर पूरे इलाके में फैली, स्कूल परिसर में तनाव की स्थिति पैदा हो गई। कुछ स्थानीय भाजपा के कार्यकर्ता और समर्थक भी आक्रोशित होकर स्कूल पहुंच गए। उन्होंने प्रधान शिक्षक के खिलाफ तीखा विरोध दर्ज कराते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। माहौल को बिगड़ता देख तुरंत कांकसा थाना पुलिस को इसकी जानकारी दी गई। पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को शांत कराया और स्थिति को अपने नियंत्रण में लिया। बाद में पुलिस अधिकारियों, स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के बीच एक संयुक्त बैठक बुलाई गई, जिसके बाद ही पूरा मामला शांत हो सका।

प्रधान शिक्षक ने दी अपनी सफाई

दूसरी ओर, सभी आरोपों को खारिज करते हुए विद्यालय के प्रधान शिक्षक जयंत कुमार पांडा ने खुद का बचाव किया है। उन्होंने शिक्षिका के आरोपों को पूरी तरह से बेबुनियाद और गलत करार दिया। उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि इस बड़े परिसर में कुल तीन अलग-अलग स्कूल संचालित किए जाते हैं। ऐसे में वहां पढ़ने वाले छात्रों, विशेषकर छात्राओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करना बेहद जरूरी होता है। इसी सुरक्षा कारणों से सुबह की पाली खत्म होते ही मुख्य गेट को बंद कर दिया जाता है ताकि बाहर का कोई भी अवांछित तत्व या बाहरी व्यक्ति अंदर न घुस सके।

प्रधानाध्यापक ने यह भी कहा कि शिक्षिका को यदि कोई परेशानी थी तो उन्हें सीधे उनसे संपर्क करना चाहिए था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने के बजाय सीधे बाहर के लोगों और अभिभावकों को बुला लिया, जिससे पूरी गलतफहमी पैदा हुई। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में इस तरह की घटना फिर कभी न हो, इसके लिए स्कूल प्रबंधन आपस में बातचीत कर उचित और सुरक्षित समाधान निकालेगा।

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