बिहार की राजधानी पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव ने राज्य के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। अमूमन पर्दे के पीछे रहकर देश की बड़ी-बड़ी राजनीतिक पार्टियों को सत्ता की दहलीज तक पहुंचाने वाले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर इस बार खुद चुनावी अखाड़े में ताल ठोक रहे हैं। जन सुराज के बैनर तले खुद उम्मीदवार बनकर मैदान में उतरे प्रशांत किशोर ने बांकीपुर की जनता को रिझाने के लिए एक ऐसा अनोखा और आक्रामक सीक्रेट प्लान तैयार किया है, जिसने पारंपरिक राजनीतिक दलों की नींद उड़ा दी है। इस बार पीके का अंदाज बेहद जुदा है, जहां भारी भरकम रैलियों और कानफोड़ू लाउडस्पीकरों के शोर की जगह एक बेहद योजनाबद्ध और हाईटेक प्रचार शैली ने ले ली है।
बांकीपुर की चुनावी बिसात पर प्रशांत किशोर की जन सुराज टीम चौबीसों घंटे सक्रिय नजर आ रही है। सुबह की पहली किरण से लेकर आधी रात के सन्नाटे तक, पटना की सड़कों और गलियों में पीके का यह चुनावी चक्रव्यूह लगातार काम कर रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि प्रशांत किशोर ने इस बार जमीनी स्तर पर वोटर्स को साधने के लिए एक ऐसा त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा या कहें कि चुनावी चक्रव्यूह बुना है, जिसकी भनक विरोधियों को भी नहीं लग पा रही है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर सुबह 6 बजे से लेकर देर रात 12 बजे तक जन सुराज की टीम बांकीपुर में किस तरह पसीना बहा रही है और कैसे पारंपरिक राजनीति के पुराने ढर्रे को चुनौती दे रही है।
सुबह का आगाज: पार्कों और चाय की चुस्कियों के बीच सीधा संवाद
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में जन सुराज का प्रचार अभियान सूरज उगने के साथ ही बेहद व्यवस्थित ढंग से शुरू हो जाता है। सुबह ठीक 6 बजे जब शहर अभी जाग ही रहा होता है, तब जन सुराज की 'यूथ विंग' यानी युवाओं की टोली पूरी तरह सक्रिय हो जाती है। यह युवा ब्रिगेड पटना के प्रमुख पार्कों, ऐतिहासिक गांधी मैदान और सुबह के समय सजने वाली चाय की दुकानों पर दस्तक देती है। यहां उनका सीधा मुकाबला किसी राजनीतिक भाषण से नहीं, बल्कि वहां मॉर्निंग वॉक करने आए बुजुर्गों, नौकरीपेशा नागरिकों और प्रबुद्ध समाज के लोगों के साथ सीधी चर्चा से होता है।
इस सुबह की चौपाल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसी भी प्रकार की जातिगत या धार्मिक राजनीति पर बात नहीं की जाती। इसके उलट, युवाओं की यह टीम बांकीपुर के वास्तविक स्थानीय मुद्दों को सामने रखती है। चर्चा के मुख्य केंद्र बिंदु होते हैं बांकीपुर का भयानक जलजमाव, सड़कों पर लगने वाला भीषण ट्रैफिक जाम और सालों से उपेक्षित पड़ा जर्जर ड्रेनेज सिस्टम। चूंकि पटना का बांकीपुर इलाका पारंपरिक रूप से कायस्थ समुदाय का गढ़ माना जाता है, इसलिए यहां के जागरूक मतदाताओं से सीधे तौर पर मुद्दों के आधार पर जुड़ना प्रशांत किशोर की रणनीति का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। चाय की हर चुस्की के साथ जन सुराज के युवा मतदाताओं के मन में बदलाव का बीज बोने का काम बखूबी कर रहे हैं।
दोपहर की दस्तक: महिला ब्रिगेड की घर-घर 'साइलेंट वोटर' रणनीति
जैसे-जैसे दिन चढ़ता है और घड़ी में दोपहर के 11 बजते हैं, जन सुराज की रणनीति का दूसरा और सबसे संवेदनशील हिस्सा मैदान में उतरता है। इस विशेष दस्ते को 'महिला ब्रिगेड' का नाम दिया गया है। दोपहर 11 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक, जब घरों के पुरुष सदस्य काम पर बाहर जा चुके होते हैं, तब यह महिला टीम बांकीपुर के शहरी और संभ्रांत रिहायशी इलाकों में घर-घर जाकर दस्तक देती है। उनका मुख्य लक्ष्य घर की महिलाएं यानी वे 'साइलेंट वोटर' हैं जो अक्सर चुनावी शोरशराबे से दूर रहती हैं लेकिन मतदान के दिन निर्णायक भूमिका निभाती हैं।
यह महिला ब्रिगेड किसी राजनीतिक एजेंडे पर बात करने के बजाय सीधे महिलाओं की रोजमर्रा की समस्याओं से खुद को जोड़ती है। बातचीत की शुरुआत रसोई के बढ़ते बजट, बच्चों की स्कूली शिक्षा, निजी स्कूलों की अत्यधिक महंगी फीस और युवाओं के सामने खड़े रोजगार के संकट जैसे बेहद व्यावहारिक मुद्दों से होती है। ये टीमें महिलाओं को बेहद सरल भाषा में समझाती हैं कि इन सभी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए प्रशांत किशोर के पास क्या ठोस विजन और योजना है। महिलाओं के साथ सीधा संवाद स्थापित कर जन सुराज की टीम उनके भीतर एक गहरा विश्वास जगाने का प्रयास कर रही है, ताकि वे जाति-धर्म के बंधनों से ऊपर उठकर अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए मतदान कर सकें।
शाम का रंगमंच: नुक्कड़ नाटकों और फ्लैश मॉब के जरिए तीखा तंज
शाम ढलते ही जब लोग अपने दफ्तरों से घरों की ओर लौट रहे होते हैं, तब बांकीपुर के व्यस्ततम इलाकों में प्रचार का एक और नया और बेहद आकर्षक रूप देखने को मिलता है। शाम 5 बजे से लेकर रात 8 बजे के बीच कंकड़बाग, बोरिंग रोड और कदमकुआं जैसे सबसे व्यस्त और भीड़भाड़ वाले चौराहों पर अचानक लोगों का जमावड़ा होने लगता है। यहां किसी बड़े नेता के लंबे और उबाऊ भाषण नहीं होते, न ही बड़े-बड़े लाउडस्पीकरों का शोर सुनाई देता है। इसकी जगह जन सुराज की सांस्कृतिक टीम द्वारा नुक्कड़ नाटक और फ्लैश मॉब का आयोजन किया जाता है।
ये युवा कलाकार अपने नाटकों के जरिए बेहद मनोरंजक लेकिन बेहद तीखे अंदाज में बिहार की पिछले 30 साल की राजनीति पर करारा प्रहार करते हैं। नाटकों के माध्यम से लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के शासनकाल की कमियों, विकास के अधूरे दावों और युवाओं के पलायन के दर्द को बेहद प्रभावशाली तरीके से दर्शकों के सामने रखा जाता है। बिहार के सबसे समृद्ध और धनी माने जाने वाले बांकीपुर क्षेत्र की जमीनी हकीकत और वहां की बदहाली को इन नाटकों में इस तरह पिरोया जाता है कि दर्शक सोचने पर मजबूर हो जाते हैं। सोशल मीडिया पर भी इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों के वीडियो तेजी से साझा किए जा रहे हैं, जो युवाओं के बीच भारी उत्सुकता पैदा कर रहे हैं।
रात की चौपाल: खुद जमीन पर बैठकर सीधे संवाद करते प्रशांत किशोर
बांकीपुर में चुनावी मुकाबला और भी दिलचस्प तब हो जाता है जब सूरज पूरी तरह ढल जाता है। जन सुराज का असली और सबसे महत्वपूर्ण मोर्चा रात के वक्त खुलता है। रात 8 बजे से लेकर आधी रात 12 बजे तक खुद प्रशांत किशोर कमान संभालते हैं। वे किसी वीआईपी सुरक्षा घेरे या बड़े मंचों पर चढ़कर भाषण देने के बजाय, बांकीपुर की तंग गलियों, मलिन बस्तियों और संकरे मोहल्लों में मशाल या विशेष लाइटों के साथ पदयात्रा करते हैं।
इस पदयात्रा के दौरान पीके आम लोगों के साथ उनके चबूतरों, गलियों या मुहानों पर बैठकर 'रात की चौपाल' लगाते हैं। इस अनूठी चौपाल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें प्रशांत किशोर की तरफ से कोई एकतरफा भाषण नहीं होता। इसके विपरीत, यह पूरी तरह से एक सवाल-जवाब का सत्र होता है, जहां स्थानीय जनता खुलकर अपनी बुनियादी समस्याओं और व्यवस्था के प्रति अपनी नाराजगी को पीके के सामने रखती है। प्रशांत किशोर अत्यंत धैर्यपूर्वक उनकी हर बात सुनते हैं और फिर उन समस्याओं का एक वैज्ञानिक और व्यावहारिक समाधान उनके सामने पेश करते हैं। देर रात तक चलने वाली इन सीधे संवाद की कड़ियों ने स्थानीय लोगों के बीच पीके की छवि को एक सुलभ और समझदार नेता के रूप में स्थापित किया है।
चुनावी मेनिफेस्टो और प्रशांत किशोर के मुख्य वादे
प्रशांत किशोर का यह पूरा चुनावी अभियान केवल हवा-हवाई दावों पर नहीं, बल्कि कुछ बेहद स्पष्ट और बुनियादी मुद्दों पर टिका हुआ है। जन सुराज की आईटी टीम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगातार सक्रिय है और वहां BadloBihar तथा BankipurKaBeta जैसे हैशटैग्स को लगातार ट्रेंड कराया जा रहा है। अपने प्रचार के दौरान पीके बांकीपुर की जनता के सामने निम्नलिखित प्रमुख वादों को रख रहे हैं:
- जलजमाव का वैज्ञानिक समाधान: पीके लगातार इस बात को रेखांकित कर रहे हैं कि पटना बिहार की राजधानी है, लेकिन मानसून की मामूली बारिश में भी बांकीपुर का एक बहुत बड़ा हिस्सा पूरी तरह जलमग्न हो जाता है। वे इसके लिए ड्रेनेज सिस्टम के आधुनिक और वैज्ञानिक पुनर्गठन का वादा कर रहे हैं।
- रोजगार और स्थानीय स्टार्टअप हब: प्रशांत किशोर अपनी हर जनसभा और चौपाल में युवाओं को भरोसा दिला रहे हैं कि जन सुराज के सत्ता में आने के बाद युवाओं को रोजगार की तलाश में बिहार से बाहर पलायन नहीं करना पड़ेगा। इसके लिए वे बांकीपुर में ही विशेष रूप से डिजिटल स्किलिंग हब और अत्याधुनिक स्टार्टअप सेंटर स्थापित करने का खाका पेश कर रहे हैं।
- सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं: महिलाओं के लिए पूरी तरह सुरक्षित और भयमुक्त माहौल तैयार करना तथा बुजुर्गों के लिए पूरी तरह से मुफ्त और दुरुस्त स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना उनके चुनावी घोषणापत्र का एक बेहद अहम और बड़ा हिस्सा है। वार्ड-22 जैसी जगहों से लेकर पूरे बांकीपुर क्षेत्र की बदहाली की तस्वीरें दिखाकर वे जनता को जमीनी सच से रूबरू करा रहे हैं।
दो profesioanl सियासी किलों पर पीके का सीधा और तीखा हमला
अपनी इस बेहद आक्रामक और आधुनिक चुनावी रणनीति के जरिए प्रशांत किशोर बांकीपुर के मैदान में सीधे तौर पर दो सबसे बड़े राजनीतिक धड़ों को चुनौती दे रहे हैं। उनका पहला और सबसे मुख्य निशाना भारतीय जनता पार्टी है। गौरतलब है कि बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र पिछले 30 साल से बीजेपी का एक अभेद्य किला रहा है। प्रशांत किशोर बांकीपुर की जनता को यह समझाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं कि लगातार जीत दर्ज करने के कारण बीजेपी ने इस क्षेत्र के मतदाताओं को बेहद हल्के में ले लिया है यानी उन्हें 'टेकन फॉर ग्रांटेड' मान लिया है, जिसके परिणामस्वरूप इस क्षेत्र का अपेक्षित विकास नहीं हो सका।
वहीं, पीके का दूसरा सीधा निशाना राष्ट्रीय जनता दल यानी लालू प्रसाद यादव का परिवार और विपक्ष है। प्रशांत किशोर का साफ तौर पर कहना है कि वर्तमान विपक्ष के पास बिहार को इस बदहाली से उबारने की न तो कोई ठोस नीति है और न ही कोई स्पष्ट नीयत। वे आरोप लगाते हैं कि विपक्ष केवल और केवल जातिगत समीकरणों का भय दिखाकर और लोगों को बांटकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने का काम करता आया है।
बांकीपुर का यह उपचुनाव अब केवल किसी एक विधानसभा सीट की साधारण जंग नहीं रह गया है, बल्कि यह पारंपरिक चुनावी तौर-तरीकों के खिलाफ एक आधुनिक, तकनीक-संचालित और हाईटेक मैनेजमेंट की बहुत बड़ी परीक्षा बन चुका है। एक तरफ जहां पारंपरिक दलों का दशकों पुराना मजबूत किला और संगठन खड़ा है, वहीं दूसरी तरफ प्रशांत किशोर का बेहद चुस्त डिजिटल वॉर रूम और 24 घंटे जमीन पर पसीना बहाती समर्पित टीमें हैं जो हर एक मतदाता के मोबाइल स्क्रीन और उनके घरों के दरवाजे तक अपनी मजबूत पहुंच बना चुकी हैं। अब देखना यह बेहद दिलचस्प होगा कि बांकीपुर की प्रबुद्ध जनता प्रशांत किशोर के इस बिल्कुल नए विजन और उनके सीक्रेट प्लान पर कितना भरोसा जताती है और चुनाव के नतीजों में क्या नया इतिहास लिखती है।
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