झारखंड के कोडरमा जिले में एक किसान ने अपनी कड़ी मेहनत और सूझबूझ से खेती की तस्वीर बदल दी है। जहां आज के दौर में रसायनों और कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से खेतों की मिट्टी बंजर हो रही है, वहीं कोडरमा के चंदवारा प्रखंड के सरदारोडीह गांव के रहने वाले प्रगतिशील किसान अजय साव ने जैविक खेती के जरिए एक नई मिसाल पेश की है। अजय साव अपनी 6 एकड़ जमीन पर बिना एक बूंद रासायनिक खाद या केमिकल का इस्तेमाल किए बेहतरीन फसल उगा रहे हैं। जैविक तरीके से की जाने वाली इस अनूठी खेती की बदौलत वह हर महीने लगभग 40 से 45 हजार रुपये तक की शानदार आमदनी कर रहे हैं। उनकी इस सफलता को देखकर आसपास के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं और खेती के गुर सीखने उनके पास पहुंच रहे हैं।
गोबर की खाद से लहलहा रही है 6 एकड़ की फसल
किसान अजय साव का मानना है कि पारंपरिक और वैज्ञानिक तरीकों के मेल से खेती को घाटे के सौदे से मुनाफे के व्यवसाय में बदला जा सकता है। वर्तमान में वे अपनी पूरी 6 एकड़ जमीन पर केवल जैविक खेती ही कर रहे हैं। उन्होंने अपने खेतों में रासायनिक उर्वरकों, जहरीले कीटनाशकों या पेस्टिसाइड का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर दिया है। फसल को पोषण देने और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वे केवल गोबर की खाद का उपयोग करते हैं।
जैविक खेती के फायदों के बारे में बात करते हुए अजय साव बताते हैं कि इस पद्धति को अपनाने से भूमि की उपजाऊ क्षमता यानी मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक सुरक्षित रहती है। इसके अलावा, जैविक फसलों में प्राकृतिक रूप से प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है, जिसके कारण फसलों में कीड़े लगने का खतरा बेहद कम हो जाता है। उनकी इस तकनीक से उत्पादित सब्जियां पूरी तरह शुद्ध और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती हैं, जिससे बाजार में भी इनकी मांग बनी रहती है।
मात्र 1800 रुपये के बीज से शुरू हुआ मुनाफा
अजय साव ने अपनी इस साल की कमाई का पूरा गणित साझा किया है। उन्होंने इस वर्ष फरवरी के महीने में अपनी जमीन के एक हिस्से पर झींगा की खेती करने का फैसला किया था। इस खेती को शुरू करने के लिए उन्होंने मात्र 1800 रुपये के बीज खरीदे और उन्हें अपने खेतों में रोपा। फरवरी में बोए गए इन बीजों से अप्रैल महीने में पैदावार मिलनी शुरू हो गई थी।
इसके बाद से ही उनके खेतों में झींगा का बंपर उत्पादन लगातार जारी है। फसलों की तुड़ाई के आंकड़ों पर नजर डालें तो निम्नलिखित बातें सामने आती हैं:
- वर्तमान में अजय के खेतों से हर दूसरे दिन लगभग 2 से 3 क्विंटल झींगा की पैदावार हो रही है।
- शुरुआती दिनों में जब बाजार में झींगा की नई फसल आई थी, तब उन्हें बहुत अच्छी कीमत मिली, जिससे वे हर दूसरे दिन 3,000 से 4,000 रुपये तक की कमाई आसानी से कर लेते थे।
- हालांकि, वर्तमान समय में बाजार में इसकी आवक बढ़ने से कीमतों में कुछ गिरावट आई है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अब भी हर दूसरे दिन करीब 2,000 रुपये की आमदनी हो रही है।
मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट किसान के रूप में किया सम्मानित
अजय साव की इस लगन और सफलता ने न केवल उनके गांव बल्कि पूरे प्रशासनिक अमले का ध्यान अपनी ओर खींचा है। कृषि के क्षेत्र में उनके इस उत्कृष्ट योगदान को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा भी उन्हें सराहा गया है। पिछले दिनों झारखंड की राजधानी रांची में एक भव्य कृषि व्यापार मेले का आयोजन किया गया था। इस राजकीय कार्यक्रम के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री ने अजय साव को उनकी उत्कृष्ट कृषि पद्धतियों के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने उन्हें मंच पर एक प्रशस्ति पत्र और सम्मान स्वरूप मोमेंटो देकर उनका हौसला बढ़ाया।
अपनी सफलता का मंत्र देते हुए अजय साव कहते हैं कि आज के दौर में किसानों को पुरानी लीक से हटकर आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना चाहिए। इसके साथ ही जैविक खेती पर ध्यान केंद्रित करना और बाजार की तात्कालिक मांग को समझते हुए सही फसलों का चयन करना बेहद जरूरी है। ऐसा करने से किसान बहुत कम लागत लगाकर भी शानदार मुनाफा अर्जित कर सकते हैं। आज कोडरमा और उसके आसपास के तमाम किसान अजय के खेतों पर आते हैं, ताकि वे जैविक खाद बनाने की विधि, फसलों के कुशल प्रबंधन और उन्नत खेती के तरीकों को बारीकी से सीख सकें।
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