बिहार के बेगूसराय में स्थित इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की रिफाइनरी में अचानक स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे मजदूरों और पुलिस के बीच तीखी झड़प देखने को मिली, जिसके बाद वहां भारी बवाल मच गया। देखते ही देखते मजदूरों का यह शांतिपूर्ण आंदोलन बेहद हिंसक रूप अख्तियार कर गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को अंततः बल प्रयोग करना पड़ा और जमकर लाठियां बरसानी पड़ीं। पुलिस द्वारा किए गए इस लाठीचार्ज में कई मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस हिंसक झड़प और तोड़फोड़ के बाद पूरे रिफाइनरी क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। यह पूरा मामला रिफाइनरी थाना क्षेत्र के मुख्य गेट संख्या-1 का है।
मजदूर की मौत के बाद शुरू हुआ आक्रोश
इस पूरे विवाद की जड़ में एक मजदूर की असमय मौत है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, रिफाइनरी परिसर में कार्यरत शार्प टैंक प्राइवेट कंपनी के अधीन काम करने वाले मजदूर श्याम सुंदर पाठक बीते 29 जून को काम के दौरान एक भयानक हादसे का शिकार हो गए थे। कार्यस्थल पर उनके ऊपर एक भारी लोहे का पाइप गिर गया था, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत इलाज के लिए पास के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, तमाम कोशिशों के बाद भी उनकी जान नहीं बचाई जा सकी और इलाज के दौरान कुछ दिनों बाद उन्होंने दम तोड़ दिया।
श्याम सुंदर पाठक की मौत के बाद उनके परिजनों और साथी मजदूरों में गहरा आक्रोश फैल गया। मृतक के परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए साथी मजदूरों ने कंपनी प्रबंधन से उचित मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया था।
वादे के बाद भी नहीं मिला 17 लाख रुपये का मुआवजा
प्रदर्शन के शुरुआती चरण में कंपनी प्रबंधन और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत हुई थी। उस समय कंपनी प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को 17 लाख रुपये का मुआवजा देने का लिखित या मौखिक आश्वासन दिया गया था। परिजनों का आरोप है कि आश्वासन दिए जाने के कई दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें मुआवजे की यह राशि नहीं दी गई। इसी हीलाहवाली से नाराज होकर मृतक के परिजन और अन्य मजदूर सोमवार से रिफाइनरी के मुख्य गेट नंबर-1 पर भूख हड़ताल पर बैठ गए थे।
भूख हड़ताल के दूसरे दिन भी जब कंपनी प्रबंधन या स्थानीय प्रशासन की तरफ से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया और समझौते की कोई गुंजाइश नहीं दिखी, तो प्रदर्शनकारी मजदूरों का धैर्य जवाब दे गया। मजदूरों का आरोप है कि जब वे अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज करा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें वहां से हटाने के लिए बल प्रयोग शुरू कर दिया। पुलिस के इस रवैए ने जलती आग में घी का काम किया और मजदूर पूरी तरह से भड़क गए।
रिफाइनरी गेट पर मची भारी तबाही, करोड़ों का नुकसान
पुलिस के लाठीचार्ज से गुस्साए मजदूरों ने रिफाइनरी परिसर को निशाना बनाना शुरू कर दिया। उग्र भीड़ ने रिफाइनरी के मुख्य गेट नंबर-1 पर जमकर तोड़फोड़ की। वहां खड़े कई वाहनों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया, जिनमें कई मोटरसाइकिलें भी शामिल थीं। इसके अलावा, उपद्रवियों ने कार्यालय के भीतर घुसकर वहां लगे सीसीटीवी कैमरे, बड़ी एलईडी स्क्रीन, सुरक्षा बैरिकेडिंग और कई अन्य कीमती सामानों को तोड़ डाला।
प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस हिंसा और तोड़फोड़ की वजह से रिफाइनरी को लगभग एक करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। रिफाइनरी प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति को सामान्य करने के प्रयासों में जुटे हैं।
जांच और पुलिस की कार्रवाई
इस घटना के बाद रिफाइनरी परिसर और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। मजदूरों का स्पष्ट कहना है कि यदि मृतक श्याम सुंदर पाठक के परिजनों को पहले से तय 17 लाख रुपये की मुआवजा राशि समय पर मिल जाती, तो ऐसी अप्रिय स्थिति कभी पैदा ही नहीं होती।
दूसरी ओर, स्थानीय पुलिस प्रशासन ने मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रिफाइनरी गेट और कार्यालय परिसर में लगे कैमरों की फुटेज, मोबाइल वीडियोग्राफी और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर हिंसा भड़काने वाले उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। पुलिस का दावा है कि कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और साक्ष्यों के आधार पर आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।
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