बिहार में एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। रोजगार दिलाने और बेहतर जिंदगी का सपना दिखाकर भोले-भाले लोगों को विदेशों में फंसाने वाले एक बड़े गिरोह के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए (NIA) ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में एनआईए की एक विशेष टीम ने बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में बड़ी छापेमारी की है। इस कार्रवाई से स्थानीय स्तर पर हड़कंप मच गया है। जांच एजेंसी को आशंका है कि इस इलाके से कंबोडिया में लोगों को अवैध रूप से भेजने वाला एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय रूप से काम कर रहा था।
मोतिहारी में एनआईए की दबिश और बड़ी कार्रवाई
यह पूरा मामला मोतिहारी जिले के फेनहारा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कालूपकर गांव का है। एनआईए की टीम ने यहां रहने वाले मो. कलामुद्दीन नाम के एक संदिग्ध व्यक्ति के घर पर अचानक धावा बोला। स्थानीय पुलिस के सहयोग से की गई इस छापेमारी के दौरान टीम ने संदिग्ध के घर की सघन तलाशी ली। जांच अधिकारियों ने मो. कलामुद्दीन से कई घंटों तक आमने-सामने बिठाकर कड़ी पूछताछ की। इस दौरान एजेंसी ने संदिग्ध का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है, जिससे कई महत्वपूर्ण डिजिटल दस्तावेज और चैट मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
कंबोडिया भेजने वाले सिंडिकेट का पर्दाफाश
एजेंसी के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस संदिग्ध का नाम एनआईए के मुख्य मामले RC-10/2024/NIA/DLI में सामने आया है। यह मामला सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी से संबंधित है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि मो. कलामुद्दीन इस अवैध सिंडिकेट के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम कर रहा था। वह मुख्य रूप से कंबोडिया जाने वाले लोगों के लिए हवाई टिकट की व्यवस्था करने, उनके वीजा संबंधी दस्तावेजों को तैयार करने और यात्रा से जुड़े अन्य जरूरी इंतजामों को संभालने का काम करता था।
मुख्य आरोपी सुधीर सिंह से कनेक्शन
एनआईए की जांच में इस बात के भी पुख्ता सबूत मिले हैं कि मो. कलामुद्दीन का सीधा संपर्क छपरा जिले के रहने वाले सुधीर सिंह से था। सुधीर सिंह को इस पूरे अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी रैकेट का मुख्य मास्टरमाइंड या प्रमुख आरोपी माना जा रहा है। जांचकर्ताओं को संदेह है कि दोनों आरोपी मिलकर देश के युवाओं को निशाना बनाते थे।
इस गिरोह के काम करने के तरीके को लेकर एजेंसी को निम्नलिखित बिंदुओं पर संदेह है:
- युवाओं को विदेशों में अच्छे वेतन वाली नौकरी और सुनहरे भविष्य का झांसा दिया जाता था।
- मो. कलामुद्दीन और सुधीर सिंह मिलकर लोगों को रोजगार के बहाने कंबोडिया भेजने की पूरी व्यवस्था करते थे।
- यह एक बेहद गंभीर और संगठित नेटवर्क है जिसके तार देश के कई अन्य राज्यों से जुड़े होने की प्रबल आशंका है।
आगामी कार्रवाई और पूछताछ की तारीख
छापेमारी की कार्रवाई पूरी होने के बाद एनआईए ने मो. कलामुद्दीन को एक आधिकारिक नोटिस जारी किया है। इस नोटिस के जरिए संदिग्ध को आगामी 13 जुलाई को बिहार की राजधानी पटना में स्थित एनआईए के क्षेत्रीय कार्यालय में उपस्थित होने का कड़ा निर्देश दिया गया है। वहां जांच अधिकारी उसके जब्त किए गए मोबाइल से मिले डिजिटल साक्ष्यों, दस्तावेजों और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका के आधार पर दोबारा पूछताछ करेंगे।
इस छापेमारी के दौरान एनआईए की टीम के साथ स्थानीय पुलिस बल भी मुस्तैद रहा ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे। कार्रवाई के बाद से ही कालूपकर गांव और उसके आस-पास के इलाकों में हड़कंप मच गया है। एनआईए के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यह जांच अभी अपने शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में इस रैकेट से जुड़े कई अन्य लोगों के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
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