बिहार का गया जिला इस समय देश भर में फैले ऑनलाइन धोखाधड़ी के नेटवर्क का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है, जहां से साइबर अपराधी देश के कोने-कोने में बैठे मासूम लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। बिहार पुलिस की साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई और गया जिला पुलिस की एक विशेष टीम ने मिलकर एक ऐसे ही बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस बड़ी कार्रवाई में पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को धर दबोचा है जो सिम कार्ड बेचने वाले एजेंट के रूप में काम करता था, लेकिन इस व्यवसाय की आड़ में वह देश भर के अपराधियों को फर्जी सिम कार्ड मुहैया करा रहा था। इस अकेले आरोपी की गिरफ्तारी से देश के 22 अलग-अलग राज्यों में हुई लगभग 2.91 करोड़ रुपये की ठगी के मामलों का खुलासा हुआ है।
बिहार पुलिस और गया पुलिस की बड़ी संयुक्त कार्रवाई
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब बिहार पुलिस मुख्यालय की साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई, पटना ने तकनीकी विश्लेषण के आधार पर गया पुलिस को कुछ बेहद महत्वपूर्ण सुराग दिए। इसके बाद गया के वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जिले के डोभी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अमारूत गांव में एक संदिग्ध ठिकाने पर छापेमारी की। वहां से पुलिस ने गौतम कुमार नाम के एक आरोपी को गिरफ्तार किया, जो एक POS (पॉइंट ऑफ सेल) एजेंट के रूप में काम करता था। पुलिस ने आरोपी के पास से भारी मात्रा में यानी कुल 47 सिम कार्ड बरामद किए हैं। पुलिस अब इस आरोपी से कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि इस पूरे गिरोह के अन्य सहयोगियों और इसके पीछे के असली नेटवर्क तक पहुंचा जा सके।
22 राज्यों से जुड़े हैं साइबर धोखाधड़ी के तार
गयाजी के सिटी एसपी अभिनव ने इस मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह कार्रवाई राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल यानी NCRP पर दर्ज देश भर की शिकायतों के विश्लेषण के बाद की गई है। इस पोर्टल पर दर्ज निवेश के नाम पर होने वाले घघोटालों की गहनता से जांच की गई थी। इस तकनीकी जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि देश के 22 विभिन्न राज्यों से कुल 22 शिकायतें ऐसी दर्ज थीं, जिनमें लोगों से कुल 2 करोड़ 91 लाख 18 हजार 286 रुपये की ऑनलाइन ठगी की गई थी। जब इन सभी शिकायतों में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों की जांच की गई, तो पता चला कि इनमें से 11 सबसे संदिग्ध मोबाइल नंबर एक ही POS एजेंट के माध्यम से एक्टिवेट किए गए थे। जब इस एजेंट की लोकेशन की जांच की गई, तो इसका सीधा संबंध गया जिले से मिला, जिसके बाद छापेमारी की योजना बनाई गई।
कैसे काम करता था यह गिरोह?
शुरुआती पुलिस जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि गिरफ्तार किया गया एजेंट गौतम कुमार फर्जी या गलत दस्तावेजों के आधार पर मोबाइल सिम कार्ड एक्टिवेट करता था। इसके बाद वह इन सिम कार्डों को मोटी रकम लेकर साइबर ठगी करने वाले बड़े गिरोहों को उपलब्ध कराता था। साइबर अपराधी इन नंबरों का इस्तेमाल लोगों को शेयर बाजार में भारी मुनाफे का लालच देने, फर्जी निवेश योजनाओं में पैसे लगाने और ट्रेडिंग के जरिए रातों-रात अमीर बनाने का झांसा देकर अपने जाल में फंसाने के लिए करते थे। बरामद किए गए 47 सिम कार्डों के बारे में पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन्हें किन-किन लोगों के नाम पर जारी किया गया था और इन्हें किन अपराधियों तक पहुंचाया जाना था।
आम जनता के लिए पुलिस की जरूरी सलाह
इस बड़ी सफलता के बाद गया पुलिस और साइबर सेल ने देश भर के लोगों से सतर्क रहने की विशेष अपील की है। पुलिस ने लोगों को जागरूक करते हुए कहा है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर शेयर बाजार या ट्रेडिंग में पैसे न लगाएं। अत्यधिक मुनाफे का लालच देने वाली किसी भी संदिग्ध वेबसाइट या ऐप पर भरोसा न करें और न ही अपनी गोपनीय बैंकिंग जानकारी, जैसे ओटीपी, पासवर्ड या यूपीआई पिन किसी के साथ साझा करें। पुलिस ने लोगों से कहा है कि अगर वे किसी भी प्रकार की ऑनलाइन धोखाधड़ी के शिकार होते हैं, तो बिना देर किए तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या भारत सरकार के आधिकारिक NCRP पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं ताकि समय रहते अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
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