सफलता की नई इबारत लिखते संजीव कुमार
कहते हैं कि दृढ़ संकल्प और मेहनत अगर सही दिशा में की जाए, तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं होती। पूर्णिया जिले के रहने वाले संजीव कुमार ने इस बात को सच कर दिखाया है। एक समय ऐसा था जब संजीव दूसरों की कंपनियों में नौकरी तलाशते फिरते थे, लेकिन आज वे खुद एक सफल उद्यमी हैं। उन्होंने न केवल अपने सपनों को साकार किया, बल्कि अब वे कई अन्य युवाओं के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं। वर्तमान में उनकी कंपनी का सालाना टर्नओवर 2.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
शिक्षा और करियर का संघर्ष
संजीव कुमार ने अपनी पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने B.Tech और उसके बाद MBA जैसी उच्च डिग्रियां हासिल कीं। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सरकारी नौकरी के लिए लंबी जद्दोजहद की, लेकिन वहां उन्हें सफलता नहीं मिल सकी। हार न मानते हुए उन्होंने निजी क्षेत्र का रुख किया। वहां उन्होंने अलग-अलग कंपनियों में सेल्स मैनेजर के तौर पर अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने फील्ड विजिटर की जिम्मेदारी भी निभाई, लेकिन ये काम उन्हें उस तरह का संतोष नहीं दे पा रहे थे, जिसकी उन्हें तलाश थी। उनके भीतर खुद का मालिक बनने की एक बड़ी हसरत पल रही थी, जिसके लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत करने का फैसला किया।
बैद्यनाथ एक्वा प्राइवेट लिमिटेड की शुरुआत
अपनी उद्यमिता यात्रा के बारे में बात करते हुए संजीव बताते हैं कि उन्होंने अपने व्यावसायिक सफर की नींव दिल्ली से रखी थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में कई निजी कंपनियों के साथ काम किया। बैंक सहित विभिन्न संस्थानों में सेल्स मैनेजर रहने के दौरान उन्होंने बारीकियां सीखीं। संजीव के मन में हमेशा यह विचार आता था कि जिस तरह उन्हें शिक्षा के बाद रोजगार के लिए दर-दर भटकना पड़ा, वैसी स्थिति बिहार के अन्य युवाओं के साथ न हो। उन्होंने इसी उद्देश्य के साथ बैद्यनाथ एक्वा प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की। उन्होंने शुरुआत छोटे स्तर पर की थी, लेकिन अपनी मेहनत से धीरे-धीरे इस काम का विस्तार किया और बाद में वाटर प्लांट का बड़ा उद्योग खड़ा कर दिया।
विस्तार और युवाओं के लिए प्रेरणा
संजीव कुमार ने अपने व्यापार को केवल पूर्णिया तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अलग-अलग जिलों में अपने वाटर प्लांट की फ्रेंचाइजी खोलना शुरू किया। उनका लक्ष्य स्पष्ट है, वे अधिक से अधिक युवाओं को अपने साथ जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं। वे कहते हैं कि आज उनके पास आटा चक्की प्लांट, सोडा जूस प्लांट और वाटर प्लांट जैसी कई औद्योगिक मशीनें उपलब्ध हैं। कोई भी युवा बहुत कम लागत में उनसे जुड़कर अपने स्टार्टअप की शुरुआत कर सकता है। संजीव के पिता पूर्णिया में ही एक सरकारी स्कूल में शिक्षक थे। एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने के कारण उनके लिए यह सफर आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपने आत्मविश्वास और सही दिशा में मार्गदर्शन लेकर बिजनेस की बारीकियां समझीं।
नए उद्यमियों के लिए संजीव की सीख
संजीव का मानना है कि किसी भी बिजनेस को शुरू करने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी होना अनिवार्य है। वे नए उद्यमियों को सलाह देते हैं कि जिस भी क्षेत्र में आप कदम रखना चाहते हैं, सबसे पहले उस काम को जमीन पर जाकर देखें। वे कहते हैं, एक से दो महीने तक आप उस काम का अनुभव प्राप्त करें। जब आप उस क्षेत्र की गहराई को समझ लेंगे, तो बिजनेस करना काफी आसान हो जाएगा। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि केवल सपना देखने से कुछ नहीं होता, उसे हकीकत में बदलने के लिए बिजनेसमैन की तरह सोचने की जरूरत है। आज संजीव कुमार के प्लांट से न केवल वे खुद अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं, बल्कि कई अन्य परिवारों को भी आर्थिक मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
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