अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जॉइंट बेस एंड्रयूज से एयर फोर्स वन विमान द्वारा तुर्किये के लिए रवाना हो गए हैं। वे अंकारा में आयोजित होने जा रहे बेहद महत्वपूर्ण NATO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। 7-8 जुलाई को होने वाली इस शिखर बैठक से ठीक पहले, NATO के सदस्य देशों के बीच रक्षा खर्च, वित्तीय बोझ साझा करने और पूरे यूरोपीय क्षेत्र की सुरक्षा में अमेरिका के योगदान को लेकर पहले से ही तनाव की स्थिति बनी हुई है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने इस यात्रा की पुष्टि करते हुए बताया कि ट्रंप इस सम्मेलन के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की और सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शारा के साथ बेहद अहम बातचीत करने वाले हैं।
तुर्किये में राष्ट्रपति ट्रंप का पूरा कार्यक्रम
अमेरिकी राष्ट्रपति के इस दौरे के कार्यक्रम की रूपरेखा काफी व्यस्त है। व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप मंगलवार दोपहर को अंकारा पहुंचेंगे। वहां हवाई अड्डे पर तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन स्वयं उनका स्वागत करेंगे। द्विपक्षीय बैठक से पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति के सम्मान में एक राजकीय स्वागत समारोह आयोजित किया जाएगा, जहां वे देश के सम्मान में गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण भी करेंगे।
इसके बाद के कार्यक्रमों की रूपरेखा इस प्रकार है:
- मंगलवार शाम: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप NATO देशों के नेताओं के लिए आयोजित एक अनौपचारिक सोशल डिनर यानी रात्रिभोज में शामिल होंगे।
- बुधवार सुबह: सबसे पहले आधिकारिक स्वागत समारोह और पारंपरिक फैमिली फोटो सेशन होगा। इसके तुरंत बाद NATO के राष्ट्राध्यक्षों का मुख्य कार्य सत्र यानी वर्किंग सेशन शुरू होगा।
- बुधवार दोपहर: राष्ट्रपति ट्रंप की दो बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें निर्धारित हैं। वे सबसे पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की और उसके बाद सीरियाई अरब गणराज्य के राष्ट्रपति अहमद अल-शारा से मुलाकात करेंगे।
- रवानगी से पहले: इन सभी बैठकों को पूरा करने के बाद, अंकारा से प्रस्थान करने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस को भी संबोधित करेंगे।
तुर्किये और NATO के बीच का विवाद
अमेरिकी समाचार पत्र वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले कई सालों से NATO के सहयोगी देश तुर्किये की नीतियों को संदेह की नजर से देखते आए हैं। इस अविश्वास के पीछे कई बड़े कारण रहे हैं, जिनमें तुर्किये द्वारा रूस से अत्याधुनिक हवाई रक्षा प्रणाली की खरीद करना, सीरियाई क्षेत्र में पश्चिमी देशों के समर्थन वाली कुर्द सैन्य टुकड़ियों पर हमले करना और लंबे समय तक NATO में स्वीडन के प्रवेश को मंजूरी देने में बाधाएं खड़ी करना शामिल है।
हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप के हालिया रुख ने इस पूरे परिदृश्य को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। ट्रंप ने हाल ही में NATO को एक कागजी शेर यानी दिखावटी ताकत करार दिया था। उन्होंने खुलकर कहा था कि वे इस साल होने वाले सम्मेलन में केवल इसलिए भाग ले रहे हैं क्योंकि इसकी मेजबानी तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन कर रहे हैं। ट्रंप का यह बयान उनके और यूरोपीय सहयोगियों के बीच बढ़ते फासले और तल्ख रिश्तों को साफ तौर पर उजागर करता है।
ट्रंप ने जमकर की एर्दोगन की तारीफ
दूसरी तरफ, तुर्किये के राष्ट्रपति एर्दोगन ने अपनी AK पार्टी की हालिया बैठक में विश्वास जताया है कि इस सम्मेलन से अंतरराष्ट्रीय मंच पर अंकारा की धाक और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि तुर्किये की राजधानी अंकारा अब वैश्विक कूटनीति के एक बेहद महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगी।
डोनाल्ड ट्रंप पिछले कुछ हफ्तों से लगातार एर्दोगन के प्रति अपना समर्थन जता रहे हैं। ट्रंप ने उन्हें सार्वजनिक रूप से अपना दोस्त और एक बेहद जबरदस्त नेता कहकर संबोधित किया है। वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह जब अमेरिकी राष्ट्रपति व्हाइट हाउस में मीडियाकर्मियों से बात कर रहे थे, तब उनके ठीक बगल में NATO के सेक्रेटरी जनरल मार्क रुटे भी मौजूद थे। उसी दौरान ट्रंप ने बेबाकी से कहा था कि अगर यह समिट तुर्किये में राष्ट्रपति एर्दोगन की मेजबानी में आयोजित नहीं किया जा रहा होता, तो शायद वे इस कार्यक्रम में शामिल होने के बारे में सोचते भी नहीं।
https://www.indiatv.in/world/us/donald-trump-departed-for-turkiye-to-attend-nato-summit-also-meet-with-zelenskyy-2026-07-07-1229634