बेगूसराय के पंकज सिंह ने दूसरों की सफलता देख बदला अपना भाग्य, अब गांव में मुर्गी पालन से हर महीने कमा रहे ₹50,000

बिहार के बेगूसराय के किसान पंकज सिंह ने दूसरों की कामयाबी की कहानियों से प्रेरित होकर पोल्ट्री फार्मिंग का व्यवसाय शुरू किया और अब वे इससे बंपर कमाई कर रहे हैं।

बिहार के युवाओं में अब स्वरोजगार को लेकर एक नया उत्साह देखने को मिल रहा है। नौकरी के पीछे भागने के बजाय लोग अब अपने ही गांव-घर में रहकर नए-नए व्यवसाय शुरू कर रहे हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी बिहार के बेगूसराय जिले से सामने आई है, जहां के प्रगतिशील किसान पंकज सिंह ने दूसरों की सफलता से सीख लेकर खुद का भाग्य बदल दिया है। पंकज ने अपने गांव में मुर्गी पालन (पोल्ट्री फार्मिंग) का कारोबार शुरू किया है और आज वे हर महीने 40 से 50 हजार रुपये तक की शानदार कमाई कर रहे हैं। अब वे लखपति मुर्गा पालक बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं और साथ ही गांव के अन्य युवाओं को रोजगार भी दे रहे हैं।

लोकल 18 की खबरों से मिली स्वरोजगार की प्रेरणा

पंकज सिंह बताते हैं कि उन्हें खुद का व्यवसाय शुरू करने की प्रेरणा लोकल 18 पर प्रसारित होने वाली पशुपालन से जुड़ी खबरों और सफल किसानों के संघर्ष तथा सफलता की कहानियों को पढ़कर मिली। वे नियमित रूप से इन खबरों को देखते और पढ़ते थे। इसी दौरान उन्हें केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री योजनाओं और राज्य सरकार की मुख्यमंत्री स्तर पर पशुपालकों के लिए चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी मिली। इन प्रेरक कहानियों ने पंकज के भीतर एक नया आत्मविश्वास जगाया। इसके बाद उन्होंने किसी के अधीन काम करने के बजाय खुद का मालिक बनने का फैसला किया और पोल्ट्री फार्मिंग के क्षेत्र में कदम रख दिया।

नुकसान और बीमारी के डर को पीछे छोड़ आगे बढ़े पंकज

जब पंकज सिंह ने इस व्यवसाय को शुरू करने की योजना बनाई, तो शुरुआत में उनके आसपास के लोगों और शुभचिंतकों ने उन्हें हतोत्साहित करने की कोशिश की। लोगों ने उन्हें मुर्गियों में होने वाली तरह-तरह की बीमारियों और बाजार में होने वाले भारी नुकसान का डर दिखाया। लेकिन पंकज ने हार नहीं मानी। उन्होंने पूरी हिम्मत और समझदारी के साथ इस क्षेत्र में कदम रखा।

पंकज का मानना है कि मुर्गी पालन के व्यवसाय में सबसे महत्वपूर्ण चीज साफ-सफाई और सही प्रबंधन है। अगर पोल्ट्री शेड में स्वच्छता का पूरा ध्यान रखा जाए, तो मुर्गियों में बीमारियों का खतरा बेहद कम हो जाता है। उन्होंने अपने इस विश्वास को सच साबित करके दिखाया और आज उनका यह निर्णय बेहद सफल साबित हो रहा है।

1500 चूजों से की थी शुरुआत

पंकज सिंह ने अपने इस कारोबार की शुरुआत बेगूसराय जिले के बखरी अनुमंडल से 1500 चूजे लाकर की थी। उन्होंने इसके लिए लगभग 1500 वर्गफुट के क्षेत्रफल में अपना पहला पोल्ट्री फार्म तैयार किया था। पंकज के अनुसार, चूजों को बड़ा होकर बाजार में बिकने लायक तैयार होने में मात्र 35 से 40 दिन का समय लगता है। चूंकि बाजार में ब्रॉयलर चिकन की मांग हमेशा बनी रहती है, इसलिए उन्हें अपने उत्पाद को बेचने में कभी कोई परेशानी नहीं हुई। पहले ही बैच की बिक्री से उन्हें लगभग 45 हजार रुपये की शुद्ध आमदनी हुई, जिससे उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ गया।

अब लखपति बनने की बड़ी तैयारी

पहली ही बार में मिली इस शानदार सफलता के बाद अब पंकज सिंह ने अपने कारोबार को दोगुना करने का मन बना लिया है। इसके लिए वे अब 3000 वर्गफुट का एक नया और बड़ा पोल्ट्री हाउस तैयार करवा रहे हैं। उनका लक्ष्य मुर्गियों का उत्पादन बढ़ाकर हर महीने एक लाख रुपये से अधिक की शुद्ध आय अर्जित करना है।

पंकज ने बताया कि उन्होंने इस व्यवसाय के लिए सरकारी अनुदान (सब्सिडी) योजना के तहत आवेदन भी किया था। लेकिन दफ्तरों के लगातार चक्कर काटने और सरकारी प्रक्रियाओं में हो रही देरी को देखते हुए उन्होंने अनुदान का इंतजार करना छोड़ दिया और अपनी खुद की संचित पूंजी लगाकर काम शुरू कर दिया। इससे पहले उन्होंने मशरूम उत्पादन के लिए भी सरकारी मदद लेने का प्रयास किया था, लेकिन तब भी अनुदान न मिलने के कारण वह योजना आगे नहीं बढ़ पाई थी। इसलिए पंकज ने सरकारी मदद के भरोसे बैठने के बजाय खुद के दम पर आगे बढ़ने का फैसला किया।

स्थानीय युवाओं को दिया रोजगार, दी अहम सलाह

पंकज सिंह आज न केवल खुद आत्मनिर्भर बन चुके हैं, बल्कि वे दूसरों के लिए भी मददगार साबित हो रहे हैं। उन्होंने अपने पोल्ट्री फार्म पर गांव के ही तीन स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया है। वे इन युवाओं को प्रति माह लगभग 10 हजार रुपये का वेतन दे रहे हैं।

बिहार के अन्य युवाओं को सलाह देते हुए पंकज सिंह कहते हैं कि:

  • अगर युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने के बजाय अपने ही घर पर स्वरोजगार शुरू करें, तो तस्वीर बदल सकती है।
  • इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए शुरुआती तौर पर केवल 2 से 3 लाख रुपये की पूंजी की आवश्यकता होती है।
  • एक बार बुनियादी ढांचा और सही व्यवस्था तैयार हो जाने के बाद, यह व्यवसाय साल भर लगातार बेहतरीन कमाई देने वाला जरिया बन जाता है।
  • कड़ी मेहनत और सही प्रबंधन से युवा न केवल खुद अच्छी कमाई कर सकते हैं, बल्कि अपने ही गांव में दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं।

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