पुतिन की पाकिस्तान को लेकर बड़ी टिप्पणी, बोले- वो बड़ा मुल्क, चीन के रिमोट कंट्रोल से नहीं चलता

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि पाकिस्तान को पूरी तरह चीन के नियंत्रण में मानना सही नहीं होगा, क्योंकि वह एक बड़ा देश है जिसके कई मुल्कों से बहुआयामी रिश्ते हैं। भारत-चीन सीमा विवाद में उन्होंने रूस की ओर से किसी भी तरह के दखल से इनकार किया।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत, पाकिस्तान और चीन को लेकर एक अहम बयान दिया है। उन्होंने गुरुवार को जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की प्रशंसा की, वहीं पाकिस्तान को लेकर भी अपनी राय खुलकर रखी। पुतिन ने दो-टूक कहा कि पाकिस्तान को चीन के इशारों पर चलने वाला देश मान लेना हकीकत से दूर होगा।

भारत के संदर्भ में पुतिन ने एसयू-35 सौदे का जिक्र किया और कहा कि पीएम मोदी पर अमेरिका का दबाव बेअसर साबित हो रहा है। इसके बाद उन्होंने पाकिस्तान की ओर रुख करते हुए उसे एक बड़ा और कई देशों से बहुआयामी संबंध रखने वाला मुल्क बताया। उनके मुताबिक यह मान लेना कि पाकिस्तान पूरी तरह चीन के नियंत्रण में है, सच्चाई से परे है।

पाकिस्तान की तारीफ क्यों की पुतिन ने?

सेंट पीटर्सबर्ग में अंतरराष्ट्रीय मीडिया के साथ बातचीत के दौरान पुतिन से पूछा गया कि क्या पाकिस्तान पूरी तरह चीन के प्रभाव में आ चुका है। इसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘मुझे ऐसा नहीं लगता। पाकिस्तान एक बड़ा देश है और उसके अलग-अलग देशों के साथ कई तरह के संबंध हैं।’

पुतिन ने आगे जोड़ा कि पाकिस्तान के लिए चीन के साथ सहयोग निश्चित रूप से अहम है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि वह केवल चीन की मर्जी के अनुसार ही फैसले लेता है। इस तरह रूसी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान को एक स्वतंत्र विदेश नीति रखने वाले देश के रूप में पेश करने की कोशिश की।

भारत-चीन सीमा विवाद पर क्या कहा?

भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद को पुतिन ने ‘नाजुक और बहुआयामी’ मुद्दा करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस इस मामले में दखल नहीं देना चाहता, क्योंकि यह दोनों देशों के आपसी संबंधों का विषय है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सराहना करते हुए पुतिन ने कहा कि दोनों नेता सीमा सहित सभी लंबित मसलों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं।

भारत और चीन हमारे मित्र हैं। हम दोनों के साथ संबंध रखते हैं। ऐसे मामलों में दखल देना उचित नहीं होगा।

भारत-रूस रिश्तों पर भी दिया संदेश

रूसी राष्ट्रपति ने यह भी साफ किया कि भारत और रूस के बीच बढ़ती साझेदारी से चीन को कोई असुविधा नहीं है, और इसी तरह रूस-चीन संबंधों से भारत भी असहज महसूस नहीं करता। उन्होंने कहा कि रूस के भारत और चीन दोनों के साथ रिश्ते स्वाभाविक रूप से विकसित हुए हैं और एक रिश्ते का दूसरे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

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