मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक नामी तेल मिल ने सरकारी एजेंसी को करोड़ों रुपये का बड़ा चूना लगाया है। मुरैना की बहुचर्चित केएस ऑयल मिल में हुए लगभग 74.77 करोड़ रुपये के विशाल वित्तीय घोटाले को लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने कड़ा रुख अपनाया है। जांच एजेंसी ने इस मामले में मिल के तत्कालीन चेयरमैन और नौ अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि इन लोगों ने मिलीभगत करके सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया और बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की।
सरकारी एजेंसी के साथ हुआ बड़ा विश्वासघात
पूरी जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि यह बड़ा घोटाला साल 2010 से 2014 के बीच अंजाम दिया गया था। आरोपियों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत सरकारी एजेंसी 'राज्य व्यापार निगम' (STC) को अपना निशाना बनाया। इस धोखाधड़ी के कारण सरकारी एजेंसी को सीधे तौर पर करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। CBI की प्रारंभिक जांच में इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं कि केएस ऑयल मिल के प्रबंधकों ने जानबूझकर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया और सरकारी नियमों को ताक पर रखकर काम किया।
तेल के डिब्बों में भरा था 90 प्रतिशत पानी
इस पूरे मामले में सबसे हैरान कर देने वाला खुलासा मिलावट के तरीके को लेकर हुआ है। जांच में पाया गया कि तेल के भंडारण के दौरान ऑयल टैंकरों में कथित रूप से 90 प्रतिशत तक पानी मिलाया जाता था। केवल 10 प्रतिशत ही खाद्य तेल होता था, लेकिन कागजों पर इसे पूरी तरह से शुद्ध तेल दर्शाया जाता था। इस मिलावटी पानी वाले घोल को सरकारी दस्तावेजों में शुद्ध और असली तेल के रूप में दर्ज कराया गया। CBI का स्पष्ट कहना है कि मिलावट का यह खेल सीधे तौर पर सरकारी एजेंसी STC के साथ बड़ा विश्वासघात था, जिसके कारण सरकार को करोड़ों रुपये की चपत लगी।
निगरानी रखने वाली एजेंसी भी शक के घेरे में
इस सुनियोजित घोटाले में केवल केएस ऑयल मिल के अधिकारी और कर्मचारी ही शामिल नहीं थे, बल्कि इसमें सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वालों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। मुरैना और गुना में तेल के इस विशाल भंडारण की देखरेख और निगरानी का जिम्मा 'स्टार एग्री वेयरहाउसिंग एंड कोलेटरल मैनेजमेंट लिमिटेड' नामक प्राइवेट एजेंसी को सौंपा गया था।
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि:
- निगरानी एजेंसी के संबंधित स्टाफ ने मिलावटी तेल के इस भंडारण को पूरी तरह से सही और प्रमाणित घोषित किया था।
- बिना किसी वास्तविक भौतिक सत्यापन के गुणवत्ता और मात्रा के फर्जी प्रमाण पत्र जारी किए गए।
- अब CBI की जांच के दायरे में इस निगरानी एजेंसी के कई कर्मचारी भी आ चुके हैं, जिनसे पूछताछ की तैयारी की जा रही है।
दस्तावेजों की पड़ताल और आगे की कार्रवाई
CBI द्वारा औपचारिक रूप से मामला दर्ज किए जाने के बाद वर्षों पुराना यह मामला एक बार फिर गरमा गया है। इससे मुरैना सहित पूरे मध्य प्रदेश के व्यापारिक और प्रशासनिक जगत में हड़कंप मच गया है। जांच टीम अब इस घोटाले से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों, बैंक खातों के लेनदेन और भंडारण से जुड़े रिकॉर्ड्स को बारीकी से खंगाल रही है।
आने वाले समय में इस मामले में शामिल कुछ अन्य बड़े अधिकारियों और घोटालेबाजों की भूमिका का भी विस्तृत खुलासा होने की उम्मीद है। CBI सूत्रों के अनुसार, सबूतों के आधार पर जल्द ही इस मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारियां भी की जा सकती हैं। जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही इस घोटाले के तार कई और प्रभावशाली लोगों से जुड़ने की संभावना जताई जा रही है।
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