अपराध की पहचान छोड़ अब 'सफेद सोना' उगल रही नवगछिया की धरती, मखाने की खेती से दोगुनी हो रही किसानों की कमाई

कभी आपसी रंजिश और अपराध के लिए चर्चित बिहार का नवगछिया इलाका अब मखाने की खेती के जरिए अपनी नई पहचान बना रहा है, जिससे स्थानीय किसानों की आय में भारी वृद्धि हो रही है।

बिहार का नवगछिया इलाका, जो कभी आपसी कलाई, वर्चस्व की जंग और गंभीर अपराधों के लिए बदनाम हुआ करता था, आज अपनी पुरानी और स्याह छवि को पीछे छोड़ चुका है। कभी जिस धरती पर गोलियों की तड़तड़ाहट गूंजती थी, आज वहां सुपर फूड कहे जाने वाले मखाने की लहलहाती फसलें किसानों की किस्मत बदल रही हैं। पारंपरिक रूप से कोसी, सीमांचल और मिथिलांचल के क्षेत्रों तक सीमित रहने वाली मखाने की खेती ने अब नवगछिया में भी अपने पैर पसार लिए हैं। विदेशों में अपनी खास मांग और पहचान बना चुके इस सुपर फूड की खेती से स्थानीय किसान अब आत्मनिर्भरता की नई राह पर चल पड़े हैं।

अपराध के साए से समृद्धि की ओर बढ़ता कदम

नवगछिया के ग्रामीण इलाकों में अब बदलाव की एक नई बयार बह रही है। खेतों में अब हिंसा की जगह विकास और समृद्धि की फसलें उग रही हैं। स्थानीय स्तर पर किए गए सर्वेक्षण और बातचीत से पता चलता है कि वर्तमान में इस क्षेत्र में 50 एकड़ से अधिक भूमि पर मखाने की आधुनिक खेती की जा रही है। पहले जहां किसान केवल पारंपरिक फसलों तक ही सीमित थे या फिर सब्जी उगाकर अपना गुजारा करते थे, वहीं अब वे मखाने जैसे नकदी और भारी मुनाफे वाले विकल्प की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। इलाके के किसानों के अनुसार, इस नई शुरुआत ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारा है, बल्कि समाज में भी एक बेहद सकारात्मक संदेश दिया है।

जलजमाव की समस्या बनी वरदान: जगतपुर की अनूठी कहानी

नवगछिया के जगतपुर इलाके की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां साल के 7 महीने से अधिक समय तक खेतों में पानी जमा रहता है। इस अत्यधिक जलजमाव के कारण किसान पहले केवल सीमित मात्रा में सब्जियां या फिर पारंपरिक रूप से केले की खेती ही कर पाते थे, जिसमें अक्सर बाढ़ और पानी की वजह से भारी नुकसान उठाना पड़ता था। इस बड़ी समस्या का समाधान तब निकला जब सबौर कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विशेषज्ञों की एक टीम ने इस क्षेत्र का दौरा किया।

कृषि वैज्ञानिकों ने स्थानीय किसानों की जमीन की स्थिति को देखकर उन्हें सलाह दी कि वे जलजमाव वाले इस दलदली इलाके में मखाने की खेती की शुरुआत करें। विश्वविद्यालय के मार्गदर्शन में किसानों ने पहली बार मखाने की बुवाई की। शुरुआत में अनुभव की कमी और कुछ तकनीकी दिक्कतों के कारण किसानों को कई व्यावहारिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, समय के साथ और वैज्ञानिकों की देखरेख में ये सभी मुश्किलें दूर हो गईं। इस पहली ही कोशिश में किसानों को उम्मीद से कहीं बेहतर और भारी मुनाफा प्राप्त हुआ है, जिससे उनका हौसला काफी बढ़ गया है।

विविध कृषि पद्धतियों से दोगुनी हो रही आय

मखाने की इस बंपर सफलता से उत्साहित होकर नवगछिया के किसान अब आधुनिक बागवानी की ओर भी तेजी से रुख कर रहे हैं। अपनी आय को दोगुना करने के उद्देश्य से किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ-साथ कई तरह के फलों की बागवानी कर रहे हैं। इस क्षेत्र में अब मुख्य रूप से निम्नलिखित फलों की खेती बड़े पैमाने पर शुरू हो चुकी है:

  • सेब की उन्नत किस्में
  • रसीले नारंगी और स्वादिष्ट अनानास
  • बाजार में अत्यधिक मांग वाले एपल बेर
  • उच्च गुणवत्ता वाले मीठे अमरूद

किसानों का स्पष्ट रूप से मानना है कि पुरानी और पारंपरिक खेती को छोड़कर इस तरह की उन्नत और आधुनिक बागवानी अपनाने से उनके मुनाफे में कई गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस कृषि क्रांति के कारण न केवल युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल रहा है, बल्कि क्षेत्र के विकास की गति भी तेज हुई है। आने वाले समय में नवगछिया की इस नई पहचान के और अधिक मजबूत होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

https://hindi.news18.com/photogallery/agriculture/makhana-cultivation-flourishes-in-bhagalpur-the-land-is-now-yielding-gold-farmers-income-set-to-double-local18-10634061.html