फर्जीवाड़े का खुलासा
मध्य प्रदेश के भिंड जिले में एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य घोटाले की चर्चा के बाद अब किसानों के नाम पर फर्जी ऋण लेने का एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह धोखाधड़ी वर्षों तक जारी रही और लंबी जांच के बाद पुलिस ने कार्रवाई की है। जिला सहकारी बैंक की मेहगांव शाखा में पदस्थ रहे तत्कालीन प्रबंधक, कैशियर और दो समिति प्रबंधकों समेत कुल चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं के तहत मेहगांव थाना में एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले में यह भी सामने आया है कि आरोपियों में शामिल एक समिति प्रबंधक का निधन हो चुका है।
क्या है पूरा मामला
यह घोटाला मुख्य रूप से वर्ष 2012 से लेकर जनवरी 2019 के बीच अंजाम दिया गया। इस अवधि में मेहगांव क्षेत्र की रायपुरा सहकारी समिति के अंतर्गत आने वाले 20 किसानों को निशाना बनाया गया। इन किसानों के नाम पर खाद और बीज खरीदने के लिए 6 लाख 63 हजार रुपये का कर्ज स्वीकृत कराया गया था। हैरानी की बात यह है कि ऋण लेने की प्रक्रिया में असली किसानों के दस्तावेजों का इस्तेमाल करने के बजाय फर्जी कागजात तैयार किए गए और उन पर किसानों के फर्जी हस्ताक्षर कर लिए गए। जिन किसानों के नाम पर यह लोन लिया गया, उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी कि उनके नाम पर बैंक से लाखों का कर्ज उठाया गया है।
जांच में हुआ खुलासा
जब यह मामला उजागर हुआ तो प्रशासन में हड़कंप मच गया। मामले की विस्तृत जांच के दौरान खुलासा हुआ कि स्वीकृत किए गए लोन की पूरी राशि किसानों के खातों तक कभी पहुंची ही नहीं। इसके बजाय, बैंक के संबंधित कर्मचारियों ने साजिश रचकर उस राशि को अपने खातों में स्थानांतरित कर लिया और सरकारी धन को हड़प लिया। जिला सहकारी बैंक द्वारा कराई गई आंतरिक जांच में दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और हेरफेर की पुष्टि हुई। इस जांच प्रतिवेदन में तत्कालीन शाखा प्रबंधक के.एम. मौर्य, कैशियर हरिओम, और तत्कालीन समिति प्रबंधक राय सिंह जादौन व अरविंद सिंह जादौन की मुख्य संलिप्तता सामने आई है।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
इस फर्जीवाड़े को लेकर रायपुरा समिति के वर्तमान प्रबंधक लाल सिंह गोयल ने मेहगांव थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। मेहगांव के एसडीओपी संजय कोच्छा ने जानकारी दी है कि पुलिस अब इस मामले की गहन विवेचना कर रही है। बैंक के रिकॉर्ड, लेन-देन के ब्योरे और दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। जांच में यह भी संभावना जताई गई है कि इस पूरे गोरखधंधे में कुछ अन्य अज्ञात लोगों की भूमिका भी हो सकती है। जैसे-जैसे मामले की कड़ियां जुड़ेंगी, वैसे-वैसे आरोपियों की संख्या और बढ़ सकती है। भिंड जिले में एक के बाद एक सामने आ रहे इन घोटालों ने सहकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली और उनकी साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इस मामले की तह तक जाकर जांच की जाए, तो कई और बड़ी धोखाधड़ी के मामले सामने आ सकते हैं।
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