BRO घोटाला: फर्जी मजदूरों के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी, लेफ्टिनेंट कर्नल और मेजर समेत 10 सैन्य अफसरों पर CBI का बड़ा शिकंजा, 11 राज्यों में छापेमारी

सीमा सड़क संगठन (BRO) में लद्दाख परियोजनाओं के तहत फर्जी मजदूरों के नाम पर सरकारी धन हड़पने के मामले में CBI ने बड़ी कार्रवाई की है। लेफ्टिनेंट कर्नल और मेजर समेत 10 अधिकारियों पर चार अलग-अलग मुकदमे दर्ज कर देश के 11 राज्यों में तलाशी ली गई है।

देश की सीमाओं को सुरक्षित करने और वहां बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने वाले सीमा सड़क संगठन (BRO) में एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। CBI ने लद्दाख क्षेत्र में फर्जी दिहाड़ी मजदूरों के नाम पर सरकारी धन के कथित गबन के आरोप में बड़ी कार्रवाई की है। इस घोटाले में सीमा सड़क संगठन के कई वरिष्ठ सैन्य और तकनीकी अधिकारी सीधे तौर पर जांच के घेरे में आ गए हैं। CBI ने इस सिलसिले में भारतीय सेना के एक लेफ्टिनेंट कर्नल, एक मेजर और इंजीनियर रैंक के अधिकारियों सहित कुल 10 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इसके साथ ही कुछ निजी व्यक्तियों को भी इस साजिश में नामजद किया गया है।

इस बड़े रक्षा घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद CBI ने देशव्यापी स्तर पर अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। जांच एजेंसी की टीमों ने देश के 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले कुल 26 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस औचक कार्रवाई से सीमा सड़क संगठन और रक्षा गलियारों में हड़कंप मच गया है।

लद्दाख की परियोजनाओं में फर्जीवाड़े का खेल

CBI द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में चल रही सीमा सड़क संगठन की अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजनाओं से जुड़ा हुआ है। यहां मुख्य रूप से विजयक और योजन नामक दो बड़ी परियोजनाओं के तहत सीमावर्ती इलाकों में सड़कों और बुनियादी ढांचे का निर्माण कार्य किया जा रहा था। इन परियोजनाओं में स्थानीय और बाहरी दिहाड़ी मजदूरों की तैनाती दिखाई गई थी। आरोप है कि अधिकारियों ने आपसी मिलीभगत से कागजों पर बड़ी संख्या में फर्जी दिहाड़ी मजदूरों को काम करते हुए दिखाया और उनके नाम पर नियमित रूप से सरकारी खजाने से वेतन का भुगतान जारी करवाया।

इस भ्रष्टाचार का खुलासा तब हुआ जब रक्षा मंत्रालय को इस वित्तीय अनियमितता के संबंध में पुख्ता शिकायत मिली। इसके बाद सीमा सड़क संगठन के तकनीकी अधिकारियों के एक विशेष बोर्ड द्वारा आंतरिक स्तर पर गहन तकनीकी जांच कराई गई। इस विभागीय जांच की रिपोर्ट में साफ हुआ कि कागजों पर जिन मजदूरों के नाम दर्ज थे और जिन्हें भुगतान किया जा रहा था, वे वास्तव में वहां काम ही नहीं कर रहे थे। आंतरिक जांच में गड़बड़ियों की पुष्टि होने के बाद रक्षा मंत्रालय ने CBI में एक औपचारिक आपराधिक शिकायत दर्ज कराई। इसी शिकायत के आधार पर CBI ने इस मामले की कमान अपने हाथों में ली और कुल चार अलग-अलग FIR दर्ज कीं।

देश के 11 राज्यों में CBI की ताबड़तोड़ छापेमारी

भ्रष्टाचार के इस बड़े जाल को ध्वस्त करने के लिए CBI ने एक विशाल तलाशी अभियान की योजना बनाई। इस अभियान के तहत देश के कोने-कोने में फैले आरोपियों के ठिकानों पर दबिश दी गई। CBI की टीमों ने जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में छापेमारी की, उनकी सूची निम्नलिखित है:

  • जम्मू-कश्मीर और लद्दाख
  • देश की राजधानी दिल्ली
  • उत्तर भारतीय राज्य हरियाणा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश
  • पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्य बिहार, असम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड
  • पश्चिमी राज्य महाराष्ट्र

इन सभी राज्यों के 26 ठिकानों पर की गई सघन तलाशी के दौरान CBI को कई बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील दस्तावेज हाथ लगे हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में डिजिटल उपकरण, मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर हार्ड डिस्क और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की गई है। एजेंसी का मानना है कि इन डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच से इस घोटाले के पीछे छिपे कई अन्य सफेदपोश चेहरों से भी पर्दा उठ सकता है।

इन गंभीर कानूनी धाराओं के तहत दर्ज किया गया मामला

CBI ने आरोपियों के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाया है। दर्ज की गई चारों FIR में भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इनमें निम्नलिखित कानूनी धाराएं शामिल हैं:

  • सरकारी धन का जानबूझकर किया गया गबन और दुरुपयोग
  • सरकारी खजाने और विभाग के साथ धोखाधड़ी और जालसाजी
  • फर्जी दस्तावेज तैयार कर आपराधिक साजिश रचना
  • आपराधिक विश्वासघात और विश्वास का उल्लंघन करना

इसके अतिरिक्त, आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की सख्त धाराओं को भी लागू किया गया है। इनमें आपराधिक कदाचार और पद का दुरुपयोग कर अवैध रूप से रिश्वत लेने और देने के गंभीर आरोप शामिल हैं। CBI अब इन धाराओं के तहत गिरफ्तारियों और पूछताछ की रूपरेखा तैयार कर रही है।

जांच के दायरे में सैन्य अधिकारियों की भूमिका

CBI अब उन सभी बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की विस्तृत समीक्षा करने में जुटी है जो तलाशी के दौरान जब्त किए गए हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी का मुख्य ध्यान अब इस बात पर केंद्रित है कि सरकारी धन की इस बड़ी हेराफेरी को इतने लंबे समय तक किस तरह अंजाम दिया जाता रहा। जांचकर्ता यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इस घोटाले की जड़ें सिर्फ इन 10 नामजद अधिकारियों तक ही सीमित हैं या फिर BRO और रक्षा मंत्रालय के कुछ अन्य उच्च अधिकारी भी इस भ्रष्टाचार की कड़ियों से जुड़े हुए थे।

जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल, मेजर और इंजीनियरों को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। उनकी संपत्तियों और बैंक खातों की भी जांच की जा सकती है ताकि यह पता लगाया जा सके कि फर्जी मजदूरों के नाम पर निकाला गया पैसा किस-किस खाते में ट्रांसफर किया गया। फिलहाल, मामले की गहन जांच अत्यंत गोपनीय और सुनियोजित तरीके से जारी है।

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