बिहार की राजधानी पटना की सबसे हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने जा रहा उपचुनाव बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। जन सुराज के मुखिया PK ने खुद इस सीट से चुनावी मैदान में उतरने का बड़ा ऐलान कर दिया है, जिसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। प्रशांत किशोर के इस सीधे कदम ने भारतीय जनता पार्टी के इस अभेद्य किले में हलचल मचा दी है और दिल्ली से लेकर पटना तक उम्मीदवार के नाम पर गंभीर मंथन शुरू हो गया है। बांकीपुर को पारंपरिक रूप से बीजेपी का सबसे सुरक्षित सनातनी और सवर्ण दुर्ग माना जाता है, जिसे पहले नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा और उनके बाद उनके बेटे नितिन नवीन ने लगातार संभाला है। नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई इस सीट को बचाए रखना अब बीजेपी के लिए साख का सवाल बन गया है।
प्रशांत किशोर की सीधी एंट्री के बाद अब सोशल मीडिया से लेकर पटना की सड़कों तक बीजेपी के संभावित उम्मीदवारों को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि प्रशांत किशोर के जाति से परे विकास की राजनीति वाले नैरेटिव को कैसे ध्वस्त किया जाए। इस चुनौती से निपटने के लिए बीजेपी कोर कमेटी बंद कमरे में कई विकल्पों पर विचार कर रही है, जिसमें पारिवारिक विरासत से लेकर नए और चौंकाने वाले चेहरे शामिल हैं।
बीजेपी के भीतर संभावित उम्मीदवारों को लेकर मंथन
बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी की ओर से उम्मीदवार के चयन को लेकर कई नाम बहुत तेजी से सामने आ रहे हैं। पार्टी के भीतर एक धड़ा मजबूती से यह मानता है कि नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के परिवार का बांकीपुर की जनता के साथ दशकों पुराना और बेहद भावुक रिश्ता रहा है। ऐसे में सहानुभूति की लहर का लाभ उठाने और इस सुरक्षित किले को बचाए रखने के लिए नितिन नवीन की पत्नी या फिर उनकी माताजी को चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है।
दूसरी तरफ, बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री नीतू चंद्रा का नाम भी काफी चर्चा में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर की हाई-प्रोफाइल छवि और युवाओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ का मुकाबला करने के लिए बीजेपी किसी यूथ और महिला कायस्थ आइकॉन को लाकर सबको चौंका सकती है। नीतू चंद्रा इसी समीकरण में पूरी तरह फिट बैठती हैं। इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर पटना के कुछ बेहद रसूखदार डॉक्टरों, वकीलों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े युवा चेहरों के नामों पर भी गंभीरता से चर्चा की जा रही है।
बांकीपुर सीट का सामाजिक और जातीय गणित
बांकीपुर मूल रूप से एक पूरी तरह शहरी और शिक्षित मतदाताओं वाली विधानसभा सीट है। यहां की कुल आबादी में सवर्ण और वैश्य समाज की हिस्सेदारी सबसे निर्णायक मानी जाती है, जो हमेशा से ही बीजेपी के सबसे मजबूत समर्थक रहे हैं।
- कायस्थ मतदाता: बांकीपुर में कायस्थ समुदाय की आबादी लगभग 20% से 25% है, जो इस सीट पर किंगमेकर की भूमिका निभाते हैं। यह वर्ग दशकों से नवीन किशोर सिन्हा और नितिन नवीन के साथ मजबूती से खड़ा रहा है।
- वैश्य और बनिया वर्ग: यह व्यापारिक वर्ग हमेशा से बीजेपी की आर्थिक और वैचारिक रीढ़ की तरह काम करता आया है।
- ब्राह्मण और भूमिहार: इस सीट पर लगभग 15% ब्राह्मण और भूमिहार मतदाता हैं, जो पारंपरिक रूप से बीजेपी के मुख्य सवर्ण वोट बैंक का हिस्सा रहे हैं।
- अल्पसंख्यक और दलित मतदाता: बांकीपुर में लगभग 20% आबादी अल्पसंख्यक और दलित समुदायों की है, जो मुख्य रूप से विपक्षी दल आरजेडी और कांग्रेस के पाले में जाती रही है।
क्या ब्राह्मण कार्ड खेलकर बड़ा जोखिम उठाएगी बीजेपी?
बांकीपुर की राजनीतिक हवा में एक और बड़ा सवाल तैर रहा है कि क्या बीजेपी प्रशांत किशोर के खिलाफ ब्राह्मण कार्ड खेलेगी? चूंकि प्रशांत किशोर खुद ब्राह्मण समाज से आते हैं, इसलिए वह बांकीपुर के सवर्ण वोटों में सेंध लगाने की पूरी कोशिश करेंगे। इस स्थिति में बीजेपी के कुछ रणनीतिकारों का सुझाव है कि पार्टी को भी किसी बड़े ब्राह्मण चेहरे को उतारकर इसे काउंटर करना चाहिए।
हालांकि, यह कदम बीजेपी के लिए बहुत बड़ा जोखिम साबित हो सकता है। अगर बीजेपी ने ब्राह्मण कार्ड खेला, तो पारंपरिक रूप से इस सीट के स्वाभाविक हकदार माने जाने वाले कायस्थ समाज में भारी नाराजगी पैदा हो सकती है। कायस्थ और बनिया मतदाताओं की यह नाराजगी बीजेपी के इस मजबूत किले को ढहा सकती है, इसलिए पार्टी फूंक-फूंककर कदम रख रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का नजरिया और आरजेडी का नया दांव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर ने जानबूझकर बांकीपुर सीट को चुना है। वे बीजेपी के इस सबसे मजबूत शहरी वोट बैंक को चुनौती देकर अपनी राजनीतिक ताकत को आजमाना चाहते हैं, ताकि बिहार की भविष्य की राजनीति की रूपरेखा अभी से तय की जा सके। प्रशांत किशोर लगातार बिहार को बदलने की बात कर रहे हैं, और इस बार वे सवर्ण वोटरों का मिजाज करीब से परखना चाहते हैं।
दूसरी तरफ, इस मुकाबले को और अधिक रोचक बनाने के लिए आरजेडी ने भी सोमवार को रेखा गुप्ता को चुनावी मैदान में उतार दिया है। आरजेडी द्वारा बनिया समाज की उम्मीदवार रेखा गुप्ता को उतारने के बाद अब मुकाबला और भी कड़ा हो गया है। ब्राह्मण उम्मीदवार प्रशांत किशोर और बनिया उम्मीदवार रेखा गुप्ता के सामने आने के बाद अब सभी को बीजेपी की घोषणा का इंतजार है। बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) जल्द ही अपने उम्मीदवार के नाम पर अंतिम मुहर लगाने वाली है। अब देखना यह होगा कि बीजेपी अपने पुराने भरोसेमंद पारिवारिक रास्ते पर जाती है या फिर किसी चौंकाने वाले यूथ आइकॉन को उतारकर बांकीपुर का सस्पेंस खत्म करती है।
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