100 साल पुराना 'बगुला कुआं': भीषण अकाल में भी नहीं सूखा, आज भी शादी की रस्मों का गवाह

जहानाबाद जिला मुख्यालय में मौजूद 100 साल पुराने 'बगुला कुआं' ने भीषण गर्मी और अकाल में भी कभी पानी नहीं खोया। आज भी यहां शादी-विवाह की रस्में निभाई जाती हैं और सुबह पानी भरने वालों की भीड़ जुटती है।

तपती गर्मी और बारिश के अभाव में कई इलाकों में पानी का संकट गहराने लगा है। यूं तो आज लगभग हर जगह नल-जल योजना पहुंच चुकी है, फिर भी कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां पानी की किल्लत बनी रहती है। पहाड़ी इलाकों में तो हालत यह है कि पुरुष हों या महिलाएं, सिर पर पानी ढोकर लाना आज भी मजबूरी है।

मोटर, समरसेबल और बोरिंग सेट के जरिए अब धरती से पानी सीधे घरों तक पहुंच रहा है। लेकिन सोचिए, जब ये सुविधाएं नहीं थीं तब लोग प्यास कैसे बुझाते थे? उस दौर में लोग कुओं और जल स्रोतों पर ही निर्भर रहते थे। पहले इंद्रासन का चलन था और बाद में हैंड पंप आया। आज भले ही नल खोलते ही पानी मिल जाता है, मगर जब किल्लत होती है तो लोगों को फिर से इन्हीं पुराने स्रोतों का सहारा लेना पड़ता है।

जहानाबाद का ऐतिहासिक बगुला कुआं

बिहार के जहानाबाद जिला मुख्यालय में एक ऐसा ही कुआं मौजूद है, जिसे 'बगुला कुआं' के नाम से जाना जाता है। इसका इतिहास करीब 100 साल पुराना है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह इकलौता ऐसा कुआं है, जिसका अस्तित्व आज भी बचा हुआ है, जबकि इसे बने हुए सौ साल से अधिक का समय बीत चुका है।

खास बात यह है कि कई बार भीषण गर्मी पड़ी और आसपास के सभी जल स्रोत सूख गए, मगर इस कुएं का पानी कभी नहीं सूखा। बताया जाता है कि जब भयंकर अकाल पड़ा था, तब इस कुएं के एक हिस्से में थोड़ा-सा पानी बचा रह गया था। उसी समय इसका नाम 'बगुला कुआं' पड़ गया।

शादी की रस्मों के लिए आज भी खास

इस कुएं की धार्मिक और सामाजिक अहमियत आज भी कायम है। शादी-विवाह के मौके पर यहां विशेष रस्में निभाई जाती हैं और इस दौरान भारी भीड़ जुटती है। इसके अलावा यह कुआं आज भी कई लोगों के लिए जीवनदायिनी बना हुआ है।

स्थानीय लोग क्या कहते हैं

नया टोला के निवासी वरुण कुमार बताते हैं कि इस कुएं का इतिहास बेहद पुराना है। उनके अनुसार, "सुनते आए हैं कि इसे बने हुए 100 साल हो चुके हैं। यह कुआं भीषण गर्मी में भी नहीं सूखता। इस बार कई जगह हैंड पंप सूख गए हैं, लेकिन बगुला कुएं का पानी ऊपर तक भरा है। सुबह पानी ले जाने वालों की भीड़ लगी रहती है।"

उन्होंने यह भी बताया कि एक समय ऐसा था जब इस कुएं का पानी लेने के लिए लोग 1 किमी के दायरे से आते थे। आज भले ही हर घर में समरसेबल और बोरिंग सेट लग गया हो, फिर भी इस कुएं के पानी की अहमियत बरकरार है। हालांकि उनका कहना है कि दुर्भाग्यवश संरक्षण के अभाव में अब इस कुएं का पानी खराब होता जा रहा है।

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