मध्यप्रदेश में नए वक्फ बोर्ड का गठन, इतिहास में पहली बार दो हिंदू सदस्यों को मिली जगह

मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार ने नए नियमों के तहत वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया है, जिसमें देश में पहली बार दो गैर-मुस्लिम हिंदू सदस्यों को शामिल किया गया है।

मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार ने एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशों पर राज्य में नए नियमों के तहत वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया गया है। इस पुनर्गठन की सबसे खास और चर्चा में रहने वाली बात यह है कि देश के इतिहास में पहली बार किसी राज्य के वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किया गया है। सरकार ने इस नए बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों को जगह देकर एक नया इतिहास रच दिया है। शासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना और राजपत्र भी जारी कर दिया गया है।

इस नए फैसले के तहत इंदौर के रहने वाले मनोज मालपानी और गुना जिले के राघौगढ़ के निवासी अनिमेष भार्गव को मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड का सदस्य नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश वक्फ अधिनियम 1995 (संशोधित 2025) की धारा 13 और धारा 14 के प्रावधानों को लागू करते हुए नए बोर्ड का गठन करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इस नए बोर्ड की कमान एक बार फिर सनवर पटेल के हाथों में सौंपी गई है, जिन्हें बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

सनवर पटेल दोबारा बने अध्यक्ष, जानें कौन-कौन हैं बोर्ड में शामिल

नवगठित मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में सनवर पटेल की वापसी हुई है। वह पिछले बोर्ड में भी अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस पुनर्गठित बोर्ड में कुल 10 सदस्यों को स्थान दिया गया है, जिनमें पहली बार दो हिंदू चेहरों को शामिल कर एक बहुत बड़ा बदलाव किया गया है। बोर्ड के सभी सदस्यों की सूची इस प्रकार है:

  • सनवर पटेल (अध्यक्ष)
  • आतिफ अकील (विधायक, भोपाल उत्तर)
  • फैजान खान (उज्जैन)
  • नजमा हेपतुल्ला (नई दिल्ली)
  • शाइस्ता सुल्तान (पार्षद, बैरसिया)
  • बहन फातेमा चौधरी (इंदौर)
  • शबाना खान (पार्षद, रतलाम)
  • मनोज मालपानी (इंदौर)
  • अनिमेष भार्गव (राघौगढ़, गुना)
  • आयुक्त (पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग)

साल 2028 तक बरकरार रहेगा नजमा हेपतुल्ला का कार्यकाल

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जारी किए गए राजपत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नजमा हेपतुल्ला इस बोर्ड में सदस्य के रूप में बनी रहेंगी। उनका चयन साल 2023 में तत्कालीन वक्फ अधिनियम के तहत हुआ था और उनका कार्यकाल 18 अप्रैल 2028 तक निर्धारित है। यही वजह है कि उनके बचे हुए कार्यकाल को ध्यान में रखते हुए उन्हें इस नवगठित बोर्ड में भी बतौर सदस्य बनाए रखा गया है।

वक्फ कानून में हुए संशोधनों के बाद, नए नियमों (संशोधित वक्फ कानून 2025) के तहत अपने वक्फ बोर्ड का गठन करने में मध्यप्रदेश पूरे देश में अग्रणी राज्य बन चुका है। इतिहास में पहली बार वक्फ बोर्ड के भीतर मनोज मालपानी और अनिमेष भार्गव जैसे गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को प्रशासनिक और सामाजिक दृष्टिकोण से एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

https://www.indiatv.in/madhya-pradesh/new-waqf-board-constituted-in-madhya-pradesh-two-hindu-members-appointed-for-the-first-time-2026-07-05-1229385