आतंकवाद पर भारत का कड़ा प्रहार, सिंधु जल संधि निलंबित होने से पाकिस्तान में मचा हाहाकार

अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया है, जिसके बाद पानी की बूंद-बूंद के लिए तरसता पाकिस्तान अब दुनिया के सामने भीख मांग रहा है।

भारत ने सीमा पार से होने वाले आतंकवाद के खिलाफ अब तक का सबसे कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुए कायराना आतंकवादी हमले के बाद, जिसमें कई बेगुनाह पर्यटकों की जान चली गई थी, भारत सरकार ने पाकिस्तान के साथ दशकों पुरानी सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया है। भारत के इस अप्रत्याशित फैसले ने पाकिस्तानी हुकूमत की नींद उड़ा दी है। हमेशा की तरह आतंकवाद को शह देने वाला पाकिस्तान अब इस कदम को 'पानी का हथियार' बताकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आंसू बहा रहा है। भारत ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि आतंकवाद और बातचीत दोनों एक साथ नहीं चल सकते, और जब तक सीमा पार से होने वाली आतंकी गतिविधियां पूरी तरह से बंद नहीं होतीं, तब तक यह संधि बहाल नहीं होगी।

छह दशकों के इतिहास में पहली बार इतना बड़ा फैसला

भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ष 1960 में सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस ऐतिहासिक समझौते को कराने में वर्ल्ड बैंक ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। पिछले छह दशकों में दोनों देशों के बीच कई युद्ध हुए, भीषण सैन्य और राजनीतिक तनाव की परिस्थितियां बनीं, लेकिन यह संधि हमेशा बची रही। इसे दुनिया के सबसे मजबूत और टिकाऊ समझौतों में से एक माना जाता था। हालांकि, पाकिस्तान की हरकतों ने अब पानी को सिर से ऊपर पहुंचा दिया है। अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के पीछे सीधे तौर पर पाकिस्तानी जमीन से संचालित होने वाले आतंकी संगठनों का हाथ था। इसके जवाब में नई दिल्ली ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए संधि को होल्ड पर रखने का निर्णय लिया, जिसने इस्लामाबाद के होश उड़ा दिए हैं।

पाकिस्तानी नेताओं में मची खलबली, दी जा रही खोखली धमकियां

भारत के इस फैसले के बाद पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य गलियारों में हड़कंप मच गया है। पाकिस्तानी हुकूमत दुनिया के सामने खुद को पीड़ित दिखाने की कोशिश कर रही है। उनका दावा है कि यह संधि भारत के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी है और इसे एकतरफा निलंबित नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान के शीर्ष नेता अब भारत को धमकियां देने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने की नाकाम कोशिशों में जुट गए हैं।

इस कड़ी में पाकिस्तान के कई प्रमुख नेताओं के बयान सामने आए हैं:

  • इशाक डार (विदेश मंत्री): पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत के कदम पर चिंता जताते हुए कहा कि पाकिस्तान को उसके पानी के अधिकार से वंचित करने से पूरे क्षेत्र में असुरक्षा और अस्थिरता का माहौल पैदा हो सकता है।
  • मुसादिक मलिक (जलवायु परिवर्तन मंत्री): उन्होंने भी भारत को चेतावनी देते हुए गीदड़भभकी दी है और नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को रोकने या बदलने के गंभीर परिणाम भुगतने की बात कही है।
  • बिलावल भुट्टो जरदारी: पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी सुर में सुर मिलाते हुए भारत के इस कदम का विरोध किया है और इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया है।

पाकिस्तान का दोहरा चरित्र और विक्टिम कार्ड खेलने की आदत

पाकिस्तानी नेताओं की यह छटपटाहट उनके दोहरे चरित्र को उजागर करती है। एक तरफ इस्लामाबाद अपनी धरती पर पल रहे आतंकियों को भारत के खिलाफ इस्तेमाल करता है, वहीं दूसरी तरफ नुकसान होने पर खुद को पीड़ित बताने लगता है। पाकिस्तान सिंधु नदी प्रणाली को अपनी अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा मानता है। सच तो यह है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही बदहाली के कगार पर है और वह अपनी इस नाकामी का ठीकरा भारत के सिर फोड़ना चाहता है। कश्मीर मुद्दे को वैश्विक स्तर पर जीवित रखने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सहानुभूति बटोरने के लिए पाकिस्तान इस जल विवाद को एक नए हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की साजिश रच रहा है। लेकिन भारत अब उसके किसी भी भ्रामक प्रचार के झांसे में आने वाला नहीं है।

आतंकवाद पर भारत का दोटूक अल्टीमेटम

भारत अपने इस कड़े फैसले पर पूरी तरह अडिग है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने 3 जुलाई को एक प्रेस बयान जारी कर साफ कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान भारत की सीमाओं के भीतर क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म को पूरी तरह से समाप्त नहीं कर देता, तब तक सिंधु जल संधि निलंबित ही रहेगी। पाकिस्तान की नागरिक सरकार के साथ-साथ वहां के सेना प्रमुख आसिम मुनीर भी लगातार आक्रामक बयानबाजी कर रहे हैं और भारत विरोधी दुष्प्रचार को बढ़ावा दे रहे हैं। नई दिल्ली ने पाकिस्तान के इन सभी दावों और धमकियों को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत अच्छी तरह जानता है कि पाकिस्तान हर द्विपक्षीय मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय रंग देने का आदी है, लेकिन इस बार उसकी कोई भी चाल काम नहीं आने वाली है।

पाकिस्तान के अस्तित्व के लिए क्यों जरूरी है सिंधु का पानी?

पाकिस्तान की भौगोलिक और आर्थिक स्थिति ऐसी है कि वह अपनी कृषि, सिंचाई और पीने के पानी के लिए पूरी तरह से सिंधु नदी प्रणाली पर ही निर्भर है। इसके अलावा, पाकिस्तान में बिजली उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा जलविद्युत परियोजनाओं से आता है, जो इन्हीं नदियों के पानी से चलती हैं। ऐसे में पानी रुकने या संधि निलंबित होने से पाकिस्तान में सूखे और भुखमरी जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।

भारत ने संधि को निलंबित करने का यह कठोर निर्णय देश की सुरक्षा और संप्रभुता को सर्वोपरि रखते हुए लिया है। पाकिस्तान लगातार भारतीय नागरिकों और सुरक्षा बलों को निशाना बना रहा है और भारत की जनसांख्यिकीय व क्षेत्रीय अखंडता को नुकसान पहुंचाने की कोशिशें कर रहा है। ऐसी स्थिति में नई दिल्ली से किसी भी तरह के सहयोग या उदारता की उम्मीद करना पूरी तरह से बेमानी है। इस्लामाबाद को अब यह कड़ा संदेश समझ लेना चाहिए कि अगर वह अपनी सुरक्षा और अस्तित्व चाहता है, तो उसे भारत की सुरक्षा के खिलाफ साजिशें रचना बंद करना होगा और अपनी हद में रहना सीखना होगा।

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