झारखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल देवघर का नाम सुनते ही सबसे पहले बाबा बैद्यनाथ धाम की पावन छवि मन में उभरती है। सावन के पवित्र महीने में यहां देश-विदेशी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि मानसून के दस्तक देते ही देवघर और उसके आस-पास का पूरा इलाका एक अद्भुत प्राकृतिक स्वर्ग में बदल जाता है। जैसे ही आसमान से बारिश की बूंदें गिरती हैं, यहां की पहाड़ियां हरी चादर ओढ़ लेती हैं और बादलों का झुंड इन्हें इस तरह घेर लेता है कि यह नजारा किसी बड़े हिल स्टेशन जैसा लगने लगता है। इसी खूबसूरती के कारण लोग इसे झारखंड का मिनी स्विट्जरलैंड भी कहने लगते हैं।
अगर आप भी इस मानसून के मौसम में कहीं बाहर घूमने का मन बना रहे हैं और प्रकृति की गोद में कुछ पल बिताना चाहते हैं, तो देवघर के आस-पास मौजूद इन 6 पहाड़ों की सैर करना आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। यहां की हरियाली और बादलों के खेल को देखकर आप अपना कैमरा जेब में नहीं रख पाएंगे। आइए विस्तार से जानते हैं देवघर के इन 6 बेहद खूबसूरत पहाड़ों के बारे में।
1. त्रिकुट पहाड़: बादलों से घिरी हसीन वादियां
सावन और मानसून का जिक्र होते ही देवघर आने वाले सैलानियों के दिमाग में सबसे पहला नाम त्रिकुट पहाड़ का आता है। देवघर जिला मुख्यालय से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह पहाड़ मानसून के दौरान बेहद आकर्षक नजर आता है। वर्षा ऋतु में यह पूरा पहाड़ हरी-भरी चादर से ढक जाता है। इस दौरान जब आसमान में तैरते बादल इन ऊंची पहाड़ियों से टकराते हैं, तो पूरा दृश्य किसी सुरम्य हिल स्टेशन जैसा बन जाता है। सैलानियों के लिए यहां रोपवे की सुविधा उपलब्ध है, जिससे ऊपर जाते समय का रोमांच दोगुना हो जाता है। इसके अलावा ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए भी यह एक बेहतरीन जगह है। पहाड़ की चोटी से दिखने वाला विहंगम नजारा किसी का भी मन मोहने के लिए काफी है।
2. तपोवन पहाड़: आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम
देवघर मुख्य शहर से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित तपोवन पहाड़ अपनी धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी काफी प्रसिद्ध है। मानसून का मौसम शुरू होते ही इस पहाड़ी की चट्टानों के बीच जमी हरियाली और यहां बहने वाली ठंडी हवाएं पर्यटकों को एक अलग ही शांति का अहसास कराती हैं। इस पहाड़ पर कई ऐतिहासिक गुफाएं मौजूद हैं, साथ ही भगवान शिव और हनुमान जी के मंदिर भी स्थापित हैं। पहाड़ की चोटी पर पहुंचकर जब आप चारों तरफ फैली हरियाली को देखते हैं, तो वहां से हटने का मन नहीं करता। तपोवन पहाड़ की एक और खासियत यहां रहने वाले छोटे-छोटे बंदर हैं, जो सैलानियों को बेहद आकर्षित करते हैं।
3. बूढ़ई पहाड़: शांत वातावरण और पौराणिक मान्यताएं
यदि आप भीड़भाड़ वाले शहरी कोलाहल से दूर एकांत और शांति की तलाश में हैं, तो देवघर से करीब 28 किलोमीटर दूर स्थित बूढ़ई पहाड़ आपके लिए सबसे बेहतरीन डेस्टिनेशन साबित हो सकता है। मानसून के समय यह पहाड़ सचमुच किसी जन्नत जैसा दिखाई देता है। चारों ओर फैले घने पेड़-पौधे और पहाड़ियों पर लिपटे बादलों के टुकड़े इस जगह को बेहद खूबसूरत बना देते हैं। इस पहाड़ की अपनी एक विशेष धार्मिक महत्ता भी है। इसकी तराई में प्रसिद्ध माँ बूढ़ेश्वरी का मंदिर स्थित है, जिसके बारे में मान्यता है कि यहां मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। इसके अलावा, पहाड़ पर भीम के पैर का निशान भी मौजूद है, जो इस जगह को और भी खास बनाता है।
4. पत्थरडा पहाड़: कुदरत का एक अनछुआ खजाना
देवघर जिले के सारठ इलाके में स्थित पत्थरडा पहाड़ उन लोगों के लिए सबसे उत्तम जगह है जो किसी शांत और कम भीड़भाड़ वाले पर्यटन स्थल पर जाना चाहते हैं। देवघर से इसकी दूरी लगभग 45 किलोमीटर है। बारिश के मौसम में इस पहाड़ की रंगत पूरी तरह बदल जाती है और यह हरे कालीन की तरह दिखने लगता है। ऊंची-ऊंची चट्टानें, ठंडी हवा और चारों तरफ फैली प्राकृतिक सुंदरता सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर देती है। इस पहाड़ की तलहटी में लहलहाती धान की फसलें इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देती हैं। जो पर्यटक एक बार यहां आते हैं, वे इसकी बेमिसाल सुंदरता के मुरीद हो जाते हैं।
5. दिघरिया पहाड़: ट्रैकिंग और फोटोग्राफी का पसंदीदा केंद्र
देवघर जिला मुख्यालय से महज 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित दिघरिया पहाड़ शहर के लोगों का सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थल माना जाता है। मानसून के दौरान यहां का नजारा देखते ही बनता है। इस पहाड़ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी चोटी पर खड़े होकर आप पूरे देवघर शहर का एक शानदार नजारा देख सकते हैं। चारों ओर फैली हरियाली और ठंडी हवाओं का आनंद लेने के लिए सुबह और शाम के समय बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। युवाओं के बीच यह जगह ट्रैकिंग और खूबसूरत फोटोग्राफी के लिए काफी लोकप्रिय है।
6. मंदार पहाड़: पौराणिक इतिहास और सौंदर्य का अनूठा मेल
हालांकि मंदार पहाड़ बिहार राज्य के क्षेत्र में पड़ता है और देवघर से इसकी दूरी करीब 75 किलोमीटर है, लेकिन देवघर आने वाले सैलानी इस जगह की सैर करना कभी नहीं भूलते। यहां पहुंचने के बाद सफर की सारी थकान पल भर में दूर हो जाती है। यह पहाड़ हिंदू धर्म ग्रंथों में वर्णित समुद्र मंथन की पौराणिक गाथा से जुड़ा हुआ है। वर्षा ऋतु के दौरान मंदार पहाड़ की खूबसूरती दोगुनी हो जाती है। पहाड़ के शिखर पर बने मंदिर, नीचे स्थित पापहरणी सरोवर और चारों ओर बिछी हरी-भरी चादर इसे मानसून के समय इस पूरे क्षेत्र के सबसे मनमोहक पर्यटन स्थलों में से एक बनाती है।
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