छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मानसून की पहली ही मूसलाधार बारिश ने नगर निगम और स्थानीय प्रशासन के तमाम दावों की कलई खोलकर रख दी है। शनिवार की रात से शुरू हुआ बारिश का सिलसिला रविवार को भी जारी रहा, जिसके चलते शहर के कई इलाकों में जलभराव की गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। सड़कों और गलियों ने नदियों का रूप ले लिया है, जिससे लोगों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। सबसे ज्यादा परेशानी रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों को उठानी पड़ रही है, जहां गंदा पानी घरों के भीतर तक दाखिल हो गया है।
रातभर जागकर लोगों ने बचाई अपनी जान और सामान
रायपुर के कई रिहायशी क्षेत्रों में पानी का स्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। स्थानीय निवासियों के अनुसार, रात के करीब 2 बजे से ही लोग अपने घरों से पानी बाहर निकालने और अपने जरूरी सामानों को सुरक्षित ऊंचाई पर पहुंचाने की जद्दोजहद में जुटे नजर आए। कई इलाकों में घुटनों और कमर तक पानी भर जाने के कारण लोगों के घरों में दो से तीन फीट तक दूषित पानी जमा हो गया। इससे राशन, कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं।
बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई परिवारों को पूरी रात जागकर गुजारनी पड़ी। इस तबाही के कारण कई घर ऐसे हैं जहां चूल्हा तक नहीं जल सका और लोग भूखे-प्यासे रहने को मजबूर हैं। इसके साथ ही प्रभावित इलाकों में पीने के साफ पानी का भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
हर साल की वही कहानी: प्रशासन की उदासीनता से आक्रोश
जलभराव की इस गंभीर समस्या से जूझ रहे स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी देखी जा रही है। क्षेत्र के निवासी राजू वर्मा ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि मानसून के आते ही उनके इलाके में बाढ़ जैसे हालात पैदा होना अब आम बात हो गई है। उन्होंने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह कोई नई समस्या नहीं है। हर साल मानसून के दौरान यहां ऐसी ही भयावह स्थिति उत्पन्न होती है, लेकिन प्रशासन ने आज तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं ढूंढा है। गंदे पानी के बीच छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ रहना बेहद दूभर हो गया है, और अब इलाके में संक्रमण व बीमारियां फैलने का खतरा भी काफी बढ़ गया है।
वहीं, एक अन्य स्थानीय निवासी अनीता वर्मा ने बताया कि सीजन की इस पहली ही भारी बारिश ने शहर के ड्रेनेज सिस्टम को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। उन्होंने डर जाहिर करते हुए कहा कि यदि आने वाले दिनों में ऐसी ही बारिश जारी रही, तो हालात और भी ज्यादा बदतर हो जाएंगे।
इसी तरह की पीड़ा व्यक्त करते हुए निवासी लोकेश यादव ने बताया कि पानी का स्तर लगातार बढ़ने के कारण वे अपने छोटे बच्चों को गोद में लेकर इधर-उधर भागने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि हम लोग बेहद परेशान हैं। पानी के डर से हम थोड़ी देर बैठते हैं, लेकिन जलस्तर बढ़ता देखकर हमें फिर से सुरक्षित स्थान की तलाश में खड़ा होना पड़ता है। अगर पहली ही बारिश का यह नजारा है, तो आगे आने वाले दिनों में हमारा क्या हाल होगा, यह सोचकर ही रूह कांप जाती है।
मौसम विभाग की चेतावनी: 10 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट
जलभराव से परेशान नागरिकों के लिए आने वाले दिन और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, छत्तीसगढ़ और उसके आसपास के राज्यों में आगामी 10 जुलाई तक बहुत भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। मौसम विभाग ने छत्तीसगढ़ के साथ-साथ पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ और पश्चिमी मध्य प्रदेश के लिए भी अलर्ट जारी किया है।
मौसम विभाग द्वारा जारी विस्तृत पूर्वानुमान इस प्रकार है:
- 4 से 8 जुलाई के दौरान पूर्वी मध्य प्रदेश और पश्चिमी मध्य प्रदेश में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है।
- 6 जुलाई को विदर्भ के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।
- 6-7 जुलाई और फिर 9-10 जुलाई के दौरान छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में छिटपुट लेकिन भारी वर्षा होने का अनुमान व्यक्त किया गया है।
- 9-10 जुलाई को पश्चिमी मध्य प्रदेश और पूर्वी मध्य प्रदेश में भी मूसलाधार बारिश होने की आशंका जताई गई है।
मौसम विभाग की इस चेतावनी के बाद स्थानीय लोगों की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं। यदि प्रशासन ने जल्द ही जल निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया, तो रायपुर के नागरिकों की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ सकती हैं।
https://www.indiatv.in/chhattisgarh/heavy-rains-lash-raipur-water-enters-homes-floods-streets-and-roads-2026-07-05-1229340