बिहार का भागलपुर अपनी उत्कृष्ट रेशम कला के कारण दुनिया भर में 'सिल्क सिटी' के रूप में विख्यात है। यहाँ का सिल्क न केवल भारत के कोने-कोने में अपनी चमक बिखेर रहा है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भी इसकी भारी मांग है। हालांकि, इस ऐतिहासिक शहर की एक और अनोखी सौगात है, जिसने हाल के दिनों में पूरे देश के बाजारों में अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बनाई है। हम बात कर रहे हैं पारंपरिक भागलपुरी चादर की, जिसकी लोकप्रियता अब सीमाओं को लांघकर विदेशों तक पहुंच चुकी है। अपनी अद्वितीय बुनाई, शानदार बनावट और बेजोड़ आराम के कारण यह चादर वर्तमान में हर घर की पहली पसंद बनती जा रही है।
पीतांबरी से शुरू हुआ था इस चादर का सफर
अगर हम इस पारंपरिक चादर के इतिहास पर नजर डालें, तो इसका शुरुआती सफर बेहद सादगी भरा था। पहले के समय में यह चादर केवल दो सीमित रंगों में ही तैयार की जाती थी और इसका डिजाइन बिल्कुल साधारण और सपाट होता था। शुरुआती दौर में इसे मुख्य रूप से पीले या पीतांबरी रंग में बुना जाता था, जिसके कारण इसे स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर पर 'पीतांबरी चादर' के नाम से पुकारा जाता था। समय बीतने के साथ, भागलपुर के कुशल बुनकरों ने बदलते वक्त और आधुनिक फैशन की मांग को समझा। उन्होंने इस पारंपरिक कला में नए-नए प्रयोग करने शुरू किए। बुनाई के तरीकों में बदलाव किए गए और आधुनिक रंगों व डिजाइनों को इसमें शामिल किया गया, जिससे इसकी मांग और लोकप्रियता में भारी इजाफा हुआ।
बेहद लोकप्रिय हो रहा है अनोखा 'रसगुल्ला डिजाइन'
भागलपुर के बुनकर सिर्फ धागों को बुनने वाले कारीगर नहीं हैं, बल्कि वे बेहतरीन कलाकार और डिजाइनर भी हैं। वे बाजार की नब्ज पहचानते हैं और खुद नए-नए आकर्षक डिजाइन तैयार करते हैं। यही कारण है कि भागलपुरी चादरों में लगातार नवीनता देखने को मिलती है। कुछ समय पहले इन चादरों को आधुनिक 3D डिजाइन में पेश किया गया था, जिसे ग्राहकों ने हाथों-हाथ लिया। इसी क्रम में अब बुनकरों ने एक नया और बेहद अनोखा प्रयोग किया है, जिसे 'रसगुल्ला डिजाइन' नाम दिया गया है। यह नया प्रयोग बाजार में धूम मचा रहा है और लोग इसे खूब पसंद कर रहे हैं।
क्या है इस रसगुल्ला डिजाइन की खासियत?
इस अनोखी चादर की बनावट बेहद दिलचस्प है। इस पर पूरे कपड़े में उभरे हुए गोल आकार के डिजाइन बने होते हैं, जो देखने में बिल्कुल रसगुल्ले जैसे नजर आते हैं। इस त्रिआयामी प्रभाव को धागों की एक बेहद जटिल और विशिष्ट प्रकार की बुनाई प्रक्रिया के माध्यम से हासिल किया जाता है। देखने में यह डिजाइन जितना मनमोहक और आकर्षक लगता है, छूने में भी उतना ही अलग अनुभव देता है। यही वजह है कि कपड़ा बाजारों में इस नए डिजाइन की मांग में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है।
गुणवत्ता और आराम का बेजोड़ संगम
बुनकरों और कपड़ा विशेषज्ञों का कहना है कि यह चादर सिर्फ अपने नए और आकर्षक रूप-रंग के कारण ही चर्चा में नहीं है, बल्कि इसकी बेजोड़ गुणवत्ता भी इसे बाजार में मौजूद अन्य चादरों से मीलों आगे रखती है। इसे तैयार करने के लिए विशेष रूप से विस्कोस के धागे का इस्तेमाल किया जाता है। यह धागा कोई साधारण कृत्रिम धागा नहीं है, बल्कि इसे एक विशेष प्रकार की प्राकृतिक लकड़ी से मिलने वाले सेलूलोज़ से तैयार किया जाता है। इसी प्राकृतिक आधार के कारण यह चादर छूने में असाधारण रूप से मुलायम, हल्की और त्वचा के लिए बेहद अनुकूल होती है।
हर मौसम के लिए उपयुक्त सौगात
इस भागलपुरी चादर की सबसे बड़ी और अनूठी विशेषता यह है कि इसे किसी एक खास मौसम तक सीमित नहीं रखा जा सकता। यह चादर साल के पूरे बारह महीने इस्तेमाल के लिए एकदम सही मानी जाती है। इसकी खूबियों की सूची निम्नलिखित है:
- तापमान नियंत्रण: यह चादर गर्मियों के मौसम में शरीर को बेहतरीन ठंडक का अहसास कराती है, वहीं सर्दियों के दिनों में हल्की गर्माहट प्रदान करती है।
- बहुउपयोगी स्वरूप: इसका उपयोग घर में बिछाने के लिए खूबसूरत बेडशीट के तौर पर भी किया जा सकता है और सोते समय ओढ़ने के लिए भी यह बेहद आरामदायक है।
- सदाबहार लोकप्रियता: अपने बेहद मुलायम अहसास, आकर्षक रसगुल्ला बुनाई और सर्व-ऋतु अनुकूलता के कारण यह देश के साथ-साथ विदेशी खरीदारों के बीच भी तेजी से अपनी पैठ बना रही है।
बदलाव और नवीनता के इस दौर में, भागलपुर के बुनकरों ने अपनी पारंपरिक विरासत को बचाए रखते हुए आधुनिक बाजार में जो जगह बनाई है, वह वाकई काबिले-तारीफ है। यही कारण है कि आज 'रसगुल्ला' डिजाइन वाली यह भागलपुरी चादर हर आधुनिक भारतीय घर के शयनकक्ष की शोभा बढ़ा रही है।
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