बेगूसराय पुलिस पर कुख्यात बदमाशों की कमर में जबरन पिस्तौल डालने का आरोप, जांच के लिए गांव पहुंचे DIG शैलेश कुमार सिन्हा

बिहार के बेगूसराय में टॉप-10 अपराधियों की सूची में शामिल दो भाइयों की गिरफ्तारी का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस विवादों में घिर गई है, जिसकी जांच के लिए DIG खुद गांव पहुंचे हैं।

बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। इस बार मामला किसी आम नागरिक या बेकसूर से जुड़ा नहीं है, बल्कि बिहार पुलिस के टॉप-10 अपराधियों की सूची में शामिल दो सगे भाइयों की गिरफ्तारी को लेकर उपजे विवाद का है। बेगूसराय पुलिस ने बलिया थाना क्षेत्र के बरियारपुर गांव से मोस्ट वांटेड सोनू और मोनू को गिरफ्तार किया था। इस गिरफ्तारी के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से प्रसारित होने लगा, जिसमें दावा किया जा रहा है कि पुलिसकर्मियों ने गिरफ्तारी के दौरान आरोपी की कमर में जबरन पिस्तौल ठूंस दी थी। इस वीडियो के सामने आने के बाद पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है और पुलिस की साख दांव पर लग गई है।

घटना की गंभीरता को देख खुद जांच के लिए गांव पहुंचे DIG

भरत भूषण एनकाउंटर मामले के बाद बेगूसराय पुलिस पहले से ही विवादों में घिरी हुई थी, और अब इस नए मामले ने आग में घी का काम किया है। मामला जब अत्यधिक संवेदनशील हो गया और स्थानीय लोगों के बीच आक्रोश बढ़ने लगा, तो बेगूसराय-खगड़िया रेंज के DIG शैलेश कुमार सिन्हा ने खुद कमान संभालने का फैसला किया। वह इस पूरे घटनाक्रम की जमीनी सच्चाई जानने के लिए खुद बरियारपुर गांव पहुंचे।

हालांकि DIG की ओर से इस मामले पर अब तक कोई आधिकारिक बयान या प्रेस नोट जारी नहीं किया गया है, लेकिन उन्होंने गांव का दौरा कर स्थानीय लोगों और चश्मदीदों से सीधे बातचीत की। गांव के लोगों ने DIG को बताया कि जब पुलिस सोनू और मोनू को गिरफ्तार करने आई थी, तब ग्रामीणों में से किसी ने भी पुलिस की इस कार्रवाई का विरोध नहीं किया। लेकिन लोगों का गंभीर आरोप है कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिसकर्मियों ने जानबूझकर आरोपी की कमर में पीछे से एक पिस्तौल खोंस दी। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस का यह कदम फर्जी सबूत तैयार करने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। इसी कथित हरकत का वीडियो बनाकर स्थानीय लोगों ने इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा कर दिया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया।

गांव के लोगों ने DIG शैलेश कुमार सिन्हा से इस पूरे मामले की अत्यंत निष्पक्षता से जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि पुलिसकर्मियों ने गलत तरीके से सबूतों को गढ़ने या हेरफेर करने का प्रयास किया है, तो यह कानून का खुला उल्लंघन है और इसके दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध सख्त से सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।

शुरुआती जांच में DSP ने आरोपों को बताया था भ्रामक

इस पूरे मामले की शुरुआत में जब सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल हुआ, तब पुलिस महकमे ने इसका पुरजोर खंडन किया था। बलिया के DSP सुबोध कुमार ने इस विषय में एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी। उस समय डीएसपी ने मीडिया के समक्ष इन सभी आरोपों को पूरी तरह से भ्रामक और निराधार करार दिया था। लेकिन जैसे-जैसे यह मामला चर्चा का विषय बनता गया और इसकी गूंज उच्च अधिकारियों के कानों तक पहुंची, वैसे-वैसे मामला और गंभीर होता चला गया। इसी का नतीजा है कि अब रेंज के सर्वोच्च अधिकारी यानी DIG को खुद बरियारपुर गांव आकर मामले की छानबीन करनी पड़ रही है, जिससे पुलिस प्रशासन पर दबाव काफी बढ़ गया है।

कैसे हुई इन दोनों मोस्ट वांटेड अपराधियों की गिरफ्तारी?

पुलिस की प्राथमिकी और DSP सुबोध कुमार के बयान के अनुसार, इन दोनों भाइयों की गिरफ्तारी के पीछे एक पुरानी रंजिश और गोलीबारी की घटना थी। बीते 20 जून को बलिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बरियारपुर गांव में बच्चों के बीच किसी मामूली बात को लेकर विवाद शुरू हुआ था। देखते ही देखते यह बच्चों का झगड़ा बड़ों के बीच एक बड़े तनाव में बदल गया। इसी दौरान कुख्यात अपराधी सोनू सिंह और उसके भाई मोनू सिंह ने दूसरे पक्ष पर खुलेआम फायरिंग कर दी।

इस गोलीबारी की घटना के बाद से ही बलिया थाने की पुलिस लगातार इन दोनों आरोपियों की तलाश में जुटी हुई थी। पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि ये दोनों भाई किसी अन्य बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं और बरियारपुर इलाके में ही छिपे हुए हैं। इस खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस की एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसने बरियारपुर गांव की घेराबंदी की और सघन छापेमारी अभियान चलाया।

पुलिस का दावा है कि छापेमारी के दौरान जब सोनू और मोनू ने भागने का प्रयास किया, तो पुलिस बल ने मुस्तैदी दिखाते हुए दोनों को दबोच लिया। गिरफ्तारी के समय सोनू ने अपनी पिस्तौल निकालकर सीधे पुलिसकर्मियों पर तान दी थी। ऐसे में पुलिस के जवानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर सोनू से वह हथियार छीन लिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो पर अपनी सफाई देते हुए पुलिस प्रशासन ने कहा कि आरोपी को किसी झूठे मामले में फंसाने के लिए पिस्तौल नहीं दी जा रही थी, बल्कि सोनू से छीने गए उसी हथियार को सुरक्षा की दृष्टि से उसकी कमर में वापस रखा जा रहा था ताकि उसे थाने तक सुरक्षित ले जाया जा सके।

सोनू और मोनू पर दर्ज हैं दर्जनों आपराधिक मामले

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सोनू सिंह और मोनू सिंह कोई साधारण आरोपी नहीं हैं, बल्कि वे उस इलाके के बेहद कुख्यात अपराधी हैं और उनका एक लंबा तथा खतरनाक आपराधिक इतिहास रहा है। पुलिस द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार:

  • दोनों भाइयों में से बड़े भाई सोनू सिंह के खिलाफ अकेले बलिया थाने में हत्या के प्रयास, रंगदारी और आर्म्स एक्ट सहित कुल 11 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
  • वहीं, उसके छोटे भाई मोनू सिंह के खिलाफ भी बलिया थाने में इसी तरह के संगीन अपराधों के तहत कुल 9 मामले दर्ज पाए गए हैं।

प्रारंभिक पूछताछ के दौरान पुलिस को यह भी पता चला है कि ये दोनों भाई एक बड़े और बेहद सक्रिय संगठित अपराधी गिरोह के साथ मिलकर काम करते हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों आरोपियों के खिलाफ कानून के स्थापित नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जा रही है और पुलिस उनके पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हुई है। हालांकि, अब इस वायरल वीडियो कांड के बाद पुलिस की यह पूरी कार्रवाई संदेह के घेरे में आ गई है, और देखना होगा कि DIG की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

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