उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले से धोखाधड़ी और जालसाजी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। यहां की धूमनगंज थाना पुलिस ने एक ऐसे शातिर दिमाग युवक को धर दबोचा है जो सरकारी नौकरी पाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार था। इस आरोपी ने अपने ही सगे दोस्त के सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की और फर्जी कागजात तैयार कर RPF के ट्रेनिंग सेंटर में दाखिल हो गया। हैरान करने वाली बात यह है कि इस जालसाज ने वहां न केवल फर्जी दस्तावेज पेश किए बल्कि राजरूपपुर में स्थित RPF ट्रेनिंग सेंटर में बकायदा एक दिन की ट्रेनिंग भी सफलतापूर्वक पूरी कर ली। हालांकि इस शातिर का यह खेल बहुत लंबा नहीं चल सका और अगले ही दिन दस्तावेजों की ऑनलाइन जांच के दौरान उसकी पोल खुल गई।
दोस्त के नियुक्ति पत्र में ऐसे की छेड़छाड़
पुलिस की गिरफ्त में आए इस आरोपी की पहचान रोहित कुमार के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले का निवासी है। इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए धूमनगंज थाना प्रभारी धनंजय पांडेय ने बताया कि आरोपी रोहित कुमार के एक करीबी दोस्त का चयन RPF में हुआ था। दोस्त को मिले सरकारी नियुक्ति पत्र को देखकर रोहित के मन में लालच आ गया और उसकी नीयत खराब हो गई। उसने नौकरी हथियाने के लिए एक खतरनाक साजिश रची। रोहित ने अपने दोस्त के असली जॉइनिंग लेटर यानी नियुक्ति पत्र में डिजिटल रूप से एडिटिंग कर दी। उसने बड़ी चालाकी से उस पत्र से अपने दोस्त का नाम, फोटो और जीटीपी विवरण हटा दिया और उसकी जगह अपनी खुद की जानकारी और फोटो लगा दी। इसके बाद उसने इस जाली दस्तावेज का एक रंगीन प्रिंटआउट निकाल लिया ताकि वह बिल्कुल असली जैसा दिखे।
ट्रेनिंग सेंटर में मिला प्रवेश और एक दिन की ट्रेनिंग
इस जाली और रंगीन प्रिंट वाले नियुक्ति पत्र को हाथ में लेकर आरोपी रोहित कुमार राजरूपपुर स्थित RPF ट्रेनिंग सेंटर पहुंच गया। शुरुआती दौर में वहां गेट पर और अंदर मौजूद सुरक्षा कर्मियों तथा स्टाफ का ध्यान इस चालाकी की तरफ बिल्कुल नहीं गया। दस्तावेज प्रथम दृष्टया असली नजर आ रहे थे, जिसके कारण उसे आसानी से सेंटर के अंदर प्रवेश मिल गया। हद तो तब हो गई जब उसने वहां भर्ती हुए अन्य अभ्यर्थियों के साथ मिलकर बकायदा एक दिन की कठिन ट्रेनिंग भी पूरी कर ली। उसे लग रहा था कि उसका यह फर्जीवाड़ा कभी पकड़ा नहीं जाएगा और वह आसानी से सरकारी नौकरी हासिल कर लेगा।
ऑनलाइन सत्यापन से सामने आया सच
धोखाधड़ी का यह ड्रामा ज्यादा समय तक टिक नहीं पाया। ट्रेनिंग के दूसरे दिन जब विभाग की ओर से सभी नवनियुक्त अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का ऑनलाइन वेरिफिकेशन यानी डिजिटल सत्यापन शुरू किया गया, तो रोहित कुमार के पैरों तले जमीन खिसक गई। जैसे ही कंप्यूटर सिस्टम में उसके द्वारा जमा किए गए रोल नंबर और नाम को दर्ज किया गया, ऑनलाइन रिकॉर्ड में उसका कोई मिलान नहीं हुआ। रोल नंबर किसी और के नाम पर दर्ज था और रोहित का नाम विभाग के डेटाबेस में कहीं नहीं था। गड़बड़ी सामने आते ही RPF के वरिष्ठ अधिकारियों में हड़कंप मच गया। उन्होंने तुरंत इस फर्जी अभ्यर्थी को हिरासत में ले लिया और धूमनगंज थाना पुलिस को इस बात की सूचना देकर उसे पुलिस के हवाले कर दिया।
धूमनगंज थाना प्रभारी धनंजय पांडेय ने बताया कि पुलिस हिरासत में लेकर युवक रोहित कुमार से जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने अपना गुनाह पूरी तरह स्वीकार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ जालसाजी और धोखाधड़ी की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है और उसे जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही पुलिस रोहित द्वारा दिए गए बयानों की बारीकी से जांच कर रही है और इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस पूरी साजिश में उसका कोई मददगार या कोई अन्य गिरोह भी शामिल था।
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