जीवन में जब मजबूत संकल्प, निरंतर परिश्रम और सही मार्गदर्शन का मेल होता है, तो बड़ी से बड़ी सफलता भी आसान हो जाती है। इस बात को पूरी तरह सच साबित कर दिखाया है झारखंड के जमशेदपुर के रहने वाले ऋषभ सिंह ने। समस्तीपुर जिले के पूसा में स्थित प्रतिष्ठित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय से कृषि विज्ञान की डिग्री लेने वाले ऋषभ आज उसी समस्तीपुर जिले में एक जिम्मेदार कृषि अधिकारी के रूप में तैनात हैं। जिस धरती पर उन्होंने पढ़ाई के दौरान खेतों की मिट्टी की तासीर को समझा, आज उसी मिट्टी से जुड़े किसानों का जीवन संवारने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उनके कंधों पर है।
शिक्षा की भूमि बनी कर्मभूमि: ऋषभ सिंह की प्रेरक कहानी
ऋषभ सिंह की यह गौरवशाली यात्रा समस्तीपुर जिले के शाहपुर पटोरी प्रखंड से जुड़ी है, जहां साल 2025 में उनकी नियुक्ति प्रखंड कृषि पदाधिकारी के रूप में हुई है। उन्होंने वर्ष 2019 से 2023 तक डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा से बीएससी (ऑनर्स) एग्रीकल्चर की पढ़ाई पूरी की थी। ऋषभ के लिए यह बेहद भावनात्मक और गर्व का क्षण है कि जिस जिले में उन्होंने एक छात्र के रूप में दिन बिताए, आज उसी जिले के विकास में वे एक प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर अपना योगदान दे रहे हैं। उनकी यह सफलता समस्तीपुर की समृद्ध शैक्षणिक साख और कृषि शिक्षा की गुणवत्ता को भी एक नया आयाम देती है।
सफलता का मूल मंत्र: पाठ्यक्रम की गहरी समझ
अपनी इस सफलता की रणनीति साझा करते हुए ऋषभ सिंह ने बताया कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा को पास करने का कोई जादुई शॉर्टकट नहीं होता है। स्नातक की पढ़ाई के दौरान उन्होंने केवल परीक्षा उत्तीर्ण करने पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि कृषि विज्ञान के पूरे पाठ्यक्रम की गहरी और व्यावहारिक समझ विकसित की। विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं और अनुसंधान खेतों में जो व्यावहारिक प्रशिक्षण उन्हें मिला, उसने उनकी जमीनी समझ को मजबूत किया। इसी ठोस तैयारी के बल पर उन्होंने बिहार कृषि विभाग की नियुक्ति परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की। उनका मानना है कि यदि छात्र अपने मुख्य विषयों पर अच्छी पकड़ बना लें, तो किसी भी स्तर की परीक्षा में कामयाबी पाना बहुत आसान हो जाता है।
पारिवारिक सहयोग और शैक्षणिक पृष्ठभूमि
ऋषभ ने अपनी इस बड़ी उपलब्धि का पूरा श्रेय अपने माता-पिता, छोटे भाई और अपने शिक्षकों को दिया है, जिन्होंने हर मुश्किल घड़ी में उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। ऋषभ की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई, जहां उन्होंने अपनी 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने कृषि क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने का एक बड़ा और साहसिक निर्णय लिया और पूरे समर्पण के साथ इस राह पर आगे बढ़ते रहे।
किसानों की आय बढ़ाने और वैज्ञानिक खेती पर विशेष जोर
शाहपुर पटोरी में कृषि पदाधिकारी का पदभार संभालने के बाद ऋषभ का उद्देश्य केवल सरकारी फाइलों और दफ्तर की जिम्मेदारियों तक सीमित रहना नहीं है। उनका मुख्य ध्येय किसानों को खेती की नई और उन्नत तकनीकों से जोड़ना है। विश्वविद्यालय के अपने व्यावहारिक अनुभवों का लाभ उठाते हुए वे किसानों की वास्तविक और स्थानीय समस्याओं का त्वरित समाधान खोजना चाहते हैं। ऋषभ की कार्ययोजना में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
- स्थानीय किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना।
- फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए उन्नत और संशोधित बीजों के उपयोग को बढ़ावा देना।
- किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए नई नकदी फसलों और कृषि उपकरणों की जानकारी देना।
- मिट्टी की सेहत सुधारने और न्यूनतम लागत में अधिक मुनाफा कमाने की तकनीकों को धरातल पर उतारना।
अन्य राज्यों से आने वाले छात्रों के लिए बड़ी मिसाल
ऋषभ सिंह की यह यात्रा देश के उन तमाम कोने-कोने से आने वाले छात्रों के लिए एक बड़ी मिसाल है जो अपने घरों से दूर समस्तीपुर जैसे शैक्षणिक केंद्रों में पढ़ाई करने आते हैं। उनका यह सफर दिखाता है कि यदि लक्ष्य पूरी तरह स्पष्ट हो, तैयारी के प्रति ईमानदारी हो और प्रयास निरंतर किए जाएं, तो सफलता अवश्य कदम चूमती है। उन्होंने साबित किया है कि शिक्षा प्राप्त करने के बाद उसी क्षेत्र के कल्याण में जुट जाना एक छात्र के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है।
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