बर्दवान जिला अदालत में कथित 'फर्जी वकील' के पोस्टर से मचा हड़कंप, बार एसोसिएशन ने शुरू की जांच

पश्चिम बंगाल के बर्दवान कोर्ट परिसर में शनिवार सुबह एक वकील के खिलाफ फर्जी होने के पोस्टर लगने से हड़कंप मच गया, जिसके बाद बार एसोसिएशन ने जांच शुरू कर दी है।

पश्चिम बंगाल का बर्दवान जिला अदालत परिसर शनिवार को एक अजीबोगरीब मामले को लेकर चर्चा में आ गया। शनिवार की सुबह अदालत परिसर के भीतर एक कथित "फर्जी वकील" के खिलाफ लगाए गए पोस्टरों ने पूरे प्रशासनिक और कानूनी हलके में हड़कंप मचा दिया। आरोपी की पहचान निलय चोंगदार के रूप में हुई है, जो लंबे समय से बर्दवान अदालत में वकील के रूप में काम कर रहे थे। लेकिन अब उनकी योग्यता और सदस्यता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

शनिवार सुबह अदालत परिसर में बने वाहन और साइकिल स्टैंड के पीछे अचानक दो अलग-अलग पोस्टर लगे हुए मिले। इन पोस्टरों में निलय चोंगदार पर बिना कानून की जरूरी परीक्षा पास किए वकालत करने का सीधा आरोप लगाया गया है। इसके साथ ही पोस्टरों में यह सवाल भी उठाया गया कि बिना बार की सदस्यता के वह आखिर किसके संरक्षण में इतने सालों से यहां काम कर रहे थे। इस घटना के सामने आते ही वकीलों के बीच सुगबुगाहट तेज हो गई और बार एसोसिएशन ने तुरंत मामले की जांच शुरू कर दी।

बार एसोसिएशन ने क्या कहा?

इस पूरे मामले पर बर्दवान बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अरूप दास ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि हाल ही में एक बैठक के दौरान आऊशग्राम से मिले एक पत्र के आधार पर संबंधित व्यक्ति के दस्तावेजों की जांच की गई थी। इस जांच के दौरान यह बात सामने आई कि निलय चोंगदार ने अब तक All India Bar Examination (AIBE) की परीक्षा पास नहीं की है।

एसोसिएशन के नियमों के अनुसार, परीक्षा पास न होने के कारण उनकी सदस्यता अभी "पेंडिंग" यानी लंबित श्रेणी में है और उन्हें औपचारिक रूप से बार का सदस्य नहीं माना गया है। बंगाल बार एसोसिएशन ने अब उनके सभी दस्तावेजों को जांच के लिए बार काउंसिल ऑफ वेस्ट बंगाल और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भेजने का फैसला किया है। इसके साथ ही जिला जज को भी इस पूरे मामले की जानकारी दी जाएगी।

आगे की कार्रवाई और कानूनी नियम

बार एसोसिएशन के सह-सभापति संजय घोष ने मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि निलय चोंगदार इस समय बार के सदस्य नहीं हैं। ऐसे में उनके खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई को लेकर कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। बार एसोसिएशन का कहना है कि कानूनी प्रशिक्षण लेना एक अलग बात है, लेकिन पूरी तरह से अदालती वकालत करने के लिए तय नियमों का पालन करना और सभी अनिवार्य परीक्षाओं को पास करना बेहद जरूरी है। इस मामले पर अंतिम फैसला लेने के लिए जल्द ही बार एसोसिएशन की कार्यकारी समिति और सामान्य सदस्यों की एक आपात बैठक बुलाई जाएगी।

पोस्टर फटने से गहराया रहस्य

इस घटना के कुछ ही देर बाद कोर्ट परिसर में लगे पोस्टर फाड़ दिए गए। हालांकि, अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि ये पोस्टर किसने लगाए थे और इन्हें किसने फाड़ा। इस रहस्यमयी घटनाक्रम के बाद से बर्दवान अदालत परिसर में वकीलों और कोर्ट कर्मियों के बीच तनाव और कौतूहल का माहौल बना हुआ है।

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