बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के अंतर्गत आने वाले साहेबगंज विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मियां अचानक तेज हो गई हैं। इस बात की पूरी संभावना है कि इस क्षेत्र के मतदाताओं को जल्द ही एक नया विधायक चुनना पड़ सकता है। दिल्ली की एक विशेष अदालत द्वारा साहेबगंज से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक राजू कुमार सिंह को चार साल के कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद उनकी सदस्यता पर खतरा मंडराने लगा है। कानूनी नियमों के अनुसार, दो साल या उससे अधिक की सजा होने पर किसी भी जनप्रतिनिधि की विधानसभा सदस्यता रद्द की जा सकती है। इसी वजह से राजू सिंह की विधायकी जाना तय माना जा रहा है, जिससे इस क्षेत्र में उपचुनाव की आहट तेज हो गई है।
राउज एवेन्यू कोर्ट का कड़ा रुख और भारी-भरकम जुर्माना
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस बेहद संवेदनशील मामले में अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने साहेबगंज के भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को चार साल के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उन पर 25 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस अदालती फैसले के बाद राजू सिंह की विधानसभा सदस्यता जाना तय है। न्यायालय का यह आदेश बिहार विधानसभा सचिवालय पहुंचने के बाद उनकी सदस्यता रद्द करने की औपचारिक कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। यदि उच्च अदालत से इस सजा पर कोई रोक नहीं लगती है, तो साहेबगंज विधानसभा सीट को रिक्त घोषित कर दिया जाएगा, जिसके बाद वहां उपचुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
क्या था साल 2018 की न्यू ईयर पार्टी का पूरा मामला?
यह पूरा मामला साल 2018 के आखिरी दिन यानी 31 दिसंबर 2018 की रात को आयोजित एक न्यू ईयर पार्टी में हुई हर्ष फायरिंग की घटना से जुड़ा हुआ है। दिल्ली के फतेहपुर बेरी इलाके में विधायक के भाई संजीव सिंह का एक फार्म हाउस स्थित है, जहां नए साल के स्वागत के लिए एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया था। पार्टी में तेज आवाज में संगीत बज रहा था और लोग जश्न मना रहे थे, तभी वहां अचानक हर्ष फायरिंग शुरू हो गई। इस अंधाधुंध गोलीबारी में वहां मौजूद डॉ. अर्चना गुप्ता को गोली लग गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान 3 जनवरी 2019 को उनकी मौत हो गई।
पुलिस की गहन जांच में यह बेहद चौंकाने वाला सच भी सामने आया था कि गोली चलने के तुरंत बाद विधायक राजू सिंह के कहने पर डांस फ्लोर से खून को साफ कर दिया गया था। ऐसा इसलिए किया गया था ताकि वारदात से जुड़े सभी महत्वपूर्ण साक्ष्य और सबूत मिटाए जा सकें। अदालत ने इन सभी सबूतों और गवाहों के आधार पर राजू सिंह को गैर इरादतन हत्या यानी IPC 304-II और शस्त्र अधिनियम की धारा 30 के तहत दोषी पाया है।
बचाव पक्ष की दलीलें खारिज, नेपाल भागने की कोशिश रही नाकाम
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत के समक्ष दलील दी थी कि राजू सिंह छह बार विधायक रह चुके हैं और उनका कोई पिछला आपराधिक इतिहास नहीं रहा है। उन्होंने न्यायाधीश से अपील की थी कि राजू सिंह की सजा की अवधि को दो साल से कम रखा जाए ताकि उनकी विधायकी सुरक्षित रह सके। हालांकि, विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए इस दलील को पूरी तरह से खारिज कर दिया और विधायक के प्रति कोई नरमी नहीं दिखाई।
इस मामले में पुलिस ने विधायक राजू सिंह की पत्नी रेणु सिंह समेत कुल चार लोगों को आरोपी बनाया था। हालांकि, सुनवाई के दौरान पर्याप्त सबूत न होने के कारण अदालत ने रेणु सिंह समेत तीन लोगों को बरी कर दिया। इस घटना के तुरंत बाद जब पुलिस राजू सिंह की तलाश कर रही थी, तब वह कानून के शिकंजे से बचने के लिए नेपाल भागने की फिराक में थे। लेकिन पुलिस की मुस्तैदी के कारण उन्हें उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से गिरफ्तार कर लिया गया था। अब इस कड़े अदालती फैसले के बाद साहेबगंज क्षेत्र को जल्द ही नया विधायक मिलने की संभावना बेहद प्रबल हो गई है।
जनप्रतिनिधियों के लिए क्या हैं सदस्यता रद्द होने के कानूनी नियम?
अदालत से सजा मिलने के बाद किसी भी सांसद या विधायक की सदस्यता जाने को लेकर भारतीय कानून में बेहद कड़े और स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। आइए इन नियमों को विस्तार से समझते हैं:
- क्या हर मामले में सदस्यता चली जाती है? नहीं, ऐसा नहीं है। सदस्यता केवल तभी जाती है जब किसी भी विधायक या सांसद को किसी भी आपराधिक मामले में 2 साल या उससे अधिक की जेल की सजा सुनाई जाती है।
- यह नियम किस कानून के तहत आता है? जनप्रतिनिधियों की अयोग्यता से जुड़ा यह महत्वपूर्ण नियम जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के अंतर्गत दर्ज है।
- सदस्यता कब से खत्म मानी जाती है? कानून के अनुसार, जैसे ही किसी सक्षम न्यायालय द्वारा किसी जनप्रतिनिधि को 2 साल या उससे अधिक की सजा सुनाई जाती है, उसी दिन से वह सांसद या विधायक अयोग्य घोषित हो जाता है।
- क्या उच्च न्यायालय में अपील करने से सदस्यता बच सकती है? केवल ऊपरी अदालत में अपील दायर कर देने मात्र से सदस्यता नहीं बचाई जा सकती। सदस्यता को केवल तभी बचाया जा सकता है जब हाईकोर्ट या कोई अन्य उच्च न्यायालय सजा के क्रियान्वयन के साथ-साथ दोषसिद्धि पर भी पूर्ण रूप से रोक लगा दे।
- यदि सजा दो साल से कम हो तो क्या होगा? अगर अदालत द्वारा दी गई सजा दो साल से कम अवधि की है, तो सामान्य तौर पर केवल इस आधार पर सदस्यता समाप्त नहीं होती है। हालांकि, कुछ विशिष्ट श्रेणी के अपराधों में सजा कम होने पर भी अयोग्यता के अलग नियम लागू हो सकते हैं।
- सजा पूरी होने के बाद चुनाव लड़ने पर क्या प्रतिबंध है? कानून के तहत जिस भी व्यक्ति की सदस्यता दो साल या उससे अधिक की सजा के कारण समाप्त होती है, वह अपनी पूरी सजा काटने के बाद भी अगले 6 साल तक कोई भी चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित रहता है।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: लिली थॉमस मामला
साल 2013 में देश की सर्वोच्च अदालत ने लिली थॉमस बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। इस फैसले के आने से पहले तक सजायाफ्ता सांसदों और विधायकों को ऊपरी अदालत में अपील दायर करने के लिए कुछ समय की मोहलत मिल जाती थी, जिसके कारण उनकी सदस्यता तुरंत खत्म नहीं होती थी।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया। अब नए नियम के मुताबिक, दो साल या उससे अधिक की सजा पाते ही दोषी सांसद या विधायक की सदस्यता उसी क्षण से समाप्त हो जाती है। इसी ऐतिहासिक फैसले के आलोक में अब साहेबगंज के भाजपा विधायक राजू सिंह की सदस्यता पर तलवार लटकी हुई है और उनकी विधानसभा सीट पर जल्द ही उपचुनाव होने के संकेत मिल रहे हैं।
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