मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार, 05 जुलाई 2026 को हमेशा की तरह भक्ति और श्रद्धा के अनूठे संगम के साथ दिव्य भस्म आरती का आयोजन संपन्न हुआ। ब्रह्म मुहूर्त में आयोजित होने वाली इस विशेष आरती में शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने के साथ-साथ विदेशों से भी भारी संख्या में शिवभक्त उज्जैन पहुंचे थे। अल सुबह से ही मंदिर परिसर भगवान शिव की आराधना और भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया। पूरा वातावरण 'जय महाकाल' और 'हर हर महादेव' के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा, जिससे वहां मौजूद श्रद्धालुओं को एक अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा का अहसास हुआ।
वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति का अनूठा माहौल
बाबा महाकाल की इस पावन भस्म आरती की शुरुआत मंदिर के पुजारियों द्वारा अत्यंत विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ की गई। जैसे-जैसे आरती आगे बढ़ी, मंदिर परिसर का माहौल पूरी तरह से भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु सुबह-सुबह ही लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे ताकि वे अपने आराध्य देव के इस मनमोहक स्वरूप के साक्षात दर्शन कर सकें।
मंदिर में उपस्थित भक्तों ने बाबा महाकाल की चौखट पर सिर झुकाकर अपने और अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और कल्याण की मंगल कामना की। भस्म आरती को श्री महाकालेश्वर मंदिर की सबसे प्राचीन, पवित्र और अनूठी परंपराओं में से एक माना जाता है। सनातन धर्म में ऐसी मान्यता है कि इस विशेष आरती के माध्यम से बाबा महाकाल स्वयं अपने भक्तों को दर्शन देकर उनके जीवन के सभी दुखों, कष्टों और बाधाओं को हर लेते हैं।
नूतन वस्त्रों और आभूषणों से सजा बाबा का दरबार
आज के इस पावन आयोजन के दौरान भगवान श्री महाकालेश्वर का बेहद मनमोहक और अलौकिक श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल को विशेष रूप से नए आकर्षक वस्त्र धारण कराए गए और उनका सोने-चांदी के सुंदर आभूषणों से दिव्य श्रृंगार किया गया। आरती के समय प्रज्वलित दीयों की रोशनी और घंटियों व शंख की सुमधुर ध्वनि ने पूरे गर्भगृह सहित संपूर्ण मंदिर परिसर को एक दिव्य आभा से भर दिया।
आरती में शामिल हुए शिवभक्तों ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि भस्म आरती के दर्शन मात्र से ही मन को एक असीम शांति की अनुभूति होती है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कई श्रद्धालुओं के लिए यह क्षण उनके जीवन का सबसे यादगार और पवित्र अनुभव साबित हुआ। श्रद्धालुओं की इस भारी भीड़ को देखते हुए महाकाल मंदिर प्रशासन की ओर से सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे, ताकि दूर-दराज से आए भक्तों को दर्शन करने में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
महाकालेश्वर मंदिर में दिनभर की आरती की परंपरा
शायद बहुत कम लोग जानते होंगे कि उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में पूरे दिन के दौरान अलग-अलग समय पर कुल मिलाकर 6 बार आरती की जाती है। इन सभी आरतियों में ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली भस्म आरती का महत्व सबसे अनोखा और सर्वोच्च माना गया है। इस आरती की अलौकिकता को महसूस करने के लिए दुनिया भर से लोग खिंचे चले आते हैं।
भस्म आरती के अनुष्ठान के दौरान भगवान महाकाल को एक विशेष घटा टोप स्वरूप प्रदान किया जाता है। इस विशिष्ट आरती की प्रक्रिया भी बेहद प्राचीन और अनूठी है। इसके लिए एक साफ सूती कपड़ा लिया जाता है, जिसे विशेष तरीके से बांधकर भगवान श्री महाकालेश्वर के ऊपर बिखेरते हुए आरती की इस पवित्र प्रक्रिया को पूर्ण किया जाता है।
इसके साथ ही मंदिर की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आते हैं, उनके लिए मुख्य ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के उपरांत जूना महाकाल के दर्शन करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। माना जाता है कि जूना महाकाल के दर्शन के बिना महाकालेश्वर की यात्रा और पूजा का पूरा फल प्राप्त नहीं होता है। इस प्रकार आज की दिव्य भस्म आरती ने एक बार फिर श्रद्धालुओं के मन में अटूट आस्था और भक्ति की नई लौ प्रज्वलित की है।
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