20 किलो टमाटर से शुरू हुआ था सफर, अब पलामू प्रशासन दिलाएगा सैकड़ों महिलाओं को धूप और बारिश से निजात, बनेगा आधुनिक शेड

झारखंड के पलामू जिले में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा संचालित ग्रामीण हाट की किस्मत बदलने वाली है। स्थानीय प्रशासन की पहल पर अब इस खुले बाजार में एक आधुनिक शेड का निर्माण किया जाएगा।

झारखंड के पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड के चेड़ाबार गांव में महिला सशक्तिकरण की एक अद्भुत मिसाल देखने को मिल रही है। यहां स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा संचालित किया जाने वाला ग्रामीण हाट आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि सैकड़ों महिलाओं की आजीविका का साधन बन चुके इस विशाल हाट की शुरुआत महज 20 किलो टमाटर की बिक्री से हुई थी।

अब इस हाट को लेकर एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। लंबे समय से खुले आसमान के नीचे अपनी उपज बेचने को मजबूर इन महिलाओं की परेशानी को पलामू जिला प्रशासन दूर करने जा रहा है। स्थानीय मीडिया संस्थान 'लोकल 18' पर इस खबर को प्रमुखता से दिखाए जाने के बाद पलामू के उपायुक्त ने तुरंत संज्ञान लिया है। उपायुक्त के निर्देश पर अब इस ग्रामीण हाट में एक अत्याधुनिक शेड का निर्माण कराया जाएगा, जिससे महिलाओं को धूप और बारिश जैसी मौसम की मार से राहत मिल सकेगी।

लोकल 18 की खबर का हुआ बड़ा असर

चेड़ाबार गांव की आत्मनिर्भर महिलाओं को लंबे समय से एक सुरक्षित बाजार की आवश्यकता थी। वे लगातार प्रशासन से यहां शेड निर्माण की मांग कर रही थीं ताकि मौसम खराब होने पर भी उनका व्यापार प्रभावित न हो। जब 'लोकल 18' ने इस मुद्दे को उठाया और महिलाओं की समस्याओं को उजागर किया, तो पलामू जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया।

प्रशासन ने इस दिशा में तेजी से कार्रवाई शुरू कर दी है और ग्रामीण हाट में आधुनिक शेड बनाने के लिए स्थल चयन की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो चुकी है। इस पहल से न केवल महिलाओं को एक सुरक्षित छत मिलेगी, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा और वे अधिक उत्साह के साथ अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सकेंगी।

टमाटर की एक छोटी सी टोकरी से बना बड़ा बाजार

इस ग्रामीण हाट के बनने की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। वर्ष 2022 में एक साधारण सी बैठक के दौरान इस हाट की नींव पड़ी थी। स्वयं सहायता समूह की बैठक में शामिल एक महिला ने अपनी चिंता साझा करते हुए कहा कि उसके पास लगभग 15 से 20 किलो टमाटर हैं। उसने बताया कि इन टमाटरों को बेचने के लिए उसे अपने गांव से दूर डालटनगंज जाना पड़ेगा, जिससे उसका काफी समय और पैसा बर्बाद होगा।

इस बात को सुनकर समूह की अन्य महिलाओं ने एक सराहनीय निर्णय लिया। उन्होंने मिलकर उस महिला के सारे टमाटर खुद ही खरीद लिए। संयोग से उस दिन गुरुवार था। इस घटना से प्रभावित होकर सभी महिलाओं ने तय किया कि वे हर गुरुवार को गांव में ही एक साप्ताहिक हाट का आयोजन करेंगी। इस निर्णय का उद्देश्य यह था कि गांव की किसी भी महिला को अपनी फसल या सब्जियां बेचने के लिए दूर न जाना पड़े। समय के साथ यह छोटी सी पहल आज एक बड़े ग्रामीण हाट का रूप ले चुकी है और सैकड़ों महिलाओं की आजीविका का मजबूत सहारा बन गई है।

दीदी बाड़ी योजना से मिली आत्मनिर्भरता

यह ग्रामीण हाट आज के समय में महिला सशक्तिकरण का एक जीवंत उदाहरण बन गया है। इस हाट में आने वाली अधिकांश महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं और वे दीदी बाड़ी योजना के अंतर्गत अपने घरों या खेतों में ताजी सब्जियां और अन्य कृषि उत्पाद उगाती हैं।

इन उत्पादों को वे सीधे इस हाट में लाकर बेचती हैं। स्थानीय स्तर पर बाजार उपलब्ध होने के कारण इन्हें बिचौलियों से मुक्ति मिली है और इन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है। इससे महिलाओं की आमदनी में काफी सुधार हुआ है और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं। हालांकि, खुले मैदान में बाजार लगने के कारण तेज गर्मी, कड़कती धूप और अचानक होने वाली बारिश में महिलाओं को भारी नुकसान और दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।

प्रशासन ने कसी कमर, जल्द बनेगा शेड

इस पूरे मामले पर जिला परियोजना प्रबंधक (डीपीएम) अनीता केरकेट्टा ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि चेड़ाबार गांव की महिलाएं वर्ष 2022 से पूरी लगन के साथ इस ग्रामीण हाट का संचालन कर रही हैं। मीडिया में इस खबर के आने के बाद पलामू के उपायुक्त ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया।

उपायुक्त के निर्देश पर शेड निर्माण की प्रक्रिया को अमली जामा पहनाने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है। इसके साथ ही अंचल अधिकारी को पत्र भेजकर उपयुक्त सरकारी भूमि का निरीक्षण करने और उसकी विस्तृत रिपोर्ट जल्द से जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

डीपीएम अनीता केरकेट्टा के अनुसार, जैसे ही अंचल अधिकारी से स्थल निरीक्षण की रिपोर्ट प्राप्त होगी, वैसे ही भूमि का अंतिम चयन कर शेड निर्माण का कार्य शुरू करा दिया जाएगा। इस आधुनिक शेड के बन जाने से स्वयं सहायता समूह की इन मेहनती महिलाओं को एक स्थायी, सुरक्षित और व्यवस्थित बाजार मिल जाएगा, जिससे उनका व्यापार और अधिक फलेगा-फूलेगा।

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