मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुलने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहां परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले अत्यंत गोपनीय माने जाने वाले प्रश्नपत्रों के 9 बंडल रहस्यमय तरीके से गायब हो गए। इस बड़ी चूक के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को आनन-फानन में परीक्षा रद्द करने का फैसला लेना पड़ा। इस घटना से आक्रोशित छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में जमकर हंगामा किया और प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
परीक्षा से ठीक 5 मिनट पहले रद्द हुआ पेपर, भड़के छात्र
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में चल रही परीक्षाओं के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब छात्रों को पता चला कि उनकी परीक्षा रद्द कर दी गई है। कंप्यूटर साइंस विभाग के छात्र पवन रजक ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि परीक्षा सुबह 11:00 बजे शुरू होने वाली थी। छात्र पूरी तैयारी के साथ परीक्षा केंद्रों पर पहुंच चुके थे, लेकिन ठीक परीक्षा शुरू होने से 5 मिनट पहले यानी सुबह 10:55 बजे परीक्षा निरस्त करने की घोषणा कर दी गई।
इस अचानक हुई घोषणा के बाद छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। नाराज छात्रों के एक बड़े समूह ने तत्काल परीक्षा नियंत्रक से मिलकर इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगने का प्रयास किया। हालांकि, छात्रों को परीक्षा नियंत्रक से मुलाकात करने में सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद आक्रोशित छात्र सीधे कुलपति आलोक शर्मा के पास पहुंचे और उनसे सुरक्षा में हुई इस भारी चूक को लेकर तीखे सवाल पूछे।
खिड़की तोड़कर घुसे चोर, सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल
प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, यह कोई सामान्य चोरी नहीं बल्कि एक सुनियोजित साजिश की तरह प्रतीत होती है। बताया जा रहा है कि चोर विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग की खिड़की तोड़कर अंदर दाखिल हुए थे। इसी विभाग के सुरक्षित कमरे में आगामी परीक्षाओं के गोपनीय प्रश्नपत्रों को रखा गया था। चोरों ने वहां रखे प्रश्नपत्रों के कुल 9 बंडलों पर हाथ साफ कर दिया और आसानी से फरार हो गए।
छात्र पवन रजक ने इस पूरी घटना पर गहरा संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि इतने बड़े और प्रतिष्ठित संस्थान में इस तरह की घटना होना कई तरह के शक पैदा करता है। छात्रों को अंदेशा है कि यह पेपर लीक जैसी किसी बड़ी गड़बड़ी या भ्रष्टाचार को छिपाने की एक सोची-समझी साजिश हो सकती है। छात्रों ने सवाल उठाया कि जब विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा गार्ड चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं और प्रश्नपत्रों को बेहद सुरक्षित रखने के कड़े नियम हैं, तो फिर कोई खिड़की तोड़कर इतने संवेदनशील दस्तावेज कैसे ले जा सकता है? छात्रों का आरोप है कि कुलपति से मुलाकात के दौरान भी उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।
कुलपति ने बुलाई जांच समिति, पुलिस में शिकायत दर्ज
इस पूरे मामले पर विश्वविद्यालय के कुलपति आलोक शर्मा ने भी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई का आश्वासन दिया है। कुलपति ने बताया कि इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए 3 सदस्यों की एक विशेष समिति का गठन किया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस समिति के गठन का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया जाएगा और जांच शुरू हो जाएगी।
कुलपति आलोक शर्मा ने स्वीकार किया कि यह घटना न केवल RGPV के लिए बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए एक बड़ा झटका है। उन्होंने कहा कि इस वाकये ने हमारे वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अपनाई जाने वाली सुरक्षा व्यवस्थाओं और नियमों पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। यह वास्तव में एक अत्यंत दुखद और चिंताजनक घटना है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस चोरी की घटना के संबंध में स्थानीय पुलिस थाने में एक औपचारिक प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) भी दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और घटनास्थल का मुआयना किया है। इसके साथ ही, लापरवाही बरतने के आरोप में परीक्षा प्रभारी अधिकारी को भी कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। अब देखना होगा कि पुलिस और प्रशासनिक जांच में इस साजिश के पीछे छिपे असली चेहरों का खुलासा कब तक हो पाता है।
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