छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में मानसून की पहली बौछार पड़ते ही प्रकृति अपने अनमोल खजाने का पिटारा खोल देती है। इस सुहाने मौसम में बस्तर के घने जंगलों से मिलने वाली प्राकृतिक सौगातों की मांग बाजारों में काफी बढ़ जाती है। इन्हीं में से एक बेहद खास और लोकप्रिय सौगात है 'रान छाती', जिसे जंगली मशरूम भी कहा जाता है। बारिश के मौसम की शुरुआत के साथ ही बस्तर के स्थानीय बाजारों में इसकी आवक तेजी से बढ़ने लगती है। शहरी इलाकों में मिलने वाले कृत्रिम तरीके से उगाए गए बटन मशरूम की तुलना में यह जंगली मशरूम स्वाद और पोषण दोनों ही मामलों में बेहद लाजवाब और अनूठा माना जाता है। बस्तर के आदिवासी और स्थानीय निवासी इस मौसमी सब्जी को बेहद चाव से अपने भोजन में शामिल करते हैं।
प्राकृतिक खाद और पेड़ों की छांव में पनपती है रान छाती
रान छाती पूरी तरह से एक प्राकृतिक और जैविक सब्जी है, जिसे कृत्रिम रूप से नहीं उगाया जा सकता। यह बस्तर के घने और प्राचीन जंगलों में विशाल पेड़ों के नीचे अपने आप उगती है। पतझड़ के मौसम में पेड़ों से गिरने वाले पत्ते जब जमीन पर सड़ते हैं, तो उनसे एक प्राकृतिक और समृद्ध खाद तैयार होती है। मानसून की बारिश का पानी मिलते ही इसी प्राकृतिक खाद से यह औषधीय मशरूम बाहर निकलता है। क्योंकि इसमें किसी भी प्रकार के रासायनिक उर्वरक या कीटनाशक का उपयोग नहीं होता, इसलिए यह न केवल खाने में स्वादिष्ट होती है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी और पौष्टिक मानी जाती है।
कम मसालों और इमली के पानी का अनोखा स्वाद
बस्तर के पारंपरिक समाज में इस सब्जी को बनाने का तरीका बेहद सादा और प्राकृतिक रखा गया है। यहां के लोग भोजन के मूल स्वाद को बनाए रखने के लिए बहुत ही कम मसालों का उपयोग करते हैं। इस सब्जी को सूखी सब्जी की तरह या फिर रसेदार तरी वाली सब्जी के रूप में पकाया जाता है। इस पारंपरिक व्यंजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे पकाते समय इसमें इमली के पानी का उपयोग किया जाता है। इमली का यह खट्टा पानी रान छाती के प्राकृतिक स्वाद को संतुलित करता है और सब्जी को एक बेहतरीन खट्टा-चटपटा स्वाद प्रदान करता है, जिसे खाने के बाद लोग उंगलियां चाटते रह जाते हैं।
रान छाती की सब्जी बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
अगर आप भी बस्तर की इस पारंपरिक और स्वादिष्ट सब्जी का स्वाद अपने घर पर लेना चाहते हैं, तो आपको निम्नलिखित सामग्रियों की आवश्यकता होगी:
- रान छाती (जंगली मशरूम): 100 ग्राम
- प्याज: एक (कटा हुआ)
- टमाटर: दो (कटे हुए)
- हल्दी पाउडर: एक चौथाई (1/4) चम्मच
- लाल मिर्च पाउडर: एक चौथाई (1/4) चम्मच
- नमक: स्वादानुसार
- तेल: 10 मिलीलीटर
- इमली का पानी: थोड़ा सा (स्वादानुसार)
- पानी: आधा गिलास
सब्जी तैयार करने की आसान विधि
इस पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजन को बनाने की विधि बहुत ही सरल है। आप नीचे दिए गए चरणों का पालन करके इसे आसानी से तैयार कर सकते हैं:
- सबसे पहले एक कड़ाही लें और उसमें 10 मिलीलीटर तेल डालकर मध्यम आंच पर गर्म करें।
- जब तेल अच्छी तरह गर्म हो जाए, तो उसमें कटा हुआ प्याज डालें और उसे सुनहरा होने तक अच्छी तरह से भूनें।
- प्याज भूनने के बाद, कड़ाही में हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और स्वादानुसार नमक डालें। इन मसालों को धीमी आंच पर अच्छी तरह से पकाएं।
- मसाले अच्छी तरह पक जाने के बाद, कड़ाही में रान छाती (जंगली मशरूम) डालें। इसे मसालों के साथ अच्छी तरह मिलाएं और थोड़ी देर तक पकने दें।
- इसके बाद, कड़ाही में कटे हुए टमाटर डालें और सब्जी को अच्छी तरह पकने के लिए छोड़ दें।
- जब टमाटर अच्छी तरह पक जाएं, तब इसमें पहले से तैयार करके रखा हुआ थोड़ा सा इमली का पानी मिलाएं। यह सब्जी को एक अनोखा चटपटा स्वाद देगा।
- अब इसमें आधा गिलास पानी डालें और सब्जी को अच्छी तरह उबलने दें ताकि सभी मसालों और इमली का स्वाद मशरूम के भीतर तक समा जाए।
- सब्जी को कुछ मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें। जब सब्जी अच्छी तरह पक जाए, तो गैस बंद कर दें।
लीजिए, आपकी गरमा-गरम और स्वादिष्ट पारंपरिक रान छाती की सब्जी बनकर तैयार है। इस लाजवाब व्यंजन को आप गरमा-गरम रोटी या चावल के साथ परोस सकते हैं। मानसून के इस मौसम में इस सब्जी का स्वाद आपके पूरे परिवार को बेहद पसंद आएगा और वे आपकी तारीफ किए बिना नहीं रह पाएंगे।
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