भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराने सिंधु जल समझौते को लेकर तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। भारत द्वारा इस समझौते की समीक्षा करने और कड़ा रुख अपनाने के फैसले के बाद से पड़ोसी देश पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में भारी बौखलाहट देखने को मिल रही है। पाकिस्तान के हुक्मरान और राजनेता इस मुद्दे पर इतने घबरा गए हैं कि वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तर्कसंगत बात करने के बजाय सीधे परमाणु युद्ध की धमकियां देने पर उतर आए हैं। हाल ही में पाकिस्तान के पूर्व संघीय मंत्री खुर्रम दस्तगीर खान ने एक पाकिस्तानी समाचार चैनल पर लाइव आकर जिस तरह की बातें कीं, उसने पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान की कूटनीतिक अपरिपक्वता को उजागर कर दिया है। पूर्व मंत्री एक लाइव टीवी कार्यक्रम में परमाणु युद्ध जैसी भयानक विभीषिका को बेहद मजाकिया और गैर-जिम्मेदाराना तरीके से पेश करते नजर आए। जब कार्यक्रम के एंकर ने उनसे भारत के मजबूत दावों के खिलाफ पाकिस्तान के पास मौजूद कानूनी और व्यावहारिक तर्कों के बारे में पूछा, तो उनके पास कोई ठोस जवाब नहीं था और वे हमेशा की तरह 'परमाणु बम' का राग अलापने लगे।
लाइव टीवी डिबेट में कूटनीति का मखौल
दरअसल, पाकिस्तान के एक प्रमुख समाचार चैनल पर सिंधु जल समझौते को लेकर एक बेहद गंभीर चर्चा आयोजित की गई थी। इस डिबेट में मुख्य अतिथि के रूप में पाकिस्तान के पूर्व मंत्री खुर्रम दस्तगीर खान शामिल हुए थे। चर्चा के दौरान टीवी एंकर ने बेहद सीधा और संजीदा सवाल पूछा। एंकर ने कहा कि भारत पूरी दुनिया के सामने पुख्ता सबूतों, तथ्यों और मजबूत तर्कों के साथ यह स्पष्ट कर रहा है कि वह सिंधु जल समझौते को क्यों रद्द या संशोधित करना चाहता है। एंकर ने पूर्व मंत्री से पूछा कि क्या पाकिस्तान के पास भारत के इन तर्कों को काटने के लिए कोई मजबूत कानूनी या ऐतिहासिक तर्क मौजूद है?
इस सीधे सवाल का सामना करने के लिए खुर्रम दस्तगीर खान के पास कोई ठोस दस्तावेज या कूटनीतिक तर्क नहीं था। अपनी इस कमजोरी और बेइज्जती को छिपाने के लिए उन्होंने बात को घुमाना शुरू कर दिया। वे गंभीर चर्चा को छोड़कर सीधे परमाणु युद्ध की गीदड़भभकी देने पर आ गए, जो पाकिस्तानी नेताओं की पुरानी आदत रही है। हद तो तब हो गई जब वे लाइव शो के दौरान टीवी स्क्रीन पर दिखाई जा रही एक फर्जी AI द्वारा बनाई गई तस्वीर को असली समझ बैठे।
फर्जी AI ग्राफिक पर पूर्व मंत्री का गंभीर विश्लेषण
जिस समय यह लाइव डिबेट चल रही थी, स्क्रीन पर एक काल्पनिक और प्रतीकात्मक ग्राफिक चलाया जा रहा था। इस फर्जी AI तस्वीर में नदियों के पानी को बंद करने के लिए एक हाथ को पानी की नल की टोटी (टैप) घुमाते हुए दिखाया गया था। कोई भी सामान्य व्यक्ति समझ सकता था कि यह केवल एक प्रतीकात्मक ग्राफिक है, लेकिन पूर्व मंत्री दस्तगीर खान ने इस काल्पनिक तस्वीर को पूरी तरह सच मान लिया।
वे स्क्रीन की तरफ इशारा करते हुए बेहद गंभीर होकर बोलने लगे कि मान लीजिए यह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाथ है जो पानी की टोटी को बंद कर रहा है और वह पाकिस्तान को प्यासा तड़पाना चाहते हैं। इस पूरे ड्रामे में सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह रही कि टीवी एंकर ने भी इस बचकाने व्यवहार पर पूर्व मंत्री को टोकने या हंसने के बजाय उनका उत्साहवर्धन किया। एंकर ने बेहद जोश में आकर कहा कि हम ऐसा बिल्कुल नहीं होने दे सकते। इसके बाद यह गंभीर राजनीतिक डिबेट पूरी तरह से एक कॉमेडी शो में तब्दील हो गई।
'मिसाइल छूट गई तो छूट गई' - परमाणु हथियारों को बताया खिलौना
इसके बाद खुर्रम दस्तगीर खान ने जो बयान दिया, वह यह साबित करने के लिए काफी है कि पाकिस्तानी नेतृत्व किस कदर गैर-जिम्मेदार और दिमागी तौर पर खोखला हो चुका है। परमाणु हथियारों की संवेदनशीलता को पूरी तरह दरकिनार करते हुए उन्होंने बेहद बचकाना बयान दिया। कैमरे की तरफ सीधे देखते हुए पूर्व मंत्री ने कहा कि हम भारत के खिलाफ क्या कदम उठाने जा रहे हैं, इसका खुलासा हम सरेआम नहीं कर सकते।
उन्होंने अपनी पुरानी अंतरराष्ट्रीय यात्राओं का जिक्र करते हुए दावा किया कि जब वे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे और विदेशी दौरों पर थे, तब उन्होंने अमेरिका और लंदन के बेहद उच्च अधिकारियों के सामने यह बात साफ कर दी थी। दस्तगीर खान ने कहा कि मैंने उन विदेशी अधिकारियों से सीधे तौर पर कह दिया था कि अगर भारत ने हमारा पानी रोकने की कोशिश की, तो यह पूरी दुनिया का पहला ऐसा परमाणु युद्ध होगा जो केवल पानी के मुद्दे पर लड़ा जाएगा।
अपनी बात को और अधिक हास्यास्पद बनाते हुए उन्होंने आगे कहा कि हम दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसी देश हैं। हमारी भौगोलिक सीमाएं एक-दूसरे से इतनी सटी हुई हैं कि अगर कभी युद्ध जैसी स्थिति बनती है, तो किसी भी देश को सोचने, समझने या संभलने का मौका तक नहीं मिलेगा। पूर्व मंत्री ने अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना लहजे में कहा कि एक बार अगर मिसाइल लॉन्च हो गई, तो बस हो गई, फिर उसे बीच रास्ते में रोकना या नियंत्रित करना नामुमकिन होगा। उनके इस बयान से साफ जाहिर होता है कि वे परमाणु हथियारों को किसी बच्चों के खेल की तरह देख रहे हैं।
भारत का कड़ा रुख और पाकिस्तान की पुरानी आदतें
तथ्य यह है कि भारत अब पाकिस्तान की दोहरी नीति को और अधिक सहन करने के मूड में बिल्कुल नहीं है। भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि आतंकवाद और द्विपक्षीय बातचीत या समझौते एक साथ नहीं चल सकते। एक तरफ पाकिस्तान सीमा पार से कश्मीर में लगातार आतंकवादियों को भेजकर बेकसूर भारतीय नागरिकों का खून बहाता रहता है, और दूसरी तरफ वह यह उम्मीद करता है कि भारत सिंधु जल समझौते के तहत उसे बिना किसी रुकावट के पानी देता रहे। भारत अब इस एकतरफा व्यवस्था को बदलने के लिए पूरी तरह से कानूनी और कूटनीतिक रास्तों का इस्तेमाल कर रहा है।
जब पाकिस्तान को यह समझ आ गया है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों, ऐतिहासिक दस्तावेजों या तार्किक बहस के धरातल पर भारत का मुकाबला नहीं कर सकता, तो वह अपनी पुरानी और घिसी-पिटी रणनीति पर लौट आया है। वह दुनिया को परमाणु युद्ध का डर दिखाकर मध्यस्थता की भीख मांगना चाहता है। लेकिन पाकिस्तानी हुक्मरान शायद इस कड़वी हकीकत को भूल रहे हैं कि आज का पाकिस्तान आर्थिक रूप से पूरी तरह बदहाल है और दाने-दाने को तरस रहा है। ऐसे नाजुक वक्त में भारत जैसी महाशक्ति के खिलाफ परमाणु युद्ध की गीदड़भभकी देना पाकिस्तानी नेताओं के मानसिक खोखलेपन को दर्शाता है। टीवी स्टूडियो में बैठकर 'मिसाइल छूट गई तो छूट गई' जैसे जुमले उछालना भले ही उन्हें घरेलू दर्शकों के बीच सुर्खियां दिला दे, लेकिन वास्तविक दुनिया में ऐसी नासमझी उनके देश के अस्तित्व के लिए बेहद विनाशकारी साबित हो सकती है।
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