हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में एक बेहद संवेदनशील मामले में न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस का शिकंजा कस गया है। क्षेत्रीय अस्पताल में प्रसव के बाद हुई मंजू शर्मा की दुखद मौत के मामले में शहर में जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ था। अब इस पूरे आंदोलन की अगुवाई करने वाले दो प्रमुख चेहरों, बंटी सराजी और संजय चौहान के खिलाफ पुलिस प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कुल्लू पुलिस ने कानून व्यवस्था बिगाड़ने और अन्य गंभीर आरोपों में इन दोनों प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। यह कदम क्षेत्र में काफी चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने इस कार्रवाई को न्याय मांगने के बदले मिला 'इनाम' बताया है।
एफआईआर की विस्तृत जानकारी और कानूनी धाराएं
पुलिस से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कुल्लू के सदर पुलिस थाने में 1 जुलाई को शाम ठीक 7:42 बजे यह एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता हीरा लाल बोध द्वारा दी गई लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने यह कदम उठाया है। पुलिस ने बंटी सराजी और संजय चौहान पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इन दोनों के खिलाफ दर्ज मामले में निम्नलिखित धाराओं को शामिल किया गया है:
- धारा 132: सरकारी काम में बाधा डालने और लोक सेवक को अपने कर्तव्य से रोकने के लिए बल प्रयोग करने से संबंधित।
- धारा 189(1): गैर-कानूनी तरीके से एकत्र होने और शांति व्यवस्था को प्रभावित करने की आशंका से जुड़ी।
- धारा 191(2): दंगा भड़काने या उसमें सक्रिय रूप से भागीदार होने के संबंध में।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और कानून के दायरे में रहकर इस मामले की गहनता से जांच शुरू कर दी गई है।
आंदोलनकारियों ने सोशल मीडिया पर दी तीखी प्रतिक्रिया
मुकदमा दर्ज होने के बाद दोनों प्रदर्शनकारियों ने पीछे हटने के बजाय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आकर अपनी बात रखी है और प्रशासन व सरकार पर तीखा तंज कसा है। बंटी सराजी ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एफआईआर की कॉपी साझा करते हुए लिखा है, "हिमाचल सरकार का बहुत-बहुत आभार। मंजू शर्मा जैसी बहनों को इंसाफ दिलाने के लिए संघर्ष करने का हमें यह बेहतरीन इनाम मिला है। हमारी आवाज दबाने के लिए दर्ज हुई यह एफआईआर हमें और हमारे छोटे भाई संजय चौहान को समर्पित है। धन्यवाद पुलिस प्रशासन और धन्यवाद स्वास्थ्य मंत्री। सत्यमेव जयते।"
दूसरी तरफ, संजय चौहान ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो साझा करके अपना रुख स्पष्ट किया है। संजय ने कहा कि पुलिस ने उन दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। वीडियो में उन्होंने स्पष्ट रूप से अपनी बात रखते हुए कहा:
"हमारा विरोध हिमाचल प्रदेश के सभी डॉक्टरों या स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ बिल्कुल नहीं था। हमारी लड़ाई केवल उस एक महिला डॉक्टर और दो नर्सों के संवेदनहीन रवैये के खिलाफ थी, जिनकी लापरवाही से एक हंसती-खेलती महिला की जान चली गई। हमने विरोध के दौरान कोई तोड़फोड़ नहीं की है और न ही किसी डॉक्टर को डराया या धमकाया है। हमारी मांग केवल न्याय की थी और इसके लिए हम आवाज उठाते रहेंगे।"
इसके साथ ही संजय चौहान ने यह भी बताया कि इससे पहले सैंज क्षेत्र में हुए एक अन्य मामले में भी उन पर मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।
क्या था मंजू शर्मा की मौत का पूरा मामला?
इस पूरे बड़े विवाद की शुरुआत मंडी जिले के बालीचौकी क्षेत्र की रहने वाली मंजू शर्मा (जिन्हें रजनी शर्मा भी पुकारा जाता था) की मौत के बाद हुई थी। मंजू को कुल्लू के क्षेत्रीय अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 21 जून को प्रसव के बाद उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया। हालांकि, प्रसव के कुछ समय बाद ही मंजू की हालत बिगड़ गई और उनकी मृत्यु हो गई। मृतका के परिजनों और स्थानीय लोगों का गंभीर आरोप है कि अस्पताल की ड्यूटी पर तैनात महिला डॉक्टर और दो नर्सों ने मंजू के साथ बेहद संवेदनहीन और बुरा व्यवहार किया, जिससे उन्हें समय पर उचित उपचार नहीं मिल पाया।
इस घटना से आक्रोशित होकर लोगों ने 29 जून और 30 जून को अस्पताल परिसर के बाहर भारी विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के बढ़ते दबाव को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने आरोपी डॉक्टर और एक नर्स को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया था। हालांकि, इस निलंबन के विरोध में कुल्लू के डॉक्टरों ने भी एकजुटता दिखाई। डॉक्टरों ने जिला कलेक्टर (डीसी) के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा था और डॉक्टरों की सुरक्षा की मांग को लेकर 1 जुलाई को अस्पताल में विरोध भी दर्ज कराया था।
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