धान और गेहूं की पारंपरिक खेती छोड़ अपनाएं लेमनग्रास, 1 एकड़ जमीन से होगी 15 लाख रुपये की बंपर कमाई; खूंटी के किसान ने बताया पूरा गणित

झारखंड के खूंटी जिले में बड़े पैमाने पर लेमनग्रास जैसी सुगंधित फसलों की खेती हो रही है, जिससे किसान पारंपरिक फसलों के मुकाबले कई गुना अधिक मुनाफा कमा रहे हैं।

झारखंड के खूंटी में सुगंधित खेती की धूम, पारंपरिक फसलों से बढ़ी दूरी

झारखंड के खूंटी जिले में इन दिनों कृषि के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। यहां के प्रगतिशील किसान अब पारंपरिक धान और गेहूं की खेती को छोड़कर सुगंधित पौधों यानी एरोमेटिक फार्मिंग की तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। इस नए कृषि आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं खूंटी के सफल किसान इंद्र भूषण, जो बड़े पैमाने पर इस तरह की सुगंधित फसलों की खेती कर रहे हैं। वर्तमान समय में इस पूरे क्षेत्र के लगभग 120 एकड़ से अधिक के भू-भाग पर लेमनग्रास, रोजमेरी और टी ट्री जैसी उच्च मूल्य वाली सुगंधित फसलों की खेती की जा रही है।

इस आधुनिक खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके खरीदारों की बाजार में हमेशा होड़ मची रहती है। देश की बड़ी-बड़ी परफ्यूम और अरोमा बनाने वाली कंपनियां इन फसलों और इनसे निकलने वाले तेल की पहले से ही एडवांस बुकिंग कर लेती हैं। इससे किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए दूर-दराज की मंडियों के चक्कर नहीं काटने पड़ते और उन्हें अपने ही क्षेत्र में उत्पाद का बेहतरीन दाम मिल जाता है।

1 एकड़ से 15 लाख रुपये का पूरा गणित

इस सुगंधित खेती से होने वाली शानदार कमाई के बारे में विस्तार से बताते हुए किसान इंद्र भूषण कहते हैं कि अगर किसी किसान के पास सिर्फ 1 एकड़ की सीमित जमीन भी उपलब्ध है, तो भी वह इस क्षेत्र में कदम रख सकता है और सालाना करीब 15 लाख रुपये तक की मोटी कमाई कर सकता है। उन्होंने इसके पीछे का पूरा गणित और उत्पादन का तरीका कुछ इस तरह समझाया है:

  • पौधों का रोपण: एक एकड़ की कृषि भूमि पर लेमनग्रास के कम से कम 15000 पौधे बेहद आसानी से रोपे जा सकते हैं।
  • तेल उत्पादन की मात्रा: फसल तैयार होने के बाद, प्रत्येक 1000 पौधे से लगभग 100 लीटर सुगंधित तेल प्राप्त किया जा सकता है। इस प्रकार, पूरे 15000 पौधों से कुल मिलाकर 1500 लीटर तेल बहुत ही आसानी से निकाला जा सकता है।
  • बाजार का मूल्य: आज के समय में खुले बाजार में 1 किलोग्राम शुद्ध लेमनग्रास तेल की कीमत ₹1000 से लेकर ₹2000 के बीच बनी रहती है।
  • सालाना शुद्ध मुनाफा: यदि हम बाजार का न्यूनतम भाव यानी केवल ₹1000 प्रति लीटर भी मानकर चलें, तो 1500 लीटर तेल बेचकर कोई भी किसान सालाना ₹15,00,000 का बंपर मुनाफा बेहद आसानी से प्राप्त कर सकता है।

कम सिंचाई और कम रखरखाव में अधिक पैदावार

पारंपरिक धान और गेहूं की फसलों की तुलना में लेमनग्रास की खेती में मेहनत और पानी की खपत बहुत ही कम होती है। धान जैसी फसलों के लिए जहां खेतों में लगातार पानी जमा रखने की जरूरत होती है और भारी सिंचाई करनी पड़ती है, वहीं लेमनग्रास की फसल इसके बिल्कुल विपरीत है। किसान इंद्र भूषण के मुताबिक, इस पौधे को बहुत अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती है।

यदि आपके खेतों में बहुत अधिक पानी का ठहराव नहीं होता है या आपके क्षेत्र में औसत से कम बारिश होती है, तो भी इस फसल के विकास पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है। इस फसल की सिंचाई के लिए दिन में केवल एक बार पानी देना ही पर्याप्त माना गया है। हालांकि, एक बात का विशेष ध्यान रखना पड़ता है कि इसकी बुआई करते समय मिट्टी की पोषण क्षमता बढ़ाने के लिए ऑर्गेनिक खाद यानी जैविक खाद का प्रचुर मात्रा में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

परफ्यूम और कॉस्मेटिक कंपनियों से सीधा करार, विपणन का कोई झंझट नहीं

इस खेती का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसका बाजार पूरी तरह सुरक्षित है। किसान इंद्र भूषण बताते हैं कि देश और दुनिया की बड़ी-बड़ी परफ्यूम, साबुन, सौंदर्य उत्पाद और अरोमा बनाने वाली कंपनियां सीधे उत्पादक किसानों के पास आकर सारा माल उठा लेती हैं।

यदि आप इस फसल से तेल निकालने की प्रक्रिया पूरी कर लेते हैं, तो इसे बेचने के लिए आपको किसी भी बिचौलिए के पास जाने की आवश्यकता नहीं होगी। देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले व्यापारी शुद्ध और असली तेल खरीदने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। यही वजह है कि इसके विपणन या मार्केटिंग के लिए किसानों को किसी भी तरह की अतिरिक्त भागदौड़ या मानसिक तनाव का सामना नहीं करना पड़ता है और सारा व्यापार बहुत ही पारदर्शी तरीके से सीधे खेत से ही हो जाता है।

https://hindi.news18.com/news/agriculture/lemongrass-aromatic-farming-in-khunti-gives-farmers-annual-income-of-15-lakh-local18-ws-l-10620542.html