भारत के बड़े हिस्से में भीषण गर्मी और उमस से बेहाल लोगों के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आ रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के मौसम को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम विभाग की ओर से जारी ताजा अपडेट के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों यानी दिल्ली-NCR सहित देश के 16 राज्यों में भारी बारिश, तेज आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने का गंभीर अलर्ट जारी किया गया है। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे विशाल राज्यों में आगामी 5 जुलाई तक मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी रहने की प्रबल संभावना जताई गई है, जिससे जनजीवन काफी प्रभावित हो सकता है।
इसके साथ ही, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी राज्यों में मौसम के इस बदले मिजाज के कारण भूस्खलन यानी लैंडस्लाइड का खतरा अत्यधिक बढ़ गया है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में यात्रा करने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। दूसरी तरफ, देश के पश्चिमी हिस्से में स्थित महाराष्ट्र, मुंबई और गुजरात के साथ-साथ पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण भारतीय राज्यों में भी मानसूनी गतिविधियों के तेजी से आगे बढ़ने के कारण भारी वर्षा का दौर लगातार जारी रहने का अनुमान है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको देश के सभी प्रमुख राज्यों और उनके जिलों में मौसम के मिजाज और प्रशासनिक तैयारियों की पूरी जानकारी देने जा रहे हैं।
मानसून की दस्तक से बदला देश का मिजाज: गर्मी से बड़ी राहत की उम्मीद
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा आंकड़ों और उपग्रह चित्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर भारत में मानसून अब बेहद तेजी से सक्रिय हो रहा है। पिछले कई हफ्तों से भीषण लू और अत्यधिक तापमान की मार झेल रहे उत्तर भारतीय राज्यों के लिए यह राहत की बयार बनकर आया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान के कई इलाकों में जहां मानसूनी फुहारें और भारी बारिश पहले ही शुरू हो चुकी है, वहीं पंजाब और हरियाणा में भी बादलों का सघन डेरा जमने लगा है। मौसम विज्ञानियों का मानना है कि अगले कुछ दिनों में समूचे उत्तर भारत के अधिकतम तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी, जिससे लोगों को चिपचिपी उमस और लू के प्रकोप से पूरी तरह छुटकारा मिल जाएगा।
मौसम के इस व्यापक बदलाव के पीछे कई भौगोलिक कारक काम कर रहे हैं। वर्तमान समय में बंगाल की खाड़ी में एक मजबूत चक्रवाती परिसंचरण यानी साइक्लोनिक सर्कुलेशन विकसित हो रहा है। इसके साथ ही, भारत के पश्चिमी तट पर भी एक सक्रिय वेदर सिस्टम यानी मौसम प्रणाली काम कर रही है। इन दोनों प्रणालियों के आपस में मिलने से मानसूनी हवाओं को भारी मात्रा में नमी मिल रही है, जिससे देश के कई हिस्सों में तेज हवाओं, बिजली कड़कने और भारी मूसलाधार बारिश की परिस्थितियां अनुकूल हो गई हैं। तटीय क्षेत्रों और नदियों के किनारे बसे इलाकों में प्रशासन ने मछुआरों और स्थानीय आबादी को नदी और समुद्र के पास न जाने की कड़ी हिदायत जारी की है।
दिल्ली-NCR में मौसम का हाल: धूल भरी आंधी और तेज बौछारों की तैयारी
देश की राजधानी दिल्ली और उसके पड़ोसी इलाकों जैसे नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के निवासी पिछले कई दिनों से जिस सुहाने मौसम और बारिश की आस लगाए बैठे थे, उनका वह लंबा इंतजार अब समाप्त होने जा रहा है। दिल्ली के आसमान में पिछले कुछ समय से लगातार गहरे बादलों की आवाजाही जारी है। हवा में मौजूद उमस और बीच-बीच में चलने वाली ठंडी हवाएं इस बात का स्पष्ट संकेत दे रही हैं कि मानसून ने दिल्ली के मुहाने पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा दी है।
मौसम विभाग का अनुमान है कि आज यानी 2 जुलाई को दिल्ली-NCR के अधिकांश इलाकों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश और तेज आंधी का दौर शुरू हो सकता है। इस दौरान मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि:
- दिल्ली-NCR के कई क्षेत्रों में हवाओं की गति 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जो कमजोर ढांचों और पेड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है।
- इस अवधि में दिल्ली का अधिकतम तापमान लगभग 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है।
- भारी और लगातार होने वाली बारिश के कारण दिल्ली के कई निचले इलाकों में गंभीर जलभराव यानी वॉटरलॉगिंग की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।
इसके अतिरिक्त, दिल्ली नगर निगम और स्थानीय प्रशासन को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि जलभराव की स्थिति में पंपों के जरिए पानी की निकासी तुरंत की जा सके और सड़कों पर वाहनों की आवाजाही सामान्य बनी रहे।
उत्तर प्रदेश में आसमान से बरसेगी आफत: 5 जुलाई तक इन जिलों में चेतावनी
उत्तर प्रदेश के मौसम में भी मानसूनी गतिविधियां पूरी तरह से हावी हो चुकी हैं। मौसम विभाग ने राज्य में 2 जुलाई से लेकर 5 जुलाई तक की अवधि के लिए अत्यंत भारी बारिश और तूफानी हवाओं का अलर्ट जारी किया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश तक, मानसून का असर व्यापक रूप से देखने को मिलेगा। इस दौरान मेरठ, सहारनपुर, आगरा, कानपुर, प्रयागराज, आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर, मिर्जापुर और सोनभद्र सहित उत्तर प्रदेश के कई जिलों में 75 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार होने वाली इस बारिश से जहां तापमान में उल्लेखनीय कमी आएगी और लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर वज्रपात की घटनाओं में वृद्धि हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सलाह दी गई है कि वे खराब मौसम के दौरान खेतों में काम करने से बचें और पक्के मकानों की शरण लें। राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने भी सभी जिलाधिकारियों को मुस्तैद रहने और किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश जारी किए हैं।
बिहार में मानसून का रौद्र रूप: वज्रपात और भारी बारिश को लेकर विशेष सतर्कता
बिहार में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह से सक्रिय और आक्रामक मुद्रा में आ चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के कई हिस्सों में भारी से अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। बिहार के लिए आगामी 5 जुलाई तक का समय बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। मौसम विभाग द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सिवान, सारण, पटना, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, सहरसा, सुपौल, दरभंगा, समस्तीपुर और मधुबनी सहित बिहार के एक बड़े हिस्से में भारी वर्षा और बिजली गिरने की प्रबल आशंका है।
इस मौसम के दौरान इन प्रभावित जिलों में हवाओं की रफ्तार 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की उम्मीद है। बिहार के संदर्भ में सबसे बड़ी चिंता आकाशीय बिजली गिरने से होने वाले जान-माल के नुकसान को लेकर है। चूंकि इस समय धान की रोपाई का काम चल रहा है, इसलिए खेतों में काम करने वाले किसानों को विशेष रूप से सचेत रहने की आवश्यकता है। मौसम विभाग ने सलाह दी है कि जब भी आसमान में बिजली कड़के, लोग तुरंत किसी सुरक्षित और पक्के ढांचे के नीचे चले जाएं और भूलकर भी किसी पेड़ या बिजली के खंभे का सहारा न लें। इस दौरान राज्य की राजधानी पटना में अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है, जिससे मौसम सुहावना बना रहेगा।
राजस्थान के मरुस्थल में भी बरसेगा पानी: धूल भरी आंधी के साथ मूसलाधार बारिश का अनुमान
राजस्थान जैसे शुष्क राज्य में भी मौसम का मिजाज अब पूरी तरह से बदलने जा रहा है। पिछले लंबे समय से झुलसाने वाली गर्मी और भीषण उमस का सामना कर रहे राजस्थान के लोगों के लिए राहत के दिन शुरू हो गए हैं। मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों के लिए 2 जुलाई से 4 जुलाई तक भारी बारिश और तेज आंधी-तूफान की चेतावनी जारी की है। इस मानसूनी वेदर सिस्टम का प्रभाव राजस्थान के पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में व्यापक रूप से देखने को मिलेगा।
विभाग के अनुसार, चुरू, अलवर, उदयपुर, अजमेर, धौलपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, भरतपुर, दौसा, faloदी और जयपुर समेत कई जिलों में इस अवधि के दौरान 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से आंधी चलने और मूसलाधार बारिश होने की संभावना है। पूर्वी राजस्थान के कई हिस्सों में बहुत अच्छी बारिश दर्ज की जा सकती है, जबकि पश्चिमी राजस्थान के रेतीले इलाकों में भी बादलों की गर्जना और बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी। इस दौरान जयपुर का अधिकतम तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है। स्थानीय प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे आंधी और बारिश के समय पुराने और जर्जर मकानों, पेड़ों और बिजली के तारों के नीचे खड़े होने से बचें।
मध्य प्रदेश में गहराया बादलों का डेरा: तेज हवाओं के साथ जोरदार बौछारें
मध्य भारत के सबसे बड़े राज्य मध्य प्रदेश में भी मानसून अपनी पूरी गति पकड़ चुका है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में घने बादलों का डेरा है और कई इलाकों में रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला शुरू हो चुका है। मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों जैसे विदिशा, रायसेन, छिंदवाड़ा, इंदौर, बालाघाट, सिवनी, मुरैना और उनके आसपास के ग्रामीण इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
मौसम विभाग के अनुसार, इन क्षेत्रों में वर्षा के दौरान हवा की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक दर्ज की जा सकती है। राजधानी भोपाल में अधिकतम तापमान गिरकर 29 डिग्री सेल्सियस तक आने का अनुमान है, जिससे मौसम बेहद सुहावना और ठंडा हो जाएगा। हालांकि, लगातार और भारी बारिश के कारण राज्य के नदी-नालों और जलाशयों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। इसे देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों में अलर्ट घोषित कर दिया है और लोगों को जलभराव वाले क्षेत्रों तथा उफनती नदियों को पार न करने की सख्त हिदायत दी है। आपातकालीन सेवाओं को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी तरह की बाढ़ जैसी स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
पंजाब और हरियाणा में राहत के साथ आफत: किसानों और आम जनता के लिए परामर्श
पंजाब और हरियाणा में भी मानसून के पैर पसारने के साथ ही मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। दोनों राज्यों के कई हिस्सों में घने बादलों की आवाजाही के साथ बारिश की गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। मौसम विभाग ने पटियाला, अमृतसर, जालंधर, बठिंडा, फरीदकोट, फाजिल्का, फिरोजपुर और गुरदासपुर सहित कई प्रमुख जिलों में भारी वर्षा और तेज आंधी का अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका व्यक्त की गई है।
इस बारिश से तापमान में बड़ी गिरावट दर्ज की जाएगी, जिससे पिछले कई दिनों से जारी भीषण और असहनीय गर्मी से आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, इस राहत के साथ कुछ चुनौतियां भी खड़ी हो सकती हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि:
- तेज बारिश के कारण निचले और शहरी इलाकों में जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है, जिससे सड़कों पर भारी ट्रैफिक जाम लग सकता है।
- तेज आंधी और बारिश के कारण बिजली के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका है।
- किसानों को विशेष रूप से सलाह दी गई है कि वे मौसम की इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखें। खेतों में पानी के ठहराव को रोकने के लिए जल निकासी यानी ड्रेनेज की उचित व्यवस्था पहले से ही सुनिश्चित कर लें ताकि फसलों को कोई नुकसान न पहुंचे।
पहाड़ी इलाकों में भारी तबाही की आशंका: भूस्खलन और जलभराव का बढ़ा खतरा
उत्तर भारत के पहाड़ी राज्य इस समय मानसून की सबसे बड़ी मार झेलने की कगार पर हैं। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही बारिश के कारण भूस्खलन यानी लैंडस्लाइड और अचानक आने वाली बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड का खतरा चरम पर पहुंच गया है। इन राज्यों के पहाड़ी मार्गों पर सफर करना इस समय बेहद जोखिम भरा साबित हो सकता है।
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा को लेकर विशेष सावधानी
उत्तराखंड में मानसून का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने बागेश्वर, पौड़ी गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल, नैनीताल, हरिद्वार और ऋषिकेश सहित कई पहाड़ी और मैदानी जिलों में भारी बारिश, तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया है। इन पहाड़ी क्षेत्रों में हवा की गति 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की आशंका है। देहरादून का अधिकतम तापमान करीब 29 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान लगाया गया है। प्रशासन ने चारधाम यात्रा पर आ रहे श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट देखने और स्थानीय प्रशासन से मार्ग की स्थिति की पुष्टि करने के बाद ही अपनी यात्रा शुरू करें। लगातार बारिश के कारण चट्टानें खिसकने और पहाड़ी सड़कें अवरुद्ध होने का खतरा बहुत ज्यादा है।
हिमाचल प्रदेश में पर्यटकों के लिए कड़ा परामर्श
हिमाचल प्रदेश में भी अगले दो से तीन दिनों तक मौसम का मिजाज बेहद खराब रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने कांगड़ा, मंडी, शिमला, कुल्लू, किन्नौर, सिरमौर और ऊना सहित कई प्रमुख जिलों के लिए भारी बारिश का येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इस दौरान इन इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मनाली का अधिकतम तापमान गिरकर लगभग 14 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है, जिससे वहां कड़ाके की ठंड का अहसास होने लगा है। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को नदी-नालों, झरनों और संवेदनशील पहाड़ी ढलानों के करीब न जाने की सख्त सलाह दी है क्योंकि अचानक बाढ़ और भूस्खलन से सड़कें बंद हो सकती हैं।
जम्मू-कश्मीर में मौसम का अलर्ट और मार्ग सुरक्षा
जम्मू-कश्मीर में भी 2026 की इस मानसूनी अवधि में 2 जुलाई से 5 जुलाई तक कई इलाकों में भारी बारिश और आंधी-तूफान की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार, जम्मू, कठुआ, डोडा, कुलगाम, किश्तवाड़ और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों में 70 से 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं। श्रीनगर का अधिकतम तापमान इस दौरान करीब 28 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। ऊंचाई वाले और संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में यात्रा कर रहे लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने के लिए कहा गया है। भारी बारिश के चलते राष्ट्रीय राजमार्गों और लिंक रोड पर भूस्खलन होने की आशंका बनी हुई है, जिससे यातायात व्यवस्था बाधित हो सकती है।
महाराष्ट्र और मायानगरी मुंबई में बारिश का कहर: थमी नहीं रफ्तार
पश्चिमी भारत के सबसे महत्वपूर्ण राज्य महाराष्ट्र में मानसून इस समय अपने पूरे शबाब पर है। मौसम विभाग (IMD) ने मुंबई, पुणे, नागपुर, अकोला, अमरावती, बुलढाणा, चंद्रपुर, गढ़चिरौली और अहमदनगर समेत कई जिलों में भारी से अत्यंत भारी बारिश की गंभीर चेतावनी जारी की है। निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट ने भी महाराष्ट्र और गुजरात के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक लगातार मूसलाधार बारिश का अनुमान जताया है।
मायानगरी मुंबई की बात करें तो पिछले 24 घंटों के दौरान शहर के कई इलाकों में 100 मिलीमीटर से भी अधिक भारी बारिश दर्ज की गई है। इस भारी वर्षा के कारण अंधेरी सबवे सहित मुंबई के कई निचले और संवेदनशील इलाकों में घुटनों तक पानी भर गया, जिससे स्थानीय लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और स्थानीय प्रशासन की टीमें सड़कों पर उतरकर पानी की निकासी के काम में लगी हुई हैं। भारी जलभराव के कारण कुछ स्थानों पर मध्य और पश्चिमी रेलवे की सेवाएं आंशिक रूप से प्रभावित हुईं, हालांकि बेस्ट (BEST) बस सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहीं। मौसम विभाग का अनुमान है कि 3 से 5 जुलाई के बीच महाराष्ट्र के तटीय और मध्य हिस्सों में मूसलाधार से लेकर अत्यंत भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है।
पूर्वोत्तर भारत में मंडराया बाढ़ का संकट: नदियां उफान पर
देश के पूर्वोत्तर हिस्से में मानसून काफी पहले से ही पूरी तरह से सक्रिय है और वहां लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, naगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और सिक्किम में अगले कई दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका बनी हुई है।
मौसम विज्ञानियों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में बने मजबूत चक्रवाती सिस्टम का सीधा असर इन पूर्वोत्तर राज्यों पर पड़ रहा है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे कई निचले इलाकों में बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। स्थानीय प्रशासन और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल यानी SDRF की टीमें संवेदनशील और प्रभावित क्षेत्रों में लगातार नजर बनाए हुए हैं और बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम कर रही हैं।
दक्षिण भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता: मछुआरों के लिए रेड अलर्ट
भारत के दक्षिणी प्रायद्वीपीय हिस्से में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी मजबूती के साथ सक्रिय बना हुआ है। मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट और मौसम विभाग के अनुसार, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में अगले कुछ दिनों तक मध्यम से लेकर अत्यधिक भारी बारिश होने की पूरी संभावना है।
विशेष रूप से पश्चिमी घाट के पर्वतीय और तटीय इलाकों में वर्षा का दौर बेहद तीव्र रहने का अनुमान है। इस लगातार हो रही बारिश से कृषि कार्यों को भारी लाभ मिलने की उम्मीद है, लेकिन तटीय क्षेत्रों में जलभराव और कुछ पहाड़ी हिस्सों में भूस्खलन की आशंका भी बढ़ गई है। समुद्र में उठने वाली ऊंची और खतरनाक लहरों को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी है और तटीय सुरक्षा बलों को अलर्ट पर रहने को कहा है।
देश के मौसम से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण सवाल और उनके जवाब
सवाल 1: दिल्ली-NCR में मानसून की बारिश कब से शुरू होगी और इसका जनजीवन पर कितना असर रहेगा?
जवाब: भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दिल्ली-NCR में आज यानी 2 जुलाई से मानसूनी गतिविधियां काफी तेज होने की पूरी संभावना है। राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश और तेज आंधी आने का अनुमान है। इस दौरान हवा की रफ्तार 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। इस बारिश के कारण जहां पिछले कई दिनों से जारी उमस और भीषण गर्मी से लोगों को राहत मिलेगी और तापमान में गिरावट आएगी, वहीं दिल्ली के निचले इलाकों में जलभराव, सड़कों पर ट्रैफिक जाम और बिजली आपूर्ति बाधित होने जैसी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम में सुरक्षित स्थानों पर रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
सवाल 2: उत्तर प्रदेश और बिहार में सबसे ज्यादा खतरा किन जिलों को है और वहां क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
जवाब: उत्तर प्रदेश में 5 जुलाई तक मेरठ, सहारनपुर, आगरा, कानपुर, प्रयागराज, आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर, मिर्जापुर और सोनभद्र जैसे जिलों में भारी बारिश और 75 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं बिहार में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सिवान, सारण, पटना, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, सहरसा, सुपौल, दरभंगा, समस्तीपुर और मधुबनी जिलों में भारी बारिश के साथ वज्रपात यानी आकाशीय बिजली का भारी खतरा है। इन राज्यों में रहने वाले लोगों को सलाह दी गई है कि वे आकाशीय बिजली चमकने के दौरान खुले खेतों, पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे बिल्कुल न जाएं। किसानों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और मौसम विभाग के अपडेट का पालन करने की हिदायत दी गई है।
सवाल 3: पहाड़ी राज्यों में मौसम को लेकर इस समय सबसे बड़ी चिंता क्या बनी हुई है?
जवाब: उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी राज्यों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण इस समय सबसे बड़ी चिंता भूस्खलन (लैंडस्लाइड), चट्टानें खिसकने और अचानक आने वाली बाढ़ (फ्लैश फ्लड) की है। पहाड़ी नदियों और स्थानीय नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। प्रशासन ने चारधाम यात्रा, अमरनाथ यात्रा और अन्य पहाड़ी पर्यटन स्थलों पर जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से अपील की है कि वे मौसम की सटीक जानकारी लेने के बाद ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं और भारी बारिश के दौरान संवेदनशील पर्वतीय रास्तों पर सफर करने से पूरी तरह बचें।
सवाल 4: महाराष्ट्र और मुंबई में बारिश को लेकर वर्तमान में क्या स्थिति है और आगे क्या अनुमान है?
जवाब: महाराष्ट्र में मानसून पूरी ताकत के साथ सक्रिय है। मायानगरी मुंबई में पिछले 24 घंटों में 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है, जिसके चलते अंधेरी सबवे जैसे निचले इलाकों में भारी जलभराव हुआ और यातायात प्रभावित हुआ। मुंबई के अलावा पुणे, नागपुर, अकोला, अमरावती, चंद्रपुर और अहमदनगर जिलों में भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, 3 से 5 जुलाई के बीच राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी से अत्यंत भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। स्थानीय प्रशासन और BMC स्थिति पर बारीक नजर रखे हुए हैं और लोगों को समुद्र तटों से दूर रहने की चेतावनी दी गई है ताकि किसी अनहोनी से बचा जा सके।
सवाल 5: देशभर में अचानक मौसम के इस बड़े और व्यापक बदलाव के पीछे मुख्य वैज्ञानिक कारण क्या हैं?
जवाब: मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय देश के मौसम में आए इतने बड़े बदलाव के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े वेदर सिस्टम काम कर रहे हैं। पहला सिस्टम बंगाल की खाड़ी में बना एक मजबूत चक्रवाती परिसंचरण यानी साइक्लोनिक सर्कुलेशन है, जो देश के पूर्वी और मध्य हिस्सों में नमी से भरी हवाएं भेज रहा है। दूसरा सिस्टम भारत के पश्चिमी तट पर सक्रिय है, जिससे अरब सागर से आने वाली नम हवाएं तीव्र हो गई हैं। इन दोनों प्रणालियों के आपस में मिलने और दक्षिण-पश्चिम मानसून की तीव्र प्रगति के कारण उत्तर, पश्चिम, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के अधिकांश राज्यों में भारी बारिश की अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं, जिससे पूरे देश में एक साथ मौसम का मिजाज बदल गया है।
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