दिल्ली में 8.1 किलोमीटर लंबी अत्याधुनिक टनल
केंद्र सरकार ने देश में सड़क और परिवहन नेटवर्क को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में एक बड़ा निर्णय लिया है। हाल ही में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में दिल्ली और उत्तर प्रदेश के लिए दो महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर मुहर लगाई गई है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि दिल्ली में द्वारका एक्सप्रेसवे को नेल्सन मंडेला मार्ग से जोड़ने के लिए 8.1 किलोमीटर लंबी 6-लेन की एक हाईटेक टनल का निर्माण किया जाएगा। इस विशाल परियोजना की कुल लागत लगभग 6,969.67 करोड़ रुपये तय की गई है। यह टनल शिव मूर्ति इंटरचेंज से शुरू होकर वसंत कुंज, नेल्सन मंडेला मार्ग होते हुए बारापुला ड्रेन के निकट बने एलिवेटेड कॉरिडोर के जरिए डीएनडी फ्लाईवे तक जाएगी। इससे दक्षिण और पश्चिम दिल्ली के बीच यातायात में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा और लोगों को जाम से बड़ी राहत मिलेगी।
पर्यावरण का रखा जाएगा खास ख्याल
सरकार ने इस परियोजना के दौरान पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया है। यह टनल दिल्ली रिज के नीचे से होकर गुजरेगी, जिसे दिल्ली का 'फेफड़ा' कहा जाता है। निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरण को किसी भी प्रकार की हानि न पहुंचे, इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा ताकि प्रकृति के संतुलन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
उत्तर प्रदेश में नया एक्सेस कंट्रोल हाईवे
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश में कानपुर से कबरई तक राष्ट्रीय राजमार्ग-34 के अंतर्गत 117.7 किलोमीटर लंबे 4/6 लेन एक्सेस कंट्रोल हाईवे के निर्माण को भी स्वीकृति दी है। इस प्रोजेक्ट पर कुल 7,145.14 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की जाएगी। यह राजमार्ग कानपुर, हमीरपुर और महोबा जिलों के निवासियों के लिए जीवन रेखा साबित होगा। इसे एक्सप्रेसवे की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है और इसे BOT मॉडल के जरिए लगभग ढाई साल की अवधि में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में कानपुर से कबरई की यात्रा पूरी करने में 3.5 घंटे का समय लगता है, लेकिन इस नए मार्ग के तैयार होने के बाद यह समय घटकर मात्र 1.5 घंटे रह जाएगा, जिससे ईंधन की भारी बचत होगी।
बुंदेलखंड के विकास को मिलेगी नई गति
यह हाईवे बुंदेलखंड क्षेत्र के औद्योगिक और आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगा। इस नई कनेक्टिविटी से डिफेंस कॉरिडोर और विभिन्न मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को बड़ी मदद मिलेगी, जिससे क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और निवेश बढ़ेगा। सरकार का उद्देश्य भारत को वर्ष 2047 की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना है और यह मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
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