ईरान के साथ बातचीत और ट्रंप का रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक प्रेस वार्ता के दौरान संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ चल रहा मौजूदा संघर्ष बहुत जल्द अपने अंजाम तक पहुंच जाएगा। देश की घरेलू और वैश्विक ऊर्जा कीमतों के संदर्भ में पूछे गए सवालों के जवाब में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ एक बहुत महत्वपूर्ण वार्ता की शुरुआत की थी। उनका मानना है कि यह बातचीत सामरिक दृष्टि से अत्यंत आवश्यक थी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके। ट्रंप ने विश्वास जताते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ईरान इस जंग को और अधिक खींचने में सक्षम है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर से बिगड़ते हालात
कुछ समय के लिए तनाव में कमी आने के बाद, होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर से स्थिति नाजुक बनी हुई है। ईरान के केशम द्वीप के करीब धमाकों की आवाजें सुनाई देने की सूचना है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, ये विस्फोट उन सैन्य अभियानों का हिस्सा हैं जो कथित दुश्मन ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किए जा रहे हैं।
हथियारों के जखीरे पर डोनाल्ड ट्रंप का बयान
वाशिंगटन में पत्रकारों के साथ चर्चा करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने गोला-बारूद की कमी से जुड़ी अटकलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका के पास हथियारों का असीमित भंडार मौजूद है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका इस समय बहुत मजबूत स्थिति में है और देश के पास प्रचुर मात्रा में गोला-बारूद सुरक्षित है।
ईरान के राष्ट्रपति का आर्थिक दबाव पर तर्क
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने अमेरिका की नीतियों की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान पर अधिकतम आर्थिक दबाव डालने की कोशिश की है। पेज़ेशकियन के दावों के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल के हमलों के चलते ईरान को हर दिन लगभग 230 मिलियन क्यूबिक मीटर गैस का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सऊदी अरब और फ्रांस के बीच कूटनीतिक सक्रियता
मध्य पूर्व में बढ़ रही अस्थिरता के बीच सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से फोन पर बात की है। सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार, दोनों नेताओं ने क्षेत्र की सुरक्षा, स्थिरता और लाल सागर में नौवहन की आजादी के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। यह बातचीत यमन के ईरान-समर्थित हूथी विद्रोहियों द्वारा सऊदी ठिकानों पर किए गए हमलों की पृष्ठभूमि में हुई है।
सऊदी अरब पर मंडराता संभावित खतरा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब संभावित समन्वित हमलों के प्रति पूरी तरह सतर्क है। खुफिया इनपुट संकेत दे रहे हैं कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की देखरेख में यमन के हूथी और इराकी मिलिशिया समूह सऊदी अरब को निशाना बना सकते हैं। सऊदी अरब के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उन्हें अमेरिका और अन्य सहयोगी देशों से खुफिया जानकारी मिली है, जिसके अनुसार उनके नागरिक और आर्थिक ठिकानों पर हमले हो सकते हैं। इनमें प्रमुख रूप से ऊर्जा बुनियादी ढांचा, हवाई अड्डे और बंदरगाह शामिल हैं।
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