असम को मिलेगा नया फोर-लेन हाईवे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक में देश के बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र के लिए बड़े फैसलों पर मुहर लगाई गई है। सरकार ने असम में एनएच-15 पर गुवाहाटी के नजदीक स्थित बैहाटा चारियाली से तेजपुर तक एक आधुनिक 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर बनाने का निर्णय लिया है। इस परियोजना की कुल लंबाई 135.871 किमी तय की गई है। इस महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना को एनएच (ओ) के अंतर्गत 8970.20 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया जाएगा। इसे बिल्ट-ऑपरेट-ट्रांसफर यानी बीओटी टोल मोड के आधार पर तैयार करने की योजना है।
तेजपुर बाईपास पर वायुसेना के लिए इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा
इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियत तेजपुर बाईपास पर बनने वाली 4.9 किमी लंबी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ईएलएफ) है। इस सुविधा का निर्माण भारतीय वायु सेना की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप किया जा रहा है। इस हाईवे के बनने से ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट पर स्थित एनएच-27 यानी ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर पर गाड़ियों का दबाव काफी कम हो जाएगा। इसके अलावा, परियोजना के तहत 58.7 किमी लंबे कुल 5 प्रमुख बाईपास तैयार किए जाएंगे। इससे बैहाटा चारियाली, सिपाझार, खारुपेटिया, डेकियाजुली और तेजपुर जैसे घनी आबादी वाले कस्बों से गुजरने वाले ट्रैफिक को सुगम बनाया जा सकेगा और जाम से मुक्ति मिलेगी।
बुनियादी ढांचे का विशाल जाल और सुरक्षा के इंतजाम
इस सड़क परियोजना में तकनीकी इंजीनियरिंग का पूरा ध्यान रखा गया है। इसमें 15 बड़े पुल, 30 छोटे पुल, 19 फ्लाईओवर और एक विशेष हाथी अंडरपास शामिल है, जिसे तेजपुर बाईपास पर बनाया जाएगा। चूंकि यह एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे होगा, इसलिए ट्रैफिक को निर्बाध गति देने के लिए इसमें 46 अंडरपास और 210 किमी लंबी सर्विस रोड का निर्माण किया जाना भी प्रस्तावित है। सरकार का मानना है कि इस परियोजना के पूर्ण होने से यात्रा का समय आधा हो जाएगा, जिससे सड़क सुरक्षा के स्तर में सुधार होगा, ईंधन की खपत घटेगी और यात्रियों के वाहन संचालन के खर्च में भी कमी आएगी।
23,731 करोड़ रुपये की 'गोबरधन' योजना को मंजूरी
बुनियादी ढांचे के साथ-साथ मंत्रिमंडल ने ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी पहल करते हुए राष्ट्रीय एकीकृत योजना 'गोबरधन' को भी हरी झंडी दी है। इस योजना का बजट 23,731 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के बाद बताया कि इस योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से लेकर 2035-36 तक लागू किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य कम्प्रेस्ड बायोगैस यानी सीबीजी को भारत के भविष्य के ऊर्जा मिश्रण का एक अनिवार्य और महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना है।
सीएनजी क्षेत्र के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम का निर्माण
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस योजना का लाभ कृषि अपशिष्ट, पशुओं के गोबर, गन्ने की खोई और शहरी जैविक कचरे जैसे बायोमास संसाधनों को स्वच्छ ईंधन और जैविक खाद में बदलकर मिलेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी। सरकार इस योजना के जरिए कम्प्रेस्ड बायोगैस क्षेत्र में सुनिश्चित मांग, स्थिर मूल्य निर्धारण और पाइपलाइन अवसंरचना जैसी सुविधाएं प्रदान करेगी। इसके साथ ही ऋण समर्थन और उन्नत प्रौद्योगिकी के माध्यम से देश भर में बायोगैस के उत्पादन और वितरण के लिए एक स्पष्ट एवं मजबूत ढांचा तैयार किया जाएगा।
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