राष्ट्रपति की बढ़ती हुई शक्तियां
अमेरिकी राजनीति में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कद और रसूख पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है। हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति की शक्तियों का दायरा काफी विस्तृत कर दिया है। अदालत के इस निर्णय के बाद, अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास यह अधिकार आ गया है कि वे अधिकांश स्वतंत्र संघीय एजेंसियों के मुखियाओं को जब चाहे तब अपने पद से हटा सकते हैं। इस प्रक्रिया के लिए अब उन्हें किसी भी विशेष कारण या स्पष्टीकरण देने की आवश्यकता नहीं होगी। यह बदलाव अमेरिकी प्रशासन के कामकाज के तरीके को पूरी तरह से बदलने वाला साबित हो रहा है।
फेडरल रिजर्व को मिली सुरक्षा
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश के दायरे से एक प्रमुख संस्था को बाहर रखा है। अमेरिका के केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व के प्रमुख और अधिकारियों को इस नियम के तहत हटाने की छूट राष्ट्रपति को नहीं दी गई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि फेडरल रिजर्व की गवर्नर लिसा कुक (Lisa Cook) अभी अपने पद पर कार्य करना जारी रखेंगी। लिसा कुक वर्तमान में ट्रंप प्रशासन द्वारा उन्हें पद से हटाने के प्रयासों के विरुद्ध कानूनी मोर्चा संभाले हुए हैं। उन पर मॉर्गेज फ्रॉड जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन उन्होंने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। सुप्रीम कोर्ट के इस अपवाद को एक बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
पुराने नियमों में बड़ा बदलाव
इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने करीब 91 साल पुराने अपने ही एक ऐतिहासिक फैसले, जिसे 'हमफ्रीज एग्जीक्यूटर बनाम यूनाइटेड स्टेट्स' (Humphrey’s Executor v. United States) के नाम से जाना जाता था, को पलट दिया है। दशकों पुराने उस निर्णय में राष्ट्रपति की शक्तियों पर कुछ सीमाएं तय की गई थीं ताकि स्वतंत्र एजेंसियां बिना किसी राजनीतिक दबाव के अपना काम कर सकें। अब इस नई व्याख्या के बाद, 6 कंजर्वेटिव जजों के बहुमत से आया यह फैसला ट्रंप प्रशासन की प्रशासनिक शक्तियों को अभूतपूर्व स्तर पर विस्तार दे रहा है। इस पूरी बेंच में कुल 9 जज शामिल थे जिन्होंने इस मामले पर अपनी राय रखी।
चीफ जस्टिस का तर्क और संविधान
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने अपने लिखित फैसले में तर्क दिया है कि राष्ट्रपति को अपने अधीनस्थ अधिकारियों को हटाने से रोकना संविधान में वर्णित शक्तियों के स्पष्ट बंटवारे के सिद्धांत के खिलाफ है। अदालत ने यह फैसला फेडरल ट्रेड कमीशन की पूर्व सदस्य रेबेका स्लॉटर से जुड़े मामले में सुनाया है। रेबेका स्लॉटर को डोनाल्ड ट्रंप ने बिना किसी ठोस कारण के पद से बर्खास्त कर दिया था, जबकि उस समय संघीय कानून के तहत उन्हें हटाने के लिए उचित कारण बताना अनिवार्य था।
किन संस्थाओं पर होगा असर
न्यायालय का यह ताजा फैसला केवल एक एजेंसी तक सीमित नहीं है। इसका कानूनी प्रभाव नेशनल लेबर रिलेशंस बोर्ड, मेरिट सिस्टम्स प्रोटेक्शन बोर्ड और कंज्यूमर प्रोडक्ट सेफ्टी कमीशन जैसी कई अन्य महत्वपूर्ण स्वतंत्र संघीय संस्थाओं पर भी पड़ेगा। डोनाल्ड ट्रंप ने पहले भी इन संस्थानों के बोर्ड सदस्यों को पद से हटाया है, और अब कानून के समर्थन के साथ उनका यह कदम पूरी तरह से वैध और मान्य हो गया है।
डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया
इस अदालती जीत के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर अपनी खुशी जाहिर की है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि यह उनके लिए बेहद सम्मान की बात है कि मौजूदा राष्ट्रपति के रूप में उन्हें यह ऐतिहासिक और अभूतपूर्व फैसला प्राप्त हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि यह प्रेसिडेंशियल शक्तियों के संबंध में अब तक सुनाए गए सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक फैसलों में से एक है। स्पष्ट है कि यह फैसला न केवल उनके कार्यकाल को प्रभावित करेगा, बल्कि भविष्य में अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय की कार्यप्रणाली को भी नए सिरे से परिभाषित करेगा।
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