राजस्थान की अनमोल सौगात
राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों की रसोई में केर एक ऐसा नाम है, जिसका इंतजार लोग पूरे साल करते हैं। यह एक जंगली फल है जो आमतौर पर गर्मियों के मौसम में ही बाजार में दिखाई देता है। इसकी उपलब्धता का समय बहुत सीमित होता है, जो कि केवल तीन महीने का है। जो लोग तीखा और खट्टा खाने के शौकीन हैं, उनके लिए यह सब्जी किसी दावत से कम नहीं है।
स्वाद और सेहत का मेल
मारवाड़ और शेखावाटी के क्षेत्रों में केर की सब्जी को एक खास पारंपरिक विधि से पकाया जाता है। इसे बनाने के लिए शुद्ध तेल, दही और चुनिंदा पारंपरिक मसालों का इस्तेमाल किया जाता है। जब ये सभी चीजें एक साथ मिलती हैं, तो सब्जी का स्वाद लाजवाब हो जाता है। यही कारण है कि एक बार इसे चखने वाला व्यक्ति बार बार इसकी मांग करता है।
किसके साथ खाएं
केर की सब्जी का असली आनंद पारंपरिक राजस्थानी भोजन के साथ आता है। इसे लोग अक्सर निम्नलिखित के साथ खाना पसंद करते हैं:
- बाजरे की रोटी
- मिस्सी रोटी
- दाल बाटी
सेहत के लिए भी गुणकारी
सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि केर में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं। यह सेहत के लिहाज से भी काफी फायदेमंद माना जाता है। सीमित समय के लिए मिलने वाला यह फल न केवल भोजन का स्वाद बढ़ाता है, बल्कि गर्मियों के दौरान शरीर को तंदुरुस्त रखने में भी मदद करता है।
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